सीखिए भारतीय कुश्ती के बेहद ख़तरनाक दांव

राजीव तोमर
    • Author, सुशांत एस मोहन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मुंबई
  • प्रकाशित

कुश्ती का खेल जितना देखने में आसान और रोचक लगता है ये उतना ही मुश्किल और तकनीकी भी है.

एक पहलवान के लिए सिर्फ़ ताकत और शारिरिक सौष्ठव ही सबकुछ नहीं होता बल्कि उसे फ़ुर्ती और धैर्य के साथ अपने प्रतिद्ंवद्वी पहलवान का मन पढ़ना पड़ता है और फिर मौका लगते ही सही दांव लगाना पड़ता है.

<bold><documentLink href="/hindi/multimedia/2014/12/141231_sushant_tricks_wrestling_vm" document-type="video"> (देखिए: कुश्ती के दांव-पेंच)</documentLink></bold>

कुश्ती के कुछ दांव जो बेहद मशहूर हैं और अक्सर पहलवान इन दांवो को अपना आखिरी हथियार बनाते हैं उन दांव पेंचो को हमारे सामने कर के दिखाया अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पहलवान राजीव तोमर ने.

राजीव तोमर भारत के अंतर्राष्ट्रीय कुश्ती दल के 125 भार वर्ग के अकेले पहलवान हैं और हाल ही में उन्होंने कॉमनवेल्थ खेलों में रजत पदक हासिल किया था.

निकाल दांव

निकाल दांव

भारत के गांव देहातो में होने वाले दंगलो में इस दांव को बेहद पसंद किया जाता है.

इस दांव के महारथी पहलवान सिर्फ इस एक दांव के बल पर अपने प्रतिद्वंद्वी को चित्त कर देते हैं.

इस दांव में पहलवान अचानक झुक कर अपने प्रतिद्ंवद्वी की टांगो के बीच में निकल जाता है और उसे कंधो से उठा कर जमीन पर पटक देता है. एक भारी पहलवान के विरूद्ध इस दांव को लगाना बेहद कठिन होता है.

कलाजंग दांव

कलाजंग दांव

दिन में तारे दिखा सकने वाले इस दांव के लिए बेहद ताकत और फ़ुर्ती की ज़रूरत होती है. एक विरोध करते प्रतिद्ंवद्वी पर इसे लगाना काफ़ी मुश्किल है.

इस दांव में पहलवान अपने विरोधी को उसके पेट के बल अपने कंधो पर उठा लेता है और फ़िर इसे पीठ के बल पटकता है.

ये भारत का एक प्राचीन दांव है और इसी दांव को डब्लयूडब्लयूएफ़ के मशहूर पहलवान जॉन सीना भी इस्तेमाल करते हैं.

जांघिया दांव

जांघिया दांव

कुश्ती लड़ते हुए जांघिया पहनना अनिवार्य होता है क्योंकि यह कुश्ती की पारंपरिक पोशाक है. लेकिन जांघिये से ही एक दांव भी जुड़ा है जिसे जांघिया दांव कहा जाता है.

इस दांव में पहलवान पहले एक दूसरे से भिड़ते हैं और फिर दोनों एक दूसरे का जांघिया कसकर पकड़ लेते हैं. जो व्यक्ति पहले अपने विरोधी के पैर जमीन से उठा कर उसे पटक देता है वह विजयी हो जाता है.

इस दांव में जबर्दस्त ताकत और संतुलन की ज़रूरत होती है साथ ही इसे ओलिंपिक या किसी भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में इस्तेमाल नहीं किया जाता.

टंगी या ईरानी दांव

ईरानी दांव

ये राजीव तोमर का प्रिय दांव है और इस दांव से उन्होने बड़े बड़े पहलवानों को चित्त किया है.

इस दांव में अक्सर बड़े पहलवान को फ़ायदा मिलता है क्योंकि हल्के पहलवान को उठाना आसान हो जाता है.

सांडीतोड़ और बगलडूब

सांडीतोड़

ये दो शब्द आप कुश्ती के दौरान अक्सर सुनेंगे. सांडीतोड़ना अर्थात हाथ मरोड़ देना और बगलडूब यानी विरोधी पहलवान के बगल के नीचे से निकल जाना.

ये दोनों ही पेंच, दांव लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. किसी दांव को पूरा करने के लिए किए जाने वाले प्रयास पेंच कहलाते हैं.

बगलडूब

अगर आपके पेंच सही हुए तो दांव भी ज़ोरदार लगेगा.

अब आप सोचते रहिए कि ज़िदंगी में कब कौन सा दांव आपने लगाया था लेकिन ध्यान रखें ये सभी दांव काफ़ी अभ्यास के बाद किए जाते हैं और इनमें चोट लगने का पूरा ख़तरा होता है.

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