नसबंदी: दवा कंपनियों पर एफ़आईआर का आदेश

छत्तीसगढ़, नसबंदी मामला
    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, बिलासपुर से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में नसबंदी के बाद महिलाओं की मृत्यु के सिलसिले में राज्य सरकार ने दवा कंपनियों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.

नसबंदी के बाद मरने वाली महिलाओं की संख्या 15 हो गई है.

एक दिन पहले दवाइयों में गड़बड़ी की आशंका पर छह दवाओं और दूसरी चिकित्सा सामग्री को राज्य में प्रतिबंधित किया गया था.

इसके अलावा बिलासपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाक्टर एससी भांगे और सरकारी सर्जन डाक्टर आरके गुप्ता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है.

छत्तीसगढ़, नसबंदी मामला

इनके अलावा इलाके के विकास खंड अधिकारी प्रमोद तिवारी और नसबंदी कार्यक्रम के राज्य समन्वयक केसी उरांव को भी निलंबित किया जा चुका है.

'प्रथम दृष्ट्या कार्रवाई'

इससे पहले गुरुवार को गिरफ़्तारी के बाद डॉक्टर आरपी गुप्ता को बिलासपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

इससे पहले पत्रकारों से बातचीत में डाक्टर आरपी गुप्ता ने कहा था, “गड़बड़ी दवाओं में है लेकिन सरकार दवा कंपनियों के साथ मिली हुई है. ऊपर के लोगों के इशारे पर मुझे फंसाया गया है.”

इलाके के विकास खंड अधिकारी प्रमोद तिवारी ने भी दवाओं में गड़बड़ी के आरोप को दोहराया.

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लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इन आरोपों को पूरी तरह से ख़ारिज किया है.

तीन दिन में दूसरी बार बिलासपुर के अस्पतालों में भर्ती पीड़ित महिलाओं को देखने पहुंचे रमन सिंह ने कहा, “किसी को बलि का बकरा नहीं बनाया जाएगा. दवाइयों के सैंपल जांच के लिए कोलकाता भेजे गए हैं. हम तत्काल प्रथम दृष्ट्या कार्रवाई कर रहे हैं.”

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