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असम की वो सब-इंस्पेक्टर जिन्होंने अपने मंगेतर को भेजा जेल
असम पुलिस की एक महिला सब-इंस्पेक्टर ने धोखाधड़ी के आरोप में अपने ही मंगेतर को गिरफ़्तार कर लिया है.
नौगांव थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर जुनमोनी राभा ने ओएनजीसी में खुद को कथित जनसंपर्क अधिकारी बताने वाले अपने मंगेतर राणा पोगाग के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराई थी. फिलहाल नौगांव पुलिस राणा को दो दिन की पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.
कुछ महीने पहले भी इस महिला सब-इंस्पेक्टर ने एक सत्तारूढ़ बीजेपी विधायक को फोन पर करारा जवाब दिया था जिसकी मीडिया में ख़ूब चर्चा हुई थी.
पिछले साल अक्टूबर में जुनमोनी और राणा की सगाई हुई थी और इसी साल नवंबर में दोनों शादी करने वाले थे. नौगांव थाने में दर्ज की गई शिकायत के अनुसार पुलिस सब-इंस्पेक्टर जुनमोनी को सगाई के बाद ही इस बात का पता चला कि वो जिस व्यक्ति को अपना जीवन साथी बनाने जा रही थीं, असल में वह एक कथित धोखेबाज़ है.
क्या है शिकायत?
शिकायत के अनुसार आरोपी पोगाग ने अपनी पहली मुलाकात के दौरान जुनमोनी को ओएनजीसी के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में परिचय दिया था.
लेकिन सगाई के बाद जुनमोनी को कई ऐसे सबूत मिले जिससे उनको अपने मंगेतर पर शक होने लगा.
जब वह इस बारे में ज्यादा छानबीन करने लगी तो यह पता चला कि वह कई धोखाधड़ी के मामलों में शामिल थे.
उन पर कई लोगों को नौकरी देने के झूठे झाँसे से करोड़ों रुपए ठगने के आरोप भी लगे हैं.
दोनों की कैसे हुई मुलाकात?
पहली बार दोनों की मुलाक़ात पिछले साल जनवरी में हुई थी जब जुनमोनी माजुली में तैनात थीं. राणा माजुली के ही निवासी हैं.
कई मुलाकातों के बाद दोनों में प्यार हुआ और कुछ महीनों बाद उनके परिवारों के आशीर्वाद से दोनों की सगाई हो गई.
अपनी सगाई और धोखाधड़ी से जुड़े मामले पर जुनमोनी कहती है,"मैं माजुली में तैनात थी और मेरी उनसे मुलाकात जनवरी 2021 में हुई थी. मेरे एक परिचित थाना प्रभारी ने जान-पहचान करवाई थी. पुलिस अधिकारियों के साथ उनकी अच्छी जान-पहचान थी. उसका एक कारण यह भी हो सकता है कि वह धोखाधड़ी के काम में लिप्त थे. इसलिए शायद उसे लगा होगा कि पुलिस के साथ पहचान बनाकर रखने से उसे भविष्य में मदद मिलेगी. उनका एक ऐसा माइंडसेट रहा होगा."
वह आगे बताती है,"इस तरह हुई जान-पहचान के बाद उन्होंने मुझे शादी का प्रस्ताव दिया. मैंने कहा मुझे कोई दिक्कत नहीं है लेकिन घर वालों के साथ इस बारे में बात करनी होगी.फिर हम दोनों के घरवाले मिले और बात पक्की हो गई. कुछ दिन बाद हमारी सगाई हो गई. इस बीच मेरा तबादला नौगांव हो गया. लेकिन यहां आने के बाद उनके काम से जुड़ी कुछ बातों को लेकर मुझे शक हुआ. जब थोड़ी छानबीन की तो कुछ ऐसी बातों का पता चला जिससे मेरी आँखें खुल गई."
कैसे सामने आई धोखाधड़ी?
बिना किसी का नाम लिए जुनमोनी ने इस पूरे मामले में उनकी मदद करने वाले तीन लोगों का शुक्रिया अदा किया जिन्होंने राणा की तमाम जानकारियां सबूतों के साथ उन्हें लाकर दी.
वह कहती है,"राणा ने खुद को ओएनजीसी का जनसंपर्क अधिकारी बताया था. उन्होंने कहा था कि वह कॉर्पोरेट की सामाजिक जिम्मेदारी के तहत ग्रामीण विकास का काम देख रहे हैं. मैंने भी यहां की प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज से जनसंचार और पत्रकारिता की पढ़ाई की है, इसलिए मैं एक जनसंपर्क अधिकारी की इमेज से काफी प्रभावित हुई थी. लिहाजा एक बार भी यह ख्याल मन में नहीं आया कि वह व्यक्ति एक ठग हो सकता है."
आरोपी राणा के धोखाधड़ी की जानकारी देते हुए जुनमोनी ने कहा,"उसने जिस व्यक्ति से 25 लाख रुपए ठगी किए थे उसने खुद आकर मुझे राणा की सारी करतूत बताई. जब मैंने इस बारे में राणा से लगातार पूछताछ की तो सारा सच सामने आ गया. चूंकि मेरे साथ उसने इतना बड़ा धोखा किया है तो उसकी सज़ा तो उसे मिलनी होगी. मैं प्रेम में पागल होकर शोक मनाने वाली लड़की नहीं हूं. मैंने तुरंत एफआरआई दर्ज करवाई."
नौगांव पुलिस का दावा है कि आरोपी राणा के पास से ओएनजीसी के कई दस्तावेज़ और मुहर बरामद की गई है. राणा अपने साथ हमेशा एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी और एक वाहन चालक को रखते थे ताकि सामने वाले पर उनका रुतबा बना रहे.
विधायक को दिया था करारा जवाब
इस साल जनवरी में जुनमोनी जब माजुली में तैनात थी तो बिहपुरिया क्षेत्र से बीजेपी विधायक अमिय कुमार भुयां के साथ उनकी टेलीफोन पर हुई बातचीत सोशल मीडिया पर लीक हो गई थी, जिससे हंगामा मच गया था.
दरअसल पुलिस ने एक नाव जब्त कर ली थी और विधायक ने जुनमोनी को आदिवासियों के पीछे नहीं पड़ने के लिए कहा था.
लेकिन जुनमोनी ने विधायक को ही ज़िम्मेदारी का पाठ पढ़ाते हुए यह पूछ दिया कि वह (विधायक) एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के बावजूद पुलिस से "नियम और कानून तोड़ने" के लिए कैसे कह सकते है?
दरअसल ब्रह्मपुत्र में एक नाव दुर्घटना के बाद सिंगल इंजन वाली मशीनीकृत नौकाओं की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और इसी के तहत पुलिस ने कार्रवाई की थी.
फिलहाल सोशल मीडिया पर एक बार फिर जुनमोनी के इस साहस भरे कदम की लोग तारीफ़ कर रहें है और उन्हें बधाई संदेश भेज रहें है.
क्या इस घटना से उनको दुख पहुँचा है? ये पूछने पर वो कहती हैं," मैं कई घंटों तक बैठकर यह सोच रही थी क्या मैंने सही किया या गलत. लेकिन गलत काम करने वाले को सज़ा मिलनी ही होगी. फिर चाहे वह अपने घर का सदस्य ही क्यों न हो. इसलिए मैं बिलकुल भी निराश नहीं हूं. मुझे अपने शीर्ष पुलिस अधिकारियों से बहुत सपोर्ट मिला है और मैंने हमेशा अपनी ज़िम्मेदारी को बहुत ईमानदारी के साथ निभाया है. लिहाजा मैं गलत काम करने वाले को उचित दंड दिलाने के लिए काम करती रहूंगी."
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