नीतीश कुमार क्या बनेंगे पीएम पद के दावेदार, क्या कह रहे हैं उनके गांव में लोग?

नीतीश कुमार के पैतृक घर के सामने लगा एक बोर्ड
इमेज कैप्शन, नीतीश कुमार के पैतृक घर के सामने लगा एक बोर्ड
    • Author, विष्णु नारायण
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, कल्याण बिगहा से
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नीतीश कुमार ने इस सप्ताह 8वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. लेकिन, इस बार वो एक बार फिर से वो लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के साथ मिलकर सरकार चलाएँगे. नीतीश कुमार पिछले पाँच साल से बीजेपी के साथ थे. इस नए सियासी समीकरण के साथ सूबे का मुख्यमंत्री बनने पर क्या कहते हैं उनके गांव के लोग?

नीतीश कुमार के गाँव का नाम कल्याण बिगहा है जो नालंदा ज़िले के हरनौत प्रखंड में आता है.

वहाँ हमें मिले 65 साल के इंद्रदेव प्रसाद सिन्हा. हाल ही में हुई राजनीतिक हलचल पर अपना मत व्यक्त करते हुए वो कहते हैं," पद तो बस सेम ही है तो क्या खुशी और क्या गम?

"रही बात किसी का साथ छोड़ने की और किसी और के साथ जाने की तो मेरा नज़रिया जरा अलग है. जिसको छोड़ा फिर उसी के साथ हो लिए. समस्या का हल तो नहीं हुआ, वो कारण तो जस का तस है और फिर उसी में जाके सट गए. मुझे अच्छा नहीं लगा."

यहां हम आपको बताते चलें कि वहीं हमारी मुलाकात सीताराम सिंह (75 वर्ष) से भी हुई.

सीताराम सिंह सीएम नीतीश कुमार के क़रीबी लोगों में रहे हैं. गांववाले उनका परिचय नीतीश कुमार के दोस्त के तौर पर कराते हैं. हालांकि वे खुद को उनका सेवक कहते हैं.

सीताराम सिंह अलग-अलग सहयोगियों के समर्थन से नीतीश कुमार के फिर से मुख्यमंत्री बनने पर कहते हैं, "ई आदमी बहुत ईमानदार हैं. अपने ढक पर अड़े रहते हैं. इनको पैसे का कोई लोभ नहीं है."

वहीं जब हमने उनसे नीतीश कुमार के विरोधियों की ओर से पलटू राम और कुर्सी कुमार कहने के संदर्भ में सवाल पूछे तो उनका कहना था, "ई तो समूचा देश और प्रदेश देखा है कि वो कितना काम किए हैं. ई कहीं एक धूर जमीन तक कहीं खरीदे हैं. ई चोर-बांगर आदमी नहीं हैं, और जो कोई इनके साथ दंगल करता है तो ई का करें?"

इंद्रदेव प्रसाद सिन्हा
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आम के बजाय ख़ास गांव

मुख्य सड़क को छोड़कर कल्याण बिगहा के लिए जाने वाली सड़क को देखकर इस बात का तो अंदाज़ा हो ही जाता है कि हम किसी आम के बजाय ख़ास गांव की ओर बढ़ रहे हैं.

गांव की ओर इंगित करने वाले बोर्ड भी इस बात की तस्दीक करते नज़र आते हैं. जैसे गांव के नाम के साथ ही राजकीय औषधालय और इन्डोर शूटिंग रेंज़.

गौरतलब है कि नीतीश कुमार के पिता एक वैद्य (आयुर्वेद के डॉक्टर) ही थे.

सीताराम सिंह
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वहीं उनके पैतृक घर के सामने भी हमें एक बोर्ड दिखा.

उस बोर्ड पर लिखा था, "15 साल बेमिसाल. बिहार में सर्वाधिक अवधि मुख्यमंत्री रहने का गौरव. कल्याण बिगहा के लाल, आपने कर दिया कमाल! आप ही विकास पुरूष, आप ही नीतीश कुमार! आपकी सरकार, आपसे सरोकार."

गांव की शुरुआत में उनके माता-पिता और पत्नी की याद में स्मृति स्थल भी है. जहां वे अलग-अलग मौकों पर आते-जाते हैं.

अनुभव में सबसे आगे हैं नीतीश कुमार

कल्याण बिगहा के (स्मृति स्थल) के नजदीक हमारी मुलाकात 24 साल के रंजन से हुई. जब हमने उनसे नीतीश कुमार के फिर से मुख्यमंत्री बनने को लेकर बात की तो उन्होंने कहा, "हमलोग तो उनके गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने 8वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. हमारे लिए तो यह खुशी की बात है."

