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ऑपरेशन ब्लू स्टार: लोग छिपकर दे रहे थे, हम खुले आम देंगे हथियारों की ट्रेनिंग- जत्थेदार अकाल तख़्त
- पढ़ने का समय: 4 मिनट
अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा है कि अब सिख संस्थाओं को सरेआम मॉर्डन हथियारों की ट्रेनिंग का प्रबंध करना चाहिए. ज्ञानी हरप्रीत सिंह अमृतसर में हज़ारों सिख श्रृद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे.
अमृतसर में छह जून को हर साल अकाल तख्त पर हज़ारों सिख क्षद्धालु एकत्र होते हैं और ऑपरेशन ब्लू स्टार को याद करते हैं. श्रद्धालु दरबार साहिब परिसर का दौरा करते हैं और जून 1984 में स्वर्ण मंदिर परिसर में भारतीय सेना की कार्रवाई के दौरान मारे गए लोगों को याद करते हैं.
इस साल भी सोमवार को 1984 में हुए भारतीय सेना के अभियान ऑपरेशन ब्लू स्टार की 38वीं वर्षगांठ के मौक़े पर अमृतसर के अकाल तख्त में विशेष समारोह आयोजित किए गए.
समारोह के दौरान कुछ लोगों ने हाथों में तख्तियां पकड़ी हुई थीं और कुछ युवक हवा में तलवार लहरा रहे थे.
क्या कहा अकाल तख़्त के जत्थेदार ने
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने भाषण में कहा, "मैं सिख संस्थाओं को ये कहना चाहूँगा कि जैसे धन गुरू अंगद देव जी ने खडूर साहिब की धरती पर मल अखाड़े स्थापित किए थे वैसे ही आज हमारी संस्थाओं को गतका ( सिख मार्शल आर्ट) अकादमियां और अखाड़े बनाई जानी चाहिए."
उन्होंने कहा, "शूटिंग रेंज जैसे आधुनिक शस्त्र अभ्यास केंद्र भी क़ायम किए जाने चाहिए. दूसरे लोग, छिप कर अपने लोगों को हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे हैं हम सरेआम ये ट्रेनिंग देंगे."
अकाल तख़्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिख समुदाय को संबोधन में कहा, "ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान बच्चे और बुज़ुर्ग दोनों ही शहीद हुए."
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भी निशाने पर लिया और कथित तौर पर कहा कि उन्होंने सिखों के दमन की नीति बनाई और इसी का नजीता साल 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के रूप में सामने आया.
उन्होंने कहा, "ये नीतियां 1947 में ही तैयार की गई थीं. इसी का नतीजा था कि 1984 में अकाल तख़्त और अन्य धार्मिक स्थलों पर हमला हुआ."
ईसाई धर्म के प्रचार को लेकर जताई चिंता
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अपने भाषण में ईसाई धर्म के प्रचार को लेकर भी जताई चिंता कि पंजाब के गांवों में चर्च पैर पसार रहे हैं
उन्होंने कहा, "हमें धार्मिक रूप से कमज़ोर करने के लिए पंजाब की ज़मीन पर ईसाई धर्म को पैर फैलाने दिया जा रहा है. यहां के गांवों में चर्च बनाए जा जा रहे हैं, यह हमारे लिए चिंता का विषय है."
"लेकिन अब गांवों में धर्म के प्रचार का वक्त आ गया है. ऐयर कंडीशन कमरों में बैठे सिख प्रचारकों को बाहर निकल कर धर्म का प्रचार करने की ज़रूरत है ताकि ख़ासकर सीमावर्ती इलाक़ों में सिख धर्म को मज़बूत किया जा सके."
उन्होंने कहा कि पंजाब में नशे की लत युवाओं को बिगाड़ रही है. उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी शिक्षा पर ध्यान देने की ज़रूरत है. उन्होंने सिख संगठनों से अपील की कि वो राज्य के युवाओं को पारंपरिक और आधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दें.
