दसवीं की एक छात्रा का मंत्री जावड़ेकर के नाम खत

सुदीक्षा बिष्ट और प्रकाश जावड़ेकर
प्रकाशित

सीबीएसई के दसवीं और बारहवीं के परीक्षा पत्र लीक होने के बाद छात्रों और उनके माता-पिता में गुस्सा है. दिल्ली की दसवीं में पढ़ने वाली छात्रा सुदीक्षा बिष्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को एक खत लिखा. पढ़िए,

प्रिय जावड़ेकर जी,

नमस्ते,

मैं दिल्ली की दसवीं क्लास में पढ़ने वाली छात्रा हूँ. मैं और मेरी तरह वो 16 लाख बच्चे, जिन्होंने दसवीं की परीक्षा दी है, आपसे कुछ कहना चाहते हैं, क्योंकि पिछले पांच दिन से हम आपको और आपकी टीम को केवल टीवी पर देख और सुन रहे हैं.

मैंने टीवी पर आपको बोलते सुना कि रात को आपको नींद नहीं आई, क्योंकि आप भी एक पिता हैं. आप दसवीं के बच्चों के साथ साथ उनके अभिभावकों का भी दर्द समझ सकते हैं.

हम बच्चों और हमारे घरवालों के दर्द को समझने का दावा करने के लिए आपका शुक्रिया, लेकिन आपके इस दर्द को दिल्ली पुलिस हमसे ज़्यादा समझ गयी और शायद पहले भी समझ गयी. इसलिए सुना है आपके घर पर सुरक्षा इंतज़ाम ज़्यादा पुख़्ता कर दिया गया और उस इलाके में धारा 144 लगा दी गई.

उम्मीद है, इतने इंतज़ाम के बाद अब रातों में आपको नींद अच्छी आ रही होगी. लेकिन हम 16 लाख बच्चों की नींद अब भी ग़ायब है।

सुदीक्षा बिष्ट

बदलते बयान

पहले आप ने कहा गणित की परीक्षा दोबारा देनी होगी. फिर आपने कहा केवल दिल्ली एनसीआर वाले छात्रों को देनी होगी.

पहले आपने कहा 16 लाख छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी, अब कह रहे हैं केवल दो लाख ही बच्चे हैं जो दोबारा परीक्षा देंगे.

पहले आपने कहा एक हफ़्ते में सीबीएसई नई तारीख़ का ऐलान करेगी. फिर आपके मंत्रालय ने दूसरे ही दिन कहा जुलाई में परीक्षा देनी पड़ सकती है.

अब आपके अफसर रह रह कर अलग-अलग बयान दे रहे हैं.

सुदीक्षा बिष्ट

पहले कहा दिल्ली-हरियाणा में ही होगी दोबारा परीक्षा, फिर कहा झारखंड में पर्चा पहले लीक हुआ होगा तो वहां भी दोबारा परीक्षा हो सकती है.

कभी खबर ये आती है कि परीक्षा दोबारा नहीं होने की भी संभावना है.

आखिर बिना जांच पूरी किए आप इन नतीजों पर कैसे पहुंचे?

सुना है अब सुप्रीम कोर्ट में भी केस शुरू हो गया है.

वीडियो कैप्शन, सीबीएसई के ख़िलाफ़ स्टूडेंट्स ने खोला मोर्चा

कड़ी मेहनत

आपके मंत्रालय में जितना कंफ्यूज़न है ना सर, उतना ही कन्फ्यूज़्ड मैं भी गणित में रहती हूँ. फिर भी कड़ी मेहनत से, साहस जुटा कर, दिन रात पढ़कर मैंने गणित की बोर्ड परीक्षा दी.

पता है पिछले दो साल से दिन-रात बस एग्ज़ाम खत्म होने का इंतज़ार कर रही थी.

घूमना-फिरना, रिश्तेदारों के घर जाना, सब बंद था.

मोबाइल पर दोस्तों से चैट किए और टीवी पर फेवरेट सीरियल देखे तो मुझे लगता है जमाना हो गया है.

'पोरस' और 'तेनालीराम' सीरियल का नाम आजकल काफी चर्चा में है. पता है मैंने इन सब सीरियल का एक भी एपीसोड नहीं देखा.

और मेरे इस 'त्याग' में पूरे परिवार की भूमिका भी कम नहीं थी.