वहीं जब हमने उनसे नीतीश कुमार के नाम को लेकर प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर सवाल किए तो उनका कहना था कि आप पूरे भारत में उठाकर देख लें कि एक-दो मुख्यमंत्री के अलावा सबसे बेस्ट मुख्यमंत्री यही हैं. तजुर्बा और अनुभव में भी देखा जाए तो माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सबसे आगे हैं, और प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य भी हैं."

रंजन
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यहां हम आपको यह भी बताते चलें कि नीतीश कुमार ने आठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए शपथ ली है.

सूबे में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड उनके नाम ही है. हालांकि इस रिकॉर्ड में वे अलग-अलग समय पर अलग-अलग गठबंधन का हिस्सा ज़रूर रहे हैं.

इसके साथ ही इस बात को बताना भी ज़रूरी हो जाता है कि इस बीच उनके समर्थक उनके प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर नारे भी उछालने लगे हैं.

राज्यपाल को समर्थन पत्र सौंपने के बाद पत्रकारों की ओर से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर किए गए सवाल पर पहले तो वे ना-नुकुर करते रहे, लेकिन बीते रोज़ उन्होंने यह बात तो खुलकर बोल ही दी है कि जो 2014 में आए थे वे 2024 में रहेंगे या नहीं यह समय बताएगा.

ज़ाहिर तौर पर सब कुछ समय के गर्भ में छिपा है लेकिन उनके गांव के रहवासी 75 साल के रामसोहारन को ऐसी उम्मीद नहीं दिखती और क्यों के सवाल पर वे जवाब देते हैं "क्योंकि नरेंद्र मोदी बहुत दिमाग़दार और बड़े आदमी हैं."

मुनचुन देवी
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कल्याण बिगहा की महिलाएं क्या कह रहीं?

नीतीश कुमार के राजनीतिक क़द और मजबूती को लेकर एक बात आमतौर पर कही जाती है कि महिलाएं उनकी ख़ामोश वोटर्स हैं.

शराबबंदी जैसी नीति के लाने और उसपर पुनर्विचार न करने के पीछे भी राजनीतिक विश्लेषक महिलाओं के वोट को एक बड़ी वजह मानते हैं.

नीतीश कुमार के 8वीं बार शपथ लेने पर उनके गांव की रहवासी मुनचुन देवी कहती हैं कि उनकी इतनी समझदारी नहीं लेकिन वे (नीतीश कुमार) जो भी कर रहे हैं, ठीक ही कर रहे हैं.

वहीं जब हमने उनसे शराबबंदी को लेकर सवाल किए तो उनका कहना था कि "शराबबंदी कहां है? शराब तो चालू है. बंद भी है, चालू भी है. हमलोग कह देंगे कि बंद है तो बंद थोड़े हो जाएगा. देखने वाले तो देख ही रहे हैं".

कल्याण बिगहा की रहवासी और रिश्ते में नीतीश कुमार की भाभी मीना देवी नीतीश कुमार के फिर से मुख्यमंत्री बनने के सवाल पर कहती हैं, "गांव के लिए तो वे सब दिन से अच्छे ही रहे हैं. गांव में हॉस्पिटल बन गया. हम रोगी आदमी हॉस्पिटल में जाते हैं, दवाई मिल जाता है."

वहीं जब हमने उनसे नीतीश कुमार के पीएम पद की उम्मीदवारी पर सवाल किए तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनेंगे तो अच्छा ही होगा.

मीना देवी
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इसके साथ ही गांव की एक और रहवासी रिंकी देवी सीएम के इस्तीफ़े और शपथ पर खुशी ज़ाहिर करती हैं.

वहीं जब हमने नीतीश कुमार के रह-रहकर पाले बदलने को लेकर उनसे सवाल किया तो उनका कहना था कि राजनीति में तो ई सब होता ही रहता है. बात करने वाला तो बात करबे न करेगा. उस पर रोक थोड़े है. जिसको जो समझ आता है वो बोलता है.

अंत में बात अगर गांव की माहौल की करें तो गांव में मिली-जुली भावनाएं हैं. लोग-बाग उनके लिए अलग-अलग पार्टियों की ओर से इस्तेमाल किए गए विशेषणों पर मुस्कुराते तो ज़रूर हैं, लेकिन कुछ भी अनावश्यक कहने से कतराते दिखे.

उनके लिए गांव के किसी भी शख़्स का इतने बड़े पद तक पहुंचना खुशी और गर्व की बात है.

हालांकि गांव में कुछ लोग ज़रूर हैं जिन्हें लगता है कि अगले चुनाव में पीएम की दावेदारी के हिसाब से नरेंद्र मोदी का ही पलड़ा भारी रहेगा.

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