उन्होंने कहा, "उन्हें शिक्षा देकर कुशल बनाने की ज़रूरत है. हमारे युवा जिस देश में जाते हैं, यहूदियों की तरह, वो वहीं की अर्थव्यवस्था पर कब्ज़ा कर लेते हैं. अगर हम धार्मिक रूप से मज़बूत नहीं होंते तो आर्थिक रूप से भी मज़बूत नहीं हो सकेंगे. और फिर हम राजनीतिक रूप स कमज़ोर हो जाएंगे."
उन्होंने सिख संगठनों से कहा, "आगे का रास्ता कठिन है और कोई व्यक्ति इस राह पर चलेगा तो उसे मुश्किलों का भी सामना करना होगा. लेकिन अगर हम भेदभाव भुलाकर साथ आ जाएं तो ये रास्ता आसान हो सकता है."
पहले भी दी थी हथियार रखने की सलाह
हरप्रीत सिंह पहले भी अपने बयानों के लिए चर्चा में रहे हैं.
इससे पहले इसी साल मई में ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा था कि 'इस तरह का समय है' जब हर सिख को एक लाइसेंसी आधुनिक हथियार रखना चाहिए.
10 सिख गुरुओं में से छठवें गुरु हरगोबिंद सिंह के 'गुरता गद्दी दिवस' के मौक़े पर उन्होंने कहा था, "आज भी ख़ासकर के सिख लड़कों और लड़कियों को गुरु हरगोबिंद सिंह के आदेशों पर चलने की ज़रूरत है. उन्हें गटकाबाज़ी (पारंपरिक मार्शल आर्ट), तलवारबाज़ी और गोली चलाने की ट्रेनिंग लेनी चाहिए."
"हर सिख को क़ानूनी तरीक़े से लाइसेंसी आधुनिक हथियार रखने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि यह समय ही ऐसा है और ऐसी बदलती हुई स्थिति है."
उनकी इस टिप्पणी का पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ी आलोचना की थी और कहा था कि सभ्य समाज में हथियारों की कोई जगह नहीं है.
उन्होंने कहा था, "माननीय जत्थेदार श्री अकाल तख़्त साहिब जी, आपको गुरबानी का संदेश 'सरबत दा भला' (सभी का कल्याण) हर घर को भेजना चाहिए न कि हथियार रखने का. जत्थेदार साहब हमें शांति, भाईचारे और आधुनिक विकास का संदेश देना चाहिए, न कि आधुनिक हथियारों का."
उन्होंने कहा, "हम एक ऐसे सभ्य समाज में रह रहे हैं जहां देश क़ानून के शासन से शासित होता है. सौहार्दपूर्ण समाज में हथियारों का कोई स्थान नहीं है."
1984 में क्या हुआ था?
6 जून 1984 को अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना ने दमदमी टकसाल के प्रमुख और पंजाब में पृथकतावादी अभियान चला रहे उनके प्रमुख जरनैल सिंह भिंडरांवाले को उनके सैंकड़ों हथियारबंद साथियों के साथ ख़त्म कर दिया था.
स्वर्ण मंदिर के परिसर में हुई इस सैन्य कार्रवाई से दुनियाभर में रहने वाले सिख समुदाय के लोग भड़क उठे और उन्होंने इस परिसर को अपवित्र करने का आरोप सेना पर लगाया.
आज भी पंजाब में एक समूह भिंडरांवाले को शहीद नेता के रूप में देखता है. जिसकी वजह से हर वर्ष पंजाब में ख़ासकर अमृतसर में आज के दिन कुछ तनाव रहता है. इस मौक़े पर लगभग हर साल स्वर्ण मंदिर में ख़ालिस्तान के समर्थन में नारे लगए जाते हैं.
भारत सरकार के मुताबिक इस घटना में क़रीब 400 लोग मारे गए जिनमें 87 सैनिक थे.
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