सुदीक्षा बिष्ट

मां ने भी मेरा पूरा साथ दिया. उन्होंने भी अपना फेवरेट सीरियल देखना छोड़ा.

उनका पूरा ध्यान मेरी सेहत और मेरे खाने पीने पर रहता था.

मेरे सोने के बाद वो सोती और जागने से पहले जाग जाती.

मैं 12-14 घंटे पढ़ती तो मां 16-18 घंटे.

पापा भी ऑफिस की मीटिंग कम करते थे, मुझे ट्यूशन लेने और छोड़ने जाने में उनका ज्यादा वक्त लगता. लेकिन एक बार भी उफ नहीं किया.

बस स्कूल से घर, घर से ट्यूशन, ट्यूशन से घर इसी के बीच बंध कर रह गई है हमारी ज़िंदगी.

इस ज़िंदगी से छुटकारा मिलने ही वाला था... लेकिन ....

...लेकिन ये हो न सका...

प्रधानमंत्री की किताब - एग्ज़ाम वॉरियर्स
इमेज कैप्शन, एग्ज़ाम वॉरियर्स का कवर पेज

एग्ज़ाम वॉरियर्स

एग्ज़ाम से पहले ख़ुद आपने ही मोदी जी की किताब 'एग्ज़ाम वॉरियर' पढ़ने को कहा था. पता है मैंने पूरा पढ़ा था. उस पर अमल भी किया.

आप ही ने कहा था, एग्ज़ाम में worrier नहीं warrior बनिए. हमने तो अपनी तरफ से पूरी कोशिश की.

लेकिन लगता है आप बच्चों को किताब पढ़ाने के चक्कर में खुद किताब पढ़ नहीं पाए.

आपकी तरफ से जो कोशिश होनी चाहिए थी, वो नहीं हुई.

लेकिन आपके पास अब भी वक़्त है. आप भी एक बार उस किताब को ज़रूर पढिए.

और हां सर, आपके घर के बाहर जितने पुलिसवाले खड़े हैं ना, उसमें से एक चौथाई भी सीबीएसई ने पेपर प्रिंटिंग और सेटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में लगाया होता, तो ऐसी नौबत ही नहीं आती.

सीबीएसई का सर्कुलर

कैसे थे सुरक्षा के इंतजाम

उससे भी ज़्यादा बड़ी बात, जितना ट्विटर पर आप सक्रिय रहते हैं ना, उतना अगर मेल पर सीबीएसई वाली अनीता मैडम सक्रिय रहतीं तो भी शायद ये नौबत आती ही नहीं.

सबसे पहले 12वीं के एकाउंटेंसी का पेपर लीक होने की खबर आई थी, लेकिन तब सीबीएसई ने और आपके मंत्रालय ने उस पर ध्यान नहीं दिया.

क्या आपने या सीबीएसई ने उसके बाद कुछ भी नया कदम दूसरे पेपर को सुरक्षित रखने के लिए उठाया था?

दिल्ली के शिक्षा मंत्री ने तो ट्विटर पर उसकी पुष्टि करते हुए जांच की बात भी कही थी. तब भी आपने अपने मंत्रालय को क्यों नहीं अलर्ट किया?

हमारे प्रधानमंत्री जी अक्सर अपने भाषणों में एक-एक पल को कीमती बताते हैं.

हमको बताइये, 16 लाख बच्चों का एक दिन और बेजा खर्च करने की कीमत आप कैसे नहीं समझ पाए? क्या आप इसकी जिम्मेदारी तय कर पाएंगे?

कभी बोर्ड की परीक्षा बंद कर देतें हैं, कभी शुरू करा देते हैं. कभी संस्कृत पढ़ने को कहते हैं तो कभी जर्मन, कभी हल्दीघाटी की लड़ाई में कोई जीतता है, तो कभी कोई और.

आखिर कब तक आप हम लाखों बच्चों को यूं ही गिनी पिग समझते रहेंगे. गिनी पिग तो समझते हैं ना? हाँ हाँ , वही जानवर जिसकी जान इंसानों की दवा तैयार करने के लिए ले ली जाती है.

प्लीज सर, हम बच्चों को अपनी पॉलिटिक्स की लेबोरेटरी का गिनी पिग ना बनाएं. कभी तो हम बच्चों को वोटर न समझ कर बच्चा ही समझिये.

पूरे सस्पेंस पर से जल्दी से पर्दा उठाइए.

आपकी

सुदीक्षा बिष्ट

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