जैकी का बेटा भारत का जैकी चैन!

टाइगर श्रॉफ़
    • Author, मयंक शेखर
    • पदनाम, फ़िल्म समीक्षक
  • प्रकाशित

फ़िल्मः बाग़ी

निर्देशकः साबिर ख़ान

अभिनेताः टाइगर श्राफ़, श्रद्धा कपूर

रेटिंगः **

फिल्म 'बाग़ी' मार्शल आर्ट, कलरीपायट्टु पर आधारित है. मार्शल आर्ट फ़िल्में भारत में काफ़ी लोकप्रिय रही हैं, जिसका श्रेय हॉलीवुड एक्टर ब्रूस ली की फ़िल्मों को जाता है.

बाग़ी

फ़िल्म का हीरो टाइगर श्राफ़ मार्शट आर्ट, कलरीपायट्टु सीखने केरल जाता है, जहां उसकी मुलाक़ात फ़िल्म की हीरोइन श्रद्धा कपूर से होती है.

श्रद्धा कपूर के पिता कुछ हद तक खलनायक शक्ति कपूर जैसे हैं.

सुनील ग्रोवर भारत के सबसे कम आंके गए कलाकार हैं और फ़िल्म में पिता की भूमिका में हैं.

बाग़ी

फ़िल्म में सुनील ग्रोवर पैसों के लिए अपनी बेटी तक को बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं.

लड़की को फ़िल्म के हीरो से प्यार है. दोनों का बारिश के साथ अजीब रिश्ता है.

हर बार जब बारिश होती है, तो लड़की के दिमाग़ में कुछ अजीब सा होता है और वह नाचने लगती है, फिर चाहे सड़क हो या स्टेशन. ठीक उसी वक़्त हीरो वहां पहुँच जाता है.

बाग़ी

उन्हें पता है कि यह भगवान की तरफ़ से कोई संकेत है. फ़िल्म की लोकेशन बेहतरीन है. इसे केरल में शूट किया गया है और उतने ही खूबसूरत शॉट्स हैं.

पारंपरिक नौका दौड़, वलम कली पृष्ठभूमि को और राजसी बना रहा है. केरल में उत्तर भारतीय अभिनेता-अभिनेत्री का होना कुछ अटपटा है.

दरअसल श्रद्धा फ़िल्म में शायद अपनी दादी से मिलने केरल आती हैं. वहीं हीरो को उनके दिवंगत पिता ने मार्शल आर्ट, कलरीपायट्टु सीखने भेजा था.

उसके पिता का दोस्त एक ट्रेनिंग स्कूल चलाते हैं और बेहद सख़्त स्वभाव के हैं.

टाइगर और श्रद्धा

फ़िल्म में गुरु बताते हैं कि ये कला कुंगफ़ू की अग्रदूत है, जो बौद्ध धर्म के साथ भारत से चीन के शाओलिन मंदिर पहुँची. यह ऐतिहासिक तौर पर प्रामाणिक तथ्य है.

टाइगर और जैकी

अभिनेता जैकी श्राफ़ के बेटे टाइगर हीरो की भूमिका में हैं और वह पूरी तरह वैसे ही दिख रहे हैं. ये पहली बार है जब मैंने उन्हें बड़े पर्दे पर अभिनय करते देखा.

पूर्व में दर्शकों ने उसे स्टार के लायक माना, लेकिन कुछ का मानना था कि वो महिलाओं जैसे दिखते हैं.

मगर ये फ़िल्म इस धारणा को तोड़ने का काम करती है. फ़िल्म में टाइगर की थोड़ी दाढ़ी उनके गढ़ी हुए जॉलाइन पर जँच रही है.

टाइगर श्राफ़

सिक्स पैक एब उनकी अपार प्रतिभा के साथ न्याय करता है और उनके शरीर की ग़ज़ब लचक किसी फ़्लाइंग मशीन की तरह है.

वे हवा में कुछ चौंकाने वाली किक के साथ लोगों की पिटाई करते हैं और एक चीनी आदमी के टुकड़े-टुकड़े भी कर देते हैं जो बताने के लिए काफ़ी है कि चीनी माल टिकते नहीं.

बागी

फ़िल्म की स्क्रिप्ट 80 के दशक की बॉलीवुड फिल्मों की तरह है, जो रामायण से प्रेरित है.

कहानी बेहद कमज़ोर है. ऐसा नहीं है कि हम किसी मार्शल आर्ट फ़िल्म को उसकी कहानी के लिए देखने जाते हैं.

फिर भी इस फ़िल्म को देखकर ख़ुद के बाल नोंचने का मन करता है.

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