पहली बार अकेले मिग-21 उड़ाने वाली अवनि को कितना जानते हैं आप?

अवनि चतुर्वेदी
    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

आज सुबह से ट्विटर ट्रेंड में छाया हुआ है एक नाम - अवनि चतुर्वेदी.

अवनि चतुर्वेदी फ़ाइटर जेट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गई हैं.

इस वजह है आज हर तरफ़ उनके ही नाम की चर्चा है.

उन्होंने अकेले मिग-21 बाइसन विमान उड़ा का यह कीर्तिमान स्थापित किया है.

अवनि चतुर्वेदी

अवनि ने इसके लिए गुजरात के जामनगर एयरबेस से उड़ान भरी और पहली बार में इसे पूरा किया.

इस तरह से अवनि फ़ाइटर एयरक्राफ्ट उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला पायलट बन गईं और इतिहास रच दिया.

फ़ाइटर पायलट होने का मतलब है कि अब युद्ध जैसी स्थिति में अवनि सुखोई जैसे विमान भी उड़ा सकती हैं.

साल 2016 में अवनि के साथ-साथ भावना कांत और मोहना सिंह को इस काम के लिए चुना गया था.

एक साल तक फ़ाइटर पायलट की ट्रेनिंग तीनों को दी गई.

अवनि चतुर्वेदी

2016 के पहले भारतीय वासुसेना में महिलाओं को फ़ाइटर प्लेन चलाने की अनुमति नहीं थी.

लेकिन अनुमति मिलने के दो साल बाद ही अवनि ने पहली महिला फ़ाइटर प्लेन पायलट बनने का तमगा अपने नाम कर लिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अवनि के बाद के बैच के लिए भी वायुसेना ने तीन और महिला पायलट को फ़ाइटर प्लेन उड़ाने की ट्रेनिंग देने के लिए चुन लिया है.

अवनि चतुर्वेदी के बचपन की तस्वीर

अवनि का बचपन

अवनि का बचपन मध्यप्रदेश में रीवा के पास एक छोटे से कस्बे में बीता. शुरूआती पढ़ाई अवनि ने हिंदी माध्यम में की है.

अवनि के पिता दिनांकर चतुर्वेदी ने बीबीसी से कहा, "बचपन से अवनि बहुत शांत स्वभाव की थी. लेकिन उसे अनुशासन में रहना पंसद था. मुझे कभी ऐसा नहीं लगा कि उसे पायलट ही बनना है."

अवनि ने 10वीं और 12वीं दोनों ही बोर्ड परीक्षा में अपने स्कूल में टॉप किया था. उसके बाद आगे की इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए वो वनस्थली विद्यापीठ चली गईं.

राष्ट्रपति के साथ अवनि चतुर्वेदी

अवनि के पिता खुद भी पेशे से इंजीनियर हैं. उनकी मां हाउस वाइफ़ हैं. उनका एक बड़ा भाई है जो भारतीय सेना में है.

कल्पना चावला हैं आदर्श

तो क्या सेना में जाने के लिए भाई से प्रेरणा मिली अवनि को?

इसके जवाब में दिनांकर चतुर्वेदी ने बताया कि ग्रैजुएशन की पढ़ाई तक अवनि को नहीं मालूम था कि वो आगे चल कर पायलट बनना चाहती हैं.

अवनि चतुर्वेदी

दिनांकर चतुर्वेदी ने बताया, "2003 में कल्पना चावला की मौत के बाद जब अवनि ने उनके बारे में पढ़ा, तब पहली बार उसने मुझसे अंतरिक्ष में उड़ान भरने की इच्छा ज़ाहिर की."

अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला के जीवन से अवनि सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

लेकिन भाई के सेना में होने की वजह से उन्होंने एक सैनिक के जीवन को भी काफ़ी क़रीब से देखा है. देशसेवा का जज़्बा उन्हें भाई से ही मिला.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अवनि ने एयरफ़ोर्स की टेक्निकल सर्विस में जाने वाली परीक्षा दी और उसमें पास होने के बाद फ़ाइटर पायलट बन गईं.

अवनि चतुर्वेदी

पिता को कैसे मिली जानकारी?

फ़िलहाल अवनि एयरफ़ोर्स के जामनगर एयरबेस में हैं. इतिहास रचने के बाद पिता से उनकी बात नहीं हुई है.

फिर अवनि के पिता को बेटी के कारनामे का पता कैसे चला, इस पर दिनांकर चतुर्वेदी ने हंसते हुए कहा, "बीती रात आपकी ही तरह एक मीडियाकर्मी का फ़ोन आया था. तब मुझे मेरी बेटी के कारनामे का पता चला. हालांकि वो एक दिन सफल होगी, इसका मुझे हमेशा से भरोसा था."

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