5 साल बाद भी उलझा हुआ है मुज़फ़्फ़रपुर का नवरुणा केस

नवरुणा
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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, मुज़फ़्फ़रपुर से बीबीसी हिन्दी के लिए
  • प्रकाशित

"गुड़गांव के रेयान स्कूल में एक बच्चे की हत्या हो जाती है तो नीतीश कुमार संज्ञान ले लेते हैं और हम जो पटना से महज़ 70 किलोमीटर दूर मुज़फ़्फ़रपुर में बैठे हैं तो हमारी बच्ची के लिए उनके पास वक्त नहीं है. मुख्यमंत्री चुपचाप मूकदर्शक बने रहे और पुलिस हमारे साथ खेल खेलती रही."

अपने घर में 65 साल के एक बूढ़े बाप की आंख भरी थी और आंसू ढुलकने के इंतज़ार में थे. ये बूढ़ा बाप अतुल्य चक्रवर्ती है, जिसकी 12 साल की बच्ची नवरुणा का अपहरण मुज़फ़्फ़रपुर के घिरनी पोखर स्थित घर से 18 सितंबर 2012 की रात हो गया था.

उस रात को याद करते हुए अतुल्य कहते हैं, "उस दिन उसने मेहंदी लगायी थी. काले रंग की बनियान और हाफ पैंट पहने थी जिस पर सफ़ेद रंग की तिरछी धारियां थी. वो हमारे साथ ही सोती थी लेकिन मेहंदी लगे होने के चलते वो घर के सबसे बाहर वाले कमरे में सोई जहां से उसका अपहरण हुआ."

नवरुणा के पिता अतुल्य और मां मैत्री चक्रवर्ती
इमेज कैप्शन, नवरुणा के पिता अतुल्य और मां मैत्री चक्रवर्ती

वॉर्ड पार्षद की गिरफ़्तारी

नवरुणा आज होती तो 17 साल की होती लेकिन जाने वाले की उम्र भी तो ठहर जाती है. कुछ दिन पहले सीबीआई ने इस मामले में वॉर्ड पार्षद राकेश कुमार सिन्हा की पहली गिरफ्तारी की है.

इस गिरफ्तारी ने चक्रवर्ती दंपत्ति को सुकून दिया है लेकिन ये बहुत थोड़ा-सा है.

जैसा कि नवरुणा की मां मैत्री चक्रवर्ती कहती हैं, "सीबीआई ने बहुत छोटे आदमी को हाथ लगाया है. नवरुणा की हत्या में दो सिंडिकेट काम किए. पहला जिन्होंने अपहरण किया तो दूसरा जिन्होंने हमारे घर के पास नाले में हड्डी फेंकी ताकि हमें ऑनर किलिंग में फंसाया जा सके. सीबीआई ने हड्डी फेंकने वाले को पकड़ा है. अपहरण करवाने वालों में तो पुलिस अधिकारी, नगर निगम, भू-माफिया, नेता सब का रैकेट है."

नवरुणा के घर से महज़ पांच मिनट पैदल चलने पर गिरफ्तार राकेश कुमार सिंह का घर है. उनकी पत्नी पूनम सिन्हा पूर्व पार्षद हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "मेरे पति को बुरी तरह से फंसाया जा रहा है लेकिन मुझे न्यायालय पर भरोसा है कि मुझे न्याय मिलेगा."

नवरुणा का घर
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उलझ गया केस

मुज़फ़्फ़रपुर का चर्चित नवरुणा कांड बहुत उलझ गया है. पहले स्थानीय पुलिस, फिर सीआईडी और फरवरी 2015 में सीबीआई ने मामले की जांच को अपने हाथ में लिया. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच सितंबर 2017 तक पूरी कर लेने का निर्देश दिया है.

लेकिन परिवार की क्या उम्मीद है पूछने पर नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती कहते हैं, "हर एजेंसी इस मामले को लटका रही है और साक्ष्यों को मिटाने की साज़िश की गई. मेरे घर 33 दिन बाद एसएसपी राजेश कुमार आए, 40 दिन बाद एडीजी गुप्तेश्वर पांडेय आए और फॉरेंसिक जांच वाले जब तक आए तब तक तो सारे सुबूत मिट चुके थे. हालत ये थी कि मेरी बच्ची का अपहरण हुआ था और प्रशासन की दिलचस्पी मेरे घर की इस ज्वाइंट प्रापर्टी को नापने में थी."

वह कमरा जहां से कथित तौर पर नवरुणा का अपहरण किया गया
इमेज कैप्शन, वह कमरा जहां से कथित तौर पर नवरुणा का अपहरण किया गया

बंगाली बन रहे निशाना

अतुल्य चक्रवर्ती का आरोप है कि भाषायी अल्पसंख्यक होने के चलते वो मुज़फ़्फ़रपुर में भू-माफिया और पुलिस अधिकारियों के गठजोड़ का आसान निशाना हैं.

गौरतलब है कि नवरुणा के अपहरण के बाद मुज़फ़्फ़रपुर में रहने वाले एके भादुड़ी, एससी मुखर्जी, डीएन चटर्जी सहित कई बंगाली परिवारों के साथ आपराधिक घटनाएं हुईं. इन सभी के पास मुज़फ़्फ़रपुर की प्राइम लोकेशन्स पर किसी संपत्ति का मालिकाना हक था.

बिहार में बंगाली समाज को नजदीक से जानने वाले और बिहार हेराल्ड के संपादक विद्युत पाल कहते हैं, "1991 के बाद देशभर में भू माफिया का उभार हुआ. बिहार में इन माफियाओं का सबसे आसान निशाना थे बंगाली. इसलिए भागलपुर, दरभंगा, मुज़फ़्फ़रपुर में बंगालियों के साथ घटनाएं हुईं. नवरुणा भी एक ऐसा ही मामला है और इस मामले में लगातार साक्ष्यों को खत्म करने का दौर चला."

नवरुणा की गुड़िया के साथ उनके पिता
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परिजनों को अभी भी इंतज़ार

मुज़फ़्फ़रपुर के साहित्यकार नंद किशोर नंदन भी इन बातों से इत्तेफाक रखते हैं. वो बताते हैं, "मुज़फ़्फ़रपुर बिहार का सांस्कृतिक शहर रहा. मारवाड़ी, सिख, बंगाली यहां बड़ी तादाद में रहे. बंगाली लोगों को मुज़फ़्फ़रपुर की सांस्कृतिक तस्वीर में शुरू से ही अहम योगदान रहा लेकिन बीते तीन दशक से बंगालियों का यहां से पलायन भी बड़े पैमाने पर हुआ. वजह उनमें बढ़ती हुई असुरक्षा की भावना है."

26 नवंबर 2012 को नवरुणा के घर से सटे नाले से हड्डियां बरामद हुई थीं. डीएनए जांच से इस बात की पुष्टि हुई कि नवरुणा की मृत्यु हो चुकी है. लेकिन चक्रवर्ती दंपत्ति को अभी भी नवरुणा की मौत पर विश्वास नहीं. उन लोगों ने नवरुणा की साइकिल, उसका गुल्लक, रूमाल, गुड़िया, टोपी, उसकी परीक्षा का चार्ट संभाल कर रखा है. जाने कब नवरुणा वापस आ जाएं और अपनी प्यारी गुड़िया के लिए मचल जाए.

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