वर्ल्ड कप फ़ुटबॉल 2026: चार बार की चैंपियन जर्मनी बाहर, पराग्वे ने हराकर आख़िरी 16 में बनाई जगह

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- Author, माइकल एमंस
- पदनाम, बीबीसी स्पोर्ट जर्नलिस्ट
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चार बार की विश्व चैंपियन जर्मनी फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026 से बाहर हो गई है. अतिरिक्त समय के बाद पराग्वे और जर्मनी की टीमें 1-1 से बराबरी पर थीं. इसके बाद हुए रोमांचक पेनल्टी शूटआउट में पराग्वे ने जर्मनी को हरा दिया.
आर्सेनल के फ़ॉरवर्ड काई हैवर्ट्ज़ और न्यूकासल के निक वोल्टेमाडे अपनी पेनल्टी को गोल में नहीं बदल सके. पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने दोनों के शॉट रोक दिए.
हालांकि, पराग्वे ने भी मैच जीतने के दो मौके गंवाए.
एंटोनियो सनाब्रिया का शॉट बाहर चला गया, जबकि फ़ैबियन बाल्बुएना के प्रयास को 40 वर्षीय मैनुएल नोयर ने रोक दिया.
इसके बाद सडन डेथ में जर्मनी के जोनाथन टा का शॉट बार के ऊपर चला गया. वहीं पराग्वे के डिफ़ेंडर होसे कनाले ने निर्णायक पेनल्टी गोल किया. पराग्वे ने शूटआउट 4-3 से जीत लिया और अगले दौर में पहुंच गया.
इससे पहले 42वें मिनट में जूलियो एनसिसो ने पराग्वे को चौंकाने वाली बढ़त दिलाई थी. एनसिसो इससे पहले प्रीमियर लीग में ब्राइटन और इप्सविच के लिए खेल चुके हैं.
पराग्वे का शानदार डिफ़ेंस

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दूसरे हाफ़ में जर्मनी का खेल पहले से बेहतर रहा. काई हैवर्ट्ज़ ने लिवरपूल के मिडफ़ील्डर फ़्लोरियन विर्ट्ज़ के क्रॉस पर शानदार हेडर लगाकर स्कोर 1-1 कर दिया.
पराग्वे ने इसके बाद शानदार डिफ़ेंस किया और मैच को अतिरिक्त समय तक पहुंचा दिया. जर्मनी को लगा था कि उसने मैच जीत लिया है, जब जोनाथन टा ने गेंद को जाल में पहुंचाया. लेकिन गोल को रद्द कर दिया गया. रेफ़री ने माना कि वाल्डेमार एंटोन ने गोलकीपर गिल के ख़िलाफ़ फ़ाउल किया था.
शूटआउट में जर्मनी ने पहली पेनल्टी ली, लेकिन वह कभी बढ़त नहीं बना सका. हैवर्ट्ज़ जर्मनी की पहली पेनल्टी चूक गए. इसके बाद वोल्टेमाडे का शॉट भी बचा लिया गया.
पैराग्वे ने मैच ख़त्म करने के दो मौके गंवाए, लेकिन तीसरे मौके पर उसने कोई गलती नहीं की. शानदार खेल दिखाने वाले कनाले ने शांत रहते हुए गोल किया और इसके बाद मैदान में जश्न का माहौल बन गया.
अब पराग्वे का सामना अंतिम 16 के मुकाबले में दो बार की विश्व चैंपियन फ़्रांस या 1958 विश्व कप की उपविजेता स्वीडन से होगा. यह मैच शनिवार को फ़िलाडेल्फ़िया में खेला जाएगा.
जर्मनी पहली बार विश्व कप का पेनल्टी शूटआउट हारा

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जर्मनी ने 1954, 1974, 1990 और 2014 में विश्व कप जीता था. लेकिन 2014 के बाद से टीम लगातार तीन विश्व कप में निराशाजनक प्रदर्शन कर रही है.
2018 विश्व कप में जर्मनी को मेक्सिको और दक्षिण कोरिया से हार मिली थी. टीम अपने ग्रुप में सबसे नीचे रही थी.
इसके बाद 2022 विश्व कप में भी जर्मनी ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सका. जापान से हार के बाद टीम अपने ग्रुप में तीसरे स्थान पर रही थी.
इस बार की हार भी जर्मनी के लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है. टूर्नामेंट की शुरुआत में फ़ीफ़ा विश्व रैंकिंग में पराग्वे 41वें स्थान पर था. वह जर्मनी से 31 स्थान नीचे था.
पराग्वे अपने पहले मैच में अमेरिका से 4-1 से हार गया था. लेकिन उसके बाद मुख्य कोच गुस्तावो अल्फ़ारो ने टीम को मज़बूत बना दिया. टीम के डिफ़ेंस ने बेहतर काम किया और उसने ग्रुप डी में तीसरा स्थान हासिल किया.
होसे कनाले और गुस्तावो गोमेज़ की सेंट्रल डिफ़ेंस लाइन ने शानदार प्रदर्शन किया. पराग्वे ने गहराई में जाकर और ज़्यादा खिलाड़ियों को पीछे रखकर डिफ़ेंस किया. इससे जर्मनी के खिलाड़ी लगातार परेशान रहे.
यह मैच देखने में भले बहुत रोमांचक नहीं था, लेकिन पराग्वे की रणनीति कारगर साबित हुई. मैच पेनल्टी शूटआउट तक पहुंचा और 6 फ़ीट 6 इंच लंबे गोलकीपर ऑरलैंडो गिल टीम के हीरो बन गए.
जर्मनी ने अपने इतिहास में पहली बार विश्व कप का पेनल्टी शूटआउट गंवाया है. इससे पहले उसने विश्व कप में पांचों शूटआउट जीते थे.
किसी बड़े टूर्नामेंट में जर्मनी इससे पहले सिर्फ़ एक बार पेनल्टी शूटआउट हारा था. 1976 यूरोपियन चैंपियनशिप के फ़ाइनल में उसे चेकोस्लोवाकिया ने हराया था.
उस मैच में एंटोनिन पानेन्का ने बीच से हल्का चिप शॉट लगाकर विजयी गोल किया था. बाद में उसी अंदाज़ की पेनल्टी दुनियाभर में "पानेन्का" के नाम से मशहूर हुई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित






















