बांग्लादेश में बीएनपी की जीत पाकिस्तान के लिए कितनी अहम है?

पाकिस्तान और बांग्लादेश
इमेज कैप्शन, बीएनपी की पिछली सरकारों के पाकिस्तान के साथ काफ़ी अच्छे रिश्ते रहे हैं
    • Author, असद सोहैब
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, इस्लामाबाद
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने बांग्लादेश चुनाव में भारी जीत के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के प्रमुख तारिक़ रहमान को बधाई दी है.

तारिक़ रहमान का बांग्लादेश का प्रधानमंत्री बनना तय माना जा रहा है.

शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि पाकिस्तान बांग्लादेश के नए नेतृत्व के साथ काम करने के लिए उत्सुक है.

बांग्लादेश में शेख़ हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार को पाकिस्तान विरोधी और भारत समर्थक माना जाता था.

लेकिन अगस्त 2024 में एक जन आंदोलन के बाद शेख़ हसीना की सत्ता का पतन हो गया. उनके भारत चले जाने के बाद हालात नाटकीय ढंग से बदले दिखे.

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इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाया.

दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा मिला है. दोनों देशों के बीच विमान ऑपरेशन भी शुरू हो गया है.

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भी अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर पाकिस्तान के पीएम से मुलाक़ात करते रहे हैं.

अब बांग्लादेश में बीएनपी की जीत के बाद पाकिस्तान से उसके संबंधों में और बेहतरी की उम्मीदें जताई जा रही हैं.

पाकिस्तान से बेहतर रिश्ते किस हद तक?

बांग्लादेश और पाकिस्तान
इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलहाकार मोहम्मद यूनुस पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मिलते रहे थे
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सवाल ये है कि बांग्लादेश के चुनाव नतीजों का पाकिस्तान के लिए क्या महत्व है?

नई बीएनपी सरकार पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को किस हद तक आगे बढ़ाएगी?

क्या क्षेत्र में कोई नया गठबंधन बनेगा और इस पूरी स्थिति में भारत की क्या भूमिका होगी?

कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बीएनपी की सफलता पाकिस्तान के लिए एक सकारात्मक घटनाक्रम है.

लेकिन कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि बांग्लादेश की नई सरकार के लिए भारत से संबंध तोड़कर आगे बढ़ना आसान नहीं होगा.

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक डॉ. हसन असकारी रिज़वी का कहना है कि शेख़ हसीना की सरकार के दौरान पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संबंध न के बराबर थे, लेकिन अब बांग्लादेश में एक ऐसी सरकार सत्ता में आ रही है जो पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहती है.

वो कहते हैं, "पहले जब बीएनपी सत्ता में आई थी, तब ख़ालिदा ज़िया की सरकार के पाकिस्तान के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध थे और अब वह संबंध फिर से बहाल होने जा रहा है. दोनों देशों के बीच संबंध और बेहतर होंगे. बांग्लादेश और पाकिस्तान मिलकर दक्षिण एशिया में स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देंगे.''

रक्षा विश्लेषक इकराम सहगल का कहना है, ''बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी दोनों को भारत विरोधी दल माना जाता है. इसलिए बांग्लादेश में कोई भी भारत विरोधी दल स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के क़रीब होगा.''

पाकिस्तान बांग्लादेश संबंध

बीबीसी से बात करते हुए इकराम सहगल ने कहा कि बांग्लादेश में फिलहाल भारत विरोधी भावना मौजूद है, लेकिन पाकिस्तान को इस बात की भी चिंता होनी चाहिए कि नई सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को बहुत अधिक विकसित न करे.

वो कहते हैं, "फ़िलहाल बांग्लादेश में भारत विरोधी माहौल है. लेकिन पाकिस्तान को उस समय के बारे में चिंता करनी चाहिए जब बांग्लादेश में भारत विरोध नहीं रहेगा.''

गौरतलब है कि 2021 में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार का सत्ता में आना पाकिस्तान के लिए एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा था.

पाकिस्तान के कुछ राजनीतिक नेताओं ने भी तालिबान सरकार का स्वागत किया था. लेकिन समय बीतने के साथ, दोनों देशों के बीच संबंध ठंडे पड़ गए हैं और अफ़ग़ान तालिबान ने भारत के साथ घनिष्ठ संबंध स्थापित कर लिए हैं.

डॉ. हसन असकारी रिज़वी का कहना है कि बांग्लादेश में कोई भी सरकार भारत के साथ अपने संबंधों को खराब नहीं करेगी.

उन्होंने कहा, ''बांग्लादेश की भारत के साथ लंबी सीमा है और बंगाल की खाड़ी में भारत का भी प्रभाव है. इसलिए बांग्लादेश की नई सरकार एक यथार्थवादी विदेश नीति अपनाएगी और भारत के साथ अपने संबंधों को सामान्य बनाएगी.''

वो कहते हैं, "बांग्लादेश की कोई भी सरकार भारत को नाराज़ करने या उससे झगड़ा करने का जोखिम नहीं उठा सकती, क्योंकि कुछ भौगोलिक वास्तविकताएं ऐसी हैं जिन्हें बांग्लादेश नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता."

लेकिन डॉ. असकारी के मुताबिक़ ये संबंध शेख़ हसीना सरकार और भारत के बीच के संबंधों जितने सौहार्दपूर्ण नहीं होंगे.

'पाकिस्तान और बांग्लादेश में हो सकता है रक्षा समझौता'

पाकिस्तान और बांग्लादेश
इमेज कैप्शन, कुछ पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक़ रहमान की सरकार में बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौता हो सकता है

इकराम सहगल का कहना है कि अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश अपने संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो उन्हें वीज़ा और टैरिफ़-मुक्त नीति अपनानी होगी.

उन्होंने कहा कि यह भी संभव है कि दोनों देश एक रक्षा समझौते में प्रवेश कर सकते हैं जिसमें एक पर हमला दूसरे पर हमला माना जाएगा.

इकराम सहगल के अनुसार, यह सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के जैसा हो सकता है.

पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल 'एक रक्षा और रणनीतिक समझौते' पर हस्ताक्षर किए हैं.

इकराम सहगल को बांग्लादेश में चुनाव परिणामों के बाद क्षेत्र में एक नया गठबंधन दिखाई देता है. इसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश और चीन क्षेत्रीय मुद्दों पर एक साथ दिखाई देंगे.

'यह पाकिस्तान के लिए अच्छी ख़बर है'

तारिक़ रहमान
इमेज कैप्शन, बांग्लादेश में तारिक़ रहमान की पार्टी बीएनपी की जीत पाकिस्तान के लिए अच्छी ख़बर मानी जा रही है

दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन केंद्र के प्रोफ़ेसर संजय भारद्वाज का कहना है कि बांग्लादेश की बीएनपी सरकारों के दौरान बांग्लादेश के पाकिस्तान के साथ संबंध अच्छे रहे हैं.

बीबीसी हिन्दी संवाददाता दीपक मंडल से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब 1991 से 1996 और फिर 2001 से 2006 के बीच बांग्लादेश में बीएनपी सत्ता में थी, तब उसके पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध थे."

उन्होंने कहा कि "पाकिस्तान में इस्लामी विचारधारा का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है, वहीं बीएनपी की इस संबंध में उदारवादी नीति है. इसलिए, अगर बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी की गठबंधन सरकार बनती है, तो इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन फिलहाल इसकी कोई संभावना नहीं दिखती, फिर भी यह पाकिस्तान के लिए अच्छी ख़बर है."

