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चंबल के डाकुओं ने जब जयप्रकाश नारायण के सामने डाले थे हथियार
14 अप्रैल 1972 को जयप्रकाश नारायण के सामने चंबल के सैकड़ों डाकुओं ने आत्मसमर्पण किया था. लेकिन ये अचानक नहीं हुआ.
इसके पीछे सर्वोदय नेता विनोबा भावे की सलाह, चंबल के डाकू माधो सिंह का प्रयास और जयप्रकाश नारायण की मुहिम शामिल थी.
माधो सिंह ने 1971 में जयप्रकाश नारायण से मुलाक़ात की थी. माधो सिंह ने उनसे कहा था, "मैं चंबल के बाग़ियों का संदेश ले कर आया हूँ कि वो आत्मसमर्पण करना चाहते हैं. मुझे विनोबा भावे ने आपके पास भेजा है."
जेपी ने चंबल घाटी में डाकुओं के आत्मसमर्पण का काम अपने हाथों में लिया और फ़िर शुरू किया गया 'आपरेशन पर्सुएशन'.
विवेचना में रेहान फ़ज़ल से सुनिए कैसे शुरू हुआ था चंबल के डाकुओं के हथियार डालने का सिलसिला.
वीडियो: मुकेश कुमार
(बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित)