ईरान युद्ध के कारण पैदा हुए तेल संकट से कैसे निपट रहे हैं ये देश

पेट्रोल

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इमेज कैप्शन, जंग की वजह से दुनिया भर में ईंधन संकट छा गया है और कई देशों ने बढ़ती क़ीमतों से राहत देने के लिए नीतिगत उपाय किए हैं
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पूरे म्यांमार में पेट्रोल पंपों पर कड़ी धूप में मोटरसाइकिलों और कारों की लंबी क़तारें देखी जा सकती हैं.

ईंधन संकट के कारण भारी गर्मी के बीच लाइन में लगे कई लोगों के बेहोश होने की ख़बरें हैं. यहां तक कि गर्मी की वजह से तीन मौतों की भी ख़बरें हैं.

लेकिन ये हालात सिर्फ़ म्यांमार के ही नहीं हैं. ईरान के साथ अमेरिका-इसराइल की जंग ने लगभग एक महीने से वैश्विक तेल सप्लाई को लगभग बाधित कर रखा है, जिससे पूरी दुनिया में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं.

टैक्स और कोटा में छूट देने से लेकर ईंधन की खपत कम करने तक, दुनिया की कई सरकारों ने पेट्रोल की ऊंची दरों से लोगों को राहत दिलाने में मदद करने के लिए कई नीतियां लागू की हैं.

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भारत में जंग का सबसे बड़ा असर एलपीजी की सप्लाई पर पड़ा है जहां सरकार ने घरेलू गैस की बुकिंग के नियम बदलने समेत कई उपायों की घोषणा की है.

भारत में एलपीजी गैस की क़ीमतों में इज़ाफ़ा होता दिख रहा है. इसकी सप्लाई को लेकर अनिश्चितता का दौर जारी है और कई शहरों में एलपीजी वितरण एजेंसियों पर लंबी क़तारें देखी जा सकती हैं.

भारत ने उठाए कई क़दम

एलपीजी लाइन

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इमेज कैप्शन, मुंबई के परेल भोइवाड़ा में बीते शनिवार को एक गैस एजेंसी के सामने इंतज़ार करते उपभोक्ता

भारत सरकार ने एलपीजी संकट से निपटने के लिए बुकिंग की मियाद को 25 दिन कर दिया है और ओटीपी को ज़रूरी बना दिया है.

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सप्लाई की 'कोई किल्लत नहीं' है और 'घबराने की ज़रूरत नहीं' है.

भारत में रेस्तरां उद्योग की ओर से कमर्शियल कुकिंग सिलेंडर की आपूर्ति में बाधा आने की शिकायतों के बीच हरदीप पुरी ने निर्बाध आपूर्ति का वादा किया है.

भारतीय कंपनियों ने लगभग एक साल बाद पहली बार एलपीजी की क़ीमतों में बढ़ोतरी की है.

भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ताज़ा बयान में 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सरकारी राशन की दुकानों के ज़रिए 60 दिनों के लिए सुपीरियर केरोसिन तेल की आपूर्ति की मंज़ूरी देने की बात कही है.

भारत सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 को मुख्य रूप से खाद्यान्न, दवाओं, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने, उनकी क़ीमतों को नियंत्रित करने के लिए जमाखोरी और कालाबाज़ारी रोकने के लिए लागू कर दिया है.

फलों-सब्ज़ियों के एक्सपोर्ट को प्राथमिकता

कालेब मोगेस, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

कीनिया

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इमेज कैप्शन, जंग के कारण कीनिया में फूल उद्योग को ख़ासा नुक़सान उठाना पड़ रहा है

व्यापार में बाधा के कारण कीनिया में सरकार ने जल्द ख़राब होने वाले सामान के निर्यात को प्राथमिकता देने का फ़ैसला किया है.

एक स्थानीय अख़बार 'द नेशन' के मुताबिक़, फूलों, एवोकाडो और सब्ज़ियों जैसे ताज़े उत्पादों को जल्द क्लीयरेंस देने और तेज़ी से भेजने के लिए कीनिया पोर्ट्स अथॉरिटी ने अपने पोर्ट ऑपरेशंस में बदलाव किया है.

कीनिया के फूल उद्योग को लाखों डॉलर का नुक़सान हो रहा है.

कीनिया में फूल उत्पादकों और निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक निजी क्षेत्र के संगठन 'कीनिया फ़्लॉवर काउंसिल' के अनुसार, मौजूदा संघर्ष की वजह से इस क्षेत्र को 4.2 मिलियन डॉलर से अधिक का नुक़सान उठाना पड़ा है.

कीनिया में चाय उगाने वाले कुछ किसानों और निर्यातकों ने बीबीसी को बताया कि भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है क्योंकि चाय उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत लगातार बढ़ रही है.

पड़ोसी देश इथियोपिया के प्रधानमंत्री एबी अहमद ने ईंधन डिस्ट्रिब्यूटर्सस सर्विस स्टेशनों और उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ईंधन की बचत करें और ज़रूरी सेवाओं को प्राथमिकता दें.

नाइजीरिया में इलेक्ट्रिक व्हीकल और सीएनजी किट पर ज़ोर

क्रिस इवोकोर, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

नाइजीरिया

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इमेज कैप्शन, नाइजीरिया के अबुजा के एक पेट्रोल स्टेशन पर लगी लाईन
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कहानी ज़िंदगी की

मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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जब से जंग शुरू हुई है, नाइजीरिया में पेट्रोल के दाम दोगुने हो चुके हैं.

हालांकि नाइजीरिया एक बड़ा तेल उत्पादक देश है, लेकिन कोई भी मौजूदा सरकारी रिफ़ाइनरी इस समय काम नहीं कर रही है.

पिछले साल डैंगोट नाम की प्राइवेट रिफ़ाइनरी के शुरू होने से पहले, सालों तक सरकार रिफ़ाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर पूरी तरह निर्भर थी.

नई रिफ़ाइनरी की वजह से पेट्रोल की क़ीमतों को कम करने में आसानी हुई, लेकिन ईरान पर अमेरिका-इसराइल के हमले का इस पर भारी असर पड़ा है.

यातायात लागत कम करने में मदद के लिए, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद चिनुबु ने सीएनजी व्हीकल कनवर्ज़न किट और इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) लॉन्च करने जैसे उपायों की घोषणा की है.

इस नीति के तहत सीएनजी के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाना है, जिसमें मदर एंड डॉटर्स स्टेशन, इंटीग्रेटेड रीफ़्यूलिंग यूनिट्स, सीएनजी वाहन और कन्वर्ज़न प्रोग्राम शामिल हैं.

राष्ट्रपति ने ये भी कहा है कि इन क़दमों से ईवी की लॉन्चिंग और विकास को बढ़ावा मिलेगा. इसमें पूरे देश में चार्जिंग ढांचा और उससे जुड़े निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा.

टिनुबु ने, नाइजीरिया में व्हीकल कन्वर्ज़न किट्स को तेज़ी से चलन में लाने पर ज़ोर दिया है, ताकि यातायात को सस्ता और आसान पहुंच वाला बनाया जा सके.

उन्होंने कहा, "इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए क्रेडिककॉर्प नाइजीरिया और अन्य पार्टनर्स का सहयोग लिया जाएगा ताकि नए डेवलपमेंट, सस्ते और टिकाऊ वित्तीय मॉडल को विकसित किया जा सके. साथ ही व्हीकल कन्वर्ज़न को आम जनता में व्यापक रूप से उपलब्ध कराया जा सके."

सीएनजी कवरेज के विस्तार के लिए टिनुबु ने मोबाइल रीफ़्यूलिंग यूनिट्स (एमआरयू) की लॉन्चिंग में तेज़ी लाने के निर्देश दिए हैं.

वियतनाम ने टैक्स कम किए

ट्रान वो, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

वियतनाम

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इमेज कैप्शन, हाल ही में वियतनाम सरकार ने कई देशों से ईंधन की मदद मांगी है

26 मार्च को वियतनाम सरकार ने 'राष्ट्रीय हित' का हवाला देते हुए 27 मार्च से 15 अप्रैल तक ईंधन पर लगने वाले पर्यावरण कर को हटाने का फैसला लिया है. यह जानकारी आधिकारिक बयान में दी गई.

इस क़दम को ईरान जंग के कारण तेल बाज़ार में आई उथल-पुथल से निपटने और राहत देने के लिए एक उपाय माना जा रहा है.

वैश्विक तेल क़ीमतों में गिरावट और टैक्स में कटौती के असर से वियतनाम में ईंधन की क़ीमतें घटी हैं, लेकिन इससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुक़सान हुआ है.

वियतनाम ने मार्च की शुरुआत से ही ऊर्जा बचत के उपाय शुरू कर दिए थे, क्योंकि देश आयातित ईंधन पर काफ़ी निर्भर है, जबकि उसके पास 'एनगी सोन और बिन्ह सोन' नाम की दो रिफ़ाइनरियां मौजूद हैं.

सरकार ने ईंधन बचाने के लिए नागरिकों और सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है.

हाल ही में वियतनाम ने क़तर, कुवैत, अल्जीरिया और जापान जैसे देशों से ईंधन मदद मांगी है. इसके अलावा 23 मार्च को प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन्ह की रूस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच तेल और गैस उत्पादन को लेकर समझौता भी हुआ.

म्यांमार में ईंधन राशनिंग

मी मी खैंग, बीबीसी बर्मीज़

म्यांमार

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इमेज कैप्शन, म्यांमार में ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी गई है

म्यांमार की सैन्य सरकार ने कहा है कि वह 27 मार्च से इंजन क्षमता के आधार पर ईंधन राशनिंग लागू करेगी.

सरकार का कहना है कि फ़िलहाल ईंधन की आपूर्ति पर्याप्त है, लेकिन भविष्य में संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए यह क़दम उठाया जा रहा है.

सैन्य परिषद के अधीन ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि देश में ईंधन की खपत पर नज़र रखी जा रही है, ताकि कमी की स्थिति से बचा जा सके.

सैन्य प्रशासन ने 25 मार्च 2026 से सरकारी दफ़्तरों में हर बुधवार वर्क फ़्रॉम होम लागू कर दिया है. निजी कंपनियों को भी जहां संभव हो, घर से काम करने को अपनाने के लिए कहा गया है.

राशनिंग प्रणाली के तहत ईंधन हफ़्ते में एक बार या अधिकतम दो बार में ख़रीदा जा सकेगा. इसकी निगरानी बारकोड और क्यूआर कोड सिस्टम से की जाएगी.

केवल वही वाहन ईंधन खरीद सकेंगे, जिनके विंडशील्ड पर आधिकारिक होलोग्राम स्टिकर लगा होगा. पेट्रोल पंप कर्मचारी कोड स्कैन करने के बाद ही ईंधन देंगे.

मोटरसाइकिल को हफ़्ते में अधिकतम आठ लीटर ईंधन दो किस्तों में मिलेगा. तीन पहिया वाहनों को 25 लीटर तक ईंधन तीन किस्तों में दिया जाएगा. निजी और सरकारी वाहनों को इंजन क्षमता (2000सीसी से लेकर 3000सीसी से अधिक) के आधार पर हफ़्ते में 35 से 45 लीटर तक ईंधन मिलेगा, जिसे अधिकतम दो किस्तों में ख़रीदा जा सकेगा.

आपातकालीन और सार्वजनिक सेवा वाले वाहनों पर कोई तय सीमा लागू नहीं होगी.

थाईलैंड में डीज़ल की कमी

पानिसा एमोचा, बीबीसी थाई सेवा

थाईलैंड

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इमेज कैप्शन, थाईलैंड के पेट्रोल पंपों से लगभग डीज़ल ख़त्म हो चुका है

जहां म्यांमार संभावित संकट की तैयारी कर रहा है, वहीं थाईलैंड के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी हक़ीक़त बन चुकी है.

पिछले दो हफ़्तों से देशभर के पेट्रोल पंपों पर, ख़ासकर बैंकॉक के बाहर, डीज़ल ख़त्म हो गया है.

सबसे पहले डीज़ल की कमी सामने आई. इस संकट का असर डीज़ल पर निर्भर आम वाहन चालकों से लेकर कृषि और मछली पालन जैसे क्षेत्रों पर पड़ा है.

प्रशासन ने बड़े स्टोरेज केंद्रों और निजी टैंकों की जांच शुरू कर दी है. नए नियमों के तहत कंपनियों को रिज़र्व स्टॉक इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है और आपूर्ति आसान बनाने के लिए 24 घंटे परिवहन की मंज़ूरी दी गई है.

मार्च की शुरुआत से लागू अन्य उपायों में वर्क फ़्रॉम होम, सरकारी इमारतों में ऊर्जा खपत कम करना, एयर कंडीशनर का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस से कम न रखना और सरकारी कर्मचारियों को औपचारिक सूट की जगह हल्के कपड़े पहनने की अनुमति देना शामिल है.

सरकार ने सरकारी विभागों की सभी विदेश यात्राओं पर तुरंत रोक लगाने का भी आदेश दिया है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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