किस उम्र में पता चलता है सेक्शुअल ओरिएंटेशन या यौन व्यवहार?

सेक्शुअल ओरिएंटेशन, यौन व्यवहार
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क्या किसी 9 वर्षीय बच्चे को उसका यौन व्यवहार पता होता है?

यह एक ऐसा सवाल है जिसका कोई सीधा जवाब अभी तक नहीं मिल सका है.

बीबीसी ने इसी हफ़्ते जैमल माइल्स नामक एक लड़के की कहानी प्रकाशित की थी. जैमल ने कोलोराडो के डेनवर के अपने स्कूल में आत्महत्या कर ली थी और इसके पीछे वजह थी उनका "समलैंगिक होना."

यह जानकारी जैमल की मां लीया रोशेल पियर्स ने दी. उन्होंने यह भी कहा था कि उनके बेटे ने अपनी समलैंगिकता के विषय में उन्हें कुछ हफ़्ते पहले ही बताया था और उन्हें उसपर गर्व था.

इस ख़बर से कई लोगों के मन में यह सवाल कौंध उठा कि कैसे किसी छोटे बच्चे को अपने सेक्शुअल ओरिएंटेशन की जानकारी हो सकती है.

इसके बाद बीबीसी ने दो मनोवैज्ञानिकों से इस विषय में बात की ताकि इस जटिल एवं गंभीर विषय को और अधिक गहराई से समझा जा सके.

ये दोनों विशेषज्ञ हैं, लिंग भेद अध्ययन में विशेषज्ञता रखने वाली सामाजिक मनोविज्ञान में पीएचडी और इंटरनेशन स्कूल ऑफ़ फ्लोरिडा (अमरीका) के मनोविज्ञान विभाग में प्रोफ़ेसर एशिया एटन और अमरीका के मनोविज्ञान संघ के एलजीबीटी मामलों के निदेशक क्लिंटन डब्ल्यू एंडरसन.

सेक्शुअल ओरिएंटेशन
इमेज कैप्शन, अपने बेटे जैमल माइल्स के साथ लीया रोशेल पियर्स

सेक्शुअल ओरिएंटेशन की औसत आयु

एक व्यक्ति किस उम्र में अपने यौन व्यवहार या सेक्शुअल ओरिएंटेशन को जान सकता है? क्या इस विषय में अलग-अलग रिसर्च की गई हैं या जानकार इस पर एकमत हैं?

एशिया एटन कहती हैं, "कुछ रिसर्च के मुताबिक 8 से 9 साल की उम्र में ही बच्चों को पहली बार यौन आकर्षण का अनुभव होता है, वहीं कुछ अन्य रिसर्च के अनुसार ऐसा 11 साल की उम्र के आस पास होता है. इन सभी रिसर्च में सेक्शुअल ओरिएंटेशन की औसत आयु को लेकर अलग-अलग परिणाम मिले हैं."

"यह एक मुश्किल प्रश्न है, क्योंकि यौन व्यवहार और यौन पहचान के बीच एक अंतर है. यौन व्यवहार आम तौर पर बताता है कि व्यक्ति का किसी के प्रति भावनात्मक रूप से अथवा लैंगिकता को लेकर उसके प्रति खिंचाव है."

"स्त्री या पुरुष की ओर अपने लैंगिक आकर्षण को लेकर खुद की यौन पहचान की जा सकती है. लेकिन ये दोनों ही समय और संदर्भ के साथ बदल सकते हैं."

"सच्चाई तो यह है कि लोगों को उम्र के अलग अलग पड़ाव पर अपने यौन व्यवहार को लेकर अलग-अलग अनुभव होते रहते हैं. किसी को केवल छह वर्ष की आयु में तो किसी को 16 साल की उम्र में पहला अनुभव होता है तो किसी किसी को ऐसा अनुभव कभी होता ही नहीं."

"आज के युवाओं को अपने एलजीबीटीक्यू की पहचान हाई स्कूल के दौरान हो जाती है, जो पिछली पीढ़ियों की तुलना में पहले है. इसके पीछे वजह है अधिक जागरूकता और उनकी सामाजिक स्वीकृति."

सेक्शुअल ओरिएंटेशन, यौन व्यवहार

सेक्शुअल ओरिएंटेशन बदलाव संभव

क्लिंटन डब्ल्यू एंडरसन के अनुसार, "इस विषय पर अब भी जांच पड़ताल चल रही है. अन्य कारणों के अलावा क्योंकि लैंगिक और लैंगिकता के मनोवैज्ञानिक पहलू हैं जो शरीर विज्ञान और सामाजिक सांस्कृतिक संदर्भ को दर्शाता है. फिर, जैसे जैसे संस्कृति और समाज में बदलाव आता है, व्यक्ति में लैंगिक और लैंगिकता को लेकर भी बदलाव आता है."

"निश्चित ही ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें 9 साल की उम्र में या उससे भी पहले यौन आकर्षण होता है. लेकिन इस उम्र में उनके पास अपने यौन व्यवहार के मायने को अच्छे से समझने का ज्ञान और भावनात्मक क्षमता भी होती है, ऐसी संभावना नहीं है."

एंडरसन कहते हैं, "ऐसी कोई तय उम्र नहीं है जब किसी व्यक्ति को उसके यौन व्यवहार या सेक्शुअल ओरिएंटेशन का आभास हो. किसी उम्र में उनकी लैंगिक पसंद कुछ और हो सकती है जो समय के साथ बदल जाती है. ज़्यादातर लोगों के लिए, यौन व्यवहार किशोरावस्था में विकसित होता है, क्योंकि माना जाता है कि मूल रूप से यह रोमांस और यौन संबंधों के विषय में है. दूसरी ओर स्त्री पुरुष का भेद तो बचपन में ही विकसित हो जाता है."

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माता-पिता और समाज का असर

बच्चों में यौन व्यवहार की सोच को लेकर उनके माता-पिता और समाज आम तौर पर क्या और कितना असर डालते हैं?

एशिया एटन ने कहा, "शोध से पता चला है कि अधिकांश एलजीबीटीक्यू युवाओं को उनके बचपन में टॉमबॉय कहा जाता था. घर से बाहर निकलने वाले सभी युवाओं पर अपने स्कूल, कार्यस्थलों और सामाजिक समुदायों में पूर्वाग्रहों, भेदभाव या हिंसा का सामना करने का जोखिम होता है."

"सौभाग्य से, शोध से यह भी पता चलता है कि परिवार, दोस्त और स्कूल जो आपकी मदद करते हैं वो इन अनुभवों के नकारात्मक प्रभाव के ख़िलाफ़ बफर यानी प्रतिरोधक का काम करते हैं."

"माता-पिता के पास अपने बच्चों में उनके दोस्तों और बाहरी दुनिया के संदर्भ को बताते हुए उनके भीतर सेक्शुअल ओरिएंटेशन की पहचान के स्वस्थ विकास का अनूठा अवसर होता है."

सेक्शुअल ओरिएंटेशन, यौन व्यवहार

क्लिंटन डब्ल्यू एंडरसन ने कहा, "छोटी उम्र में यौन व्यवहार की पहचान को लेकर माता-पिता और सामाजिक स्वीकृति बहुत महत्वपूर्ण है. एक शोध में पाया गया कि माता-पिता की अस्वीकृति ख़राब मानसिक और व्यावहारिक परिणामों से अधिक जुड़ी होती हैं, जबकि उनकी स्वीकृति इस संबंध में बेहतर परिणाम देते हैं."

"माता-पिता की स्वीकृति कुछ सुरक्षा तो देती है लेकिन जो संस्था जिसमें ये बच्चे शामिल होते हैं, जैसे- स्कूल, खेल इत्यादि, वो भी सकारात्मक या नकारात्मक असर डाल सकते हैं."

वो कहते हैं, "बच्चों की अकादमिक सफ़लता और भावनात्मक रूप से उनकी तंदुरुस्ती सुनिश्चित करने के लिए इन संस्थानों में बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए."

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