पाकिस्तान बांग्लादेश संबंध

ख़ालिदा ज़िया का पाकिस्तान के प्रति सहानुभूतिपूर्ण रवैया भारत में पसंद नहीं किया जाता था, इसलिए अगर अब ऐसा होता है तो भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस पर संजय भारद्वाज ने कहा कि 2001 से 2006 तक तारिक़ रहमान बीएनपी के सभी काम देखते थे. इस दौरान भी तारिक़ रहमान की नीति पाकिस्तान के प्रति नरम थी, जबकि भारत के साथ कामकाजी संबंध थे. इस दौरान बांग्लादेश और भारत के बीच अच्छा समन्वय नहीं था.

संजय भारद्वाज का कहना है कि भारत एक समावेशी समाज और लोकतंत्र की वकालत करता है, लेकिन बीएनपी की नीतियों में सेना की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और इस्लाम इसकी विचारधारा का केंद्र है.

उनके मुताबिक़, भारत हमेशा से बांग्लादेश में लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और राष्ट्रवादी सरकार की कामना करता रहा है, हालांकि अब बांग्लादेश में ऐसा होना असंभव लगता है.

भारत के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं?

पाकिस्तान और बांग्लादेश
इमेज कैप्शन, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया को श्रद्धांजलि देने ढाका पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर तारिक़ रहमान से मुलाक़ात करते हुए. (फ़ाइल फ़ोटो)

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक़ रहमान को उनकी चुनावी जीत पर बधाई देने के लिए फोन किया.

तारिक़ रहमान ने यह भी कहा कि उन्हें नरेंद्र मोदी से बात करके बहुत खुशी हुई.

नरेंद्र मोदी और तारिक़ रहमान के बीच 'सौहार्दपूर्ण शब्दों' के आदान-प्रदान के बाद, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बीएनपी के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने के लिए भारत की हालिया पहल ने अच्छे परिणाम दिए हैं.

इस साल जब ख़ालिद ज़िया का निधन हुआ तो भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ढाका आए थे.

उस समय अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों का मानना ​​था कि भारतीय विदेश मंत्री का शोक संदेश और भारत सरकार की ओर से बीएनपी अध्यक्ष को श्रद्धांजलि देना, भविष्य के संबंधों को आगे बढ़ाने के संबंध में भारत के रुख़ का स्पष्ट संकेत था.

शेख़ हसीना के बेटे साजिब वाजिद ने इंडियन एक्सप्रेस अख़बार को बताया था कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार की पाकिस्तान से बढ़ती नज़दीकी भारत के लिए चिंता का विषय होनी चाहिए.

उन्होंने कहा था, "अवामी लीग सरकार ने भारत की पूर्वी सीमा को आतंकवाद से सुरक्षित रखा क्योंकि इससे पहले बांग्लादेश का इस्तेमाल भारत में उग्रवाद के अड्डे के रूप में किया जाता था."

कई पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि यह उम्मीद करना अतिश्योक्ति होगी कि भारत का बांग्लादेश की किसी एक राजनीतिक पार्टी के साथ स्थायी संबंध होगा.

पूर्व भारतीय राजनयिक सोमन रॉय ने बीबीसी को बताया कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थायी मित्र जैसी कोई चीज़ नहीं होती, ठीक उसी तरह जैसे स्थायी शत्रु जैसी कोई चीज़ नहीं होती.

उनके अनुसार, बांग्लादेश में अवामी लीग के रूप में भारत की मित्रवत सरकार थी, लेकिन अब एक नई सरकार आ रही है, लेकिन राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और भारत इसी नीति पर चलेगा.

सोमेन रॉय का कहना है कि भारत की विदेश नीति की दिशा 'रणनीतिक हितों' से निर्धारित होती है और भविष्य में बांग्लादेश के मामले में भी यही बात लागू होगी.

उनके अनुसार, सीधी बात है कि भारत यह देखेगा कि अगर अवामी लीग के अलावा किसी अन्य पार्टी से मित्रता करके उसके राष्ट्रीय हितों की रक्षा की जाती है तो वह उस राह पर चलने से इनकार नहीं करेगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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