इसराइल-ग़ज़ा युद्ध: मौतों का बढ़ता आंकड़ा और जीत की तलाश करता इसराइल

ग़ज़ा
    • Author, जेरेमी बोवेन
    • पदनाम, बीबीसी के इंटरनेशनल एडिटर, यरूशलम से
  • प्रकाशित

मैं इस स्टोरी को यरूशलम की जगह ग़ज़ा पट्टी में लिखना पसंद करूंगा. मैंने 1989 में