नजरिया: सपा-कांग्रेस गठबंधन से बीएसपी को कितना नुकसान?

अखिलेश-मायावती-राहुल
    • Author, बद्री नारायण
    • पदनाम, समाजशास्त्री, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
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आगामी उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो गया है.

इस गठबंधन के मुताबिक कांग्रेस को 105 सीट मिलने वाले हैं और समाजवादी पार्टी 298 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार रही है.

यह गठबंधन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस दोनों की जरुरत है.

समाजवादी पार्टी अपने आंतरिक कलह की गहरे रुप से शिकार हुई है. इससे उसकी छवि का नुकसान तो हुआ ही है उसका जन आधार भी विभाजित हुआ है. पार्टी कई तरह के कंफ़्यूजन से जूझ रही है.

ऐसे में कांग्रेस का समाजवादी पार्टी से जुड़ना समाजवादी पार्टी में शक्ति संचार कर पाएगा या नहीं ये एक अहम सवाल है.

2012 के चुनाव में कांग्रेस को 12 प्रतिशत वोट मिले थे, ये वोट अगर समाजवादी पार्टी को स्थानान्तरित हो जाएंगे तो पारिवारिक अंतर्कलह, मुलायम सिंह यादव एवं शिवपाल यादव की नाराज़गी से अखिलेश के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी को जो हानि हुई है, उसकी रिकवरी संभव हो पाएगी.

मायावती

दूसरा, समाजवादी पार्टी के अंतर्कलह से सबसे ज़्यादा असर पार्टी के मुस्लिम वोट समूह पर पड़ा है. उनमें से एक तबका जो अब तक समाजवादी पार्टी को वोट देता रहा है, उसका रुझान बीएसपी की तरफ बढ़ा है.

बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश चुनाव लड़ रहे किसी भी राजनीति दल से ज़्यादा या यूं कहें सर्वाधिक मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट बांटे हैं.

बीएसपी ने 97 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं एवं समाजवादी पार्टी ने 57 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट बांटे हैं.

मायावती पिछले कई महीनों से अपने दलित-मुस्लिम एजेंडे पर काम कर रही है. ऐसे में समाजवादी पार्टी से मुस्लिम मतों का बहाव बीएसपी की तरफ तेज़ हुआ है.

कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी के साथ आने से दोनों के मुस्लिम मतों के आधार आपस में आसानी से मिलकर एकजुट हो सकते हैं.

पिछले चुनाव में मुस्लिम मतों का 39 प्रतिशत समाजवादी पार्टी को एवं 18 प्रतिशत कांग्रेस को मिले थे. दोनों दलों के मुस्लिम आधार मिलकर चुनाव परिणामों को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकते हैं.

इससे समाजवादी पार्टी को पर्सेप्सनल पॉलिटिक्स में फ़ायदा होगा. पारिवारिक अंतर्कलह के बाद उसका जो नुकसान हुआ है, उसकी रिकवरी हो सकती है.

अखिलेश-राहुल गांधी

दूसरे मुस्लिम मतों को आकर्षित करने में कांग्रेस के साथ आने से यह गठबंधन एक सेकुलर गठबंधन के रुप में उभर कर अधिकांश मुस्लिम मतों के लिए अपनी दावेदारी कर सकता है.

कांग्रेस को भी इस गठबन्धन से फ़ायदा होगा. समाजवादी पार्टी के आधार मत अगर उससे जुड़े जायेंगे तो कांग्रेस बेहतर परिणाम दे सकती है. कांग्रेस अपनी सशक्त उपस्थिति इस चुनाव में साबित कर 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए अपना मज़बूत दावा पेश कर सकती है.

दूसरे, वह अनेक क्षेत्रीय दलों की एक कंफेडरेशन एवं संयुक्त मोर्चा बना आगामी 2019 के चुनाव में बीजेपी से मज़बूत टक्कर ले सकती है. बिहार में लालू यादव, उत्तर प्रदेश में अखिलेश, बंगाल में ममता बनार्जी गैर बीजेपी मोर्चा में कांग्रेस के साथ आ सकते हैं.

कांग्रेस अब अकेले के दम पर पूरे देश में बीजेपी को नहीं हरा सकती, उसे राष्ट्रीय स्तर पर एक संयुक्त मोर्चा विकसित करना ही होगा.

इस प्रकार कांग्रेस 2017 के विधान सभा चुनाव लड़ते हुए भी 2019 के चुनाव को लक्ष्य में रखे हुए हैं. इस गठबंधन में जाने से कांग्रेस को एक हानि भी हो सकती है.

मु्स्लिम

जहां जहां उसके चुनाव आकांक्षी उम्मीदवारों को टिकट नहीं मिला, वे या तो भीतर ही भीतर बीजेपी को जिताने में मदद कर सकते हैं, या घर में बैठर निष्क्रिय हो सकते हैं.

लेकिन कांग्रेस एवं सपा दोनों को इस गठबंधन से लाभ ही ज़्यादा होगा. किन्तु बीएसपी के पक्ष में मुस्लिम मतों का रुझान थोड़ा रुक जाएगा.

बीएसपी को इस गठबंधन से हानि हो सकती है, लेकिन आगामी दिनों में इस गठबंधन को अपना आकार लेना है.

इसे आम लोगों तक पहुंच कर अपने अपने मतदाताओं को एकजुट होकर वोट डालने के लिए बाहर निकलने वाली रसायन तैयार करनी है. समय कम है देखिये क्या होता है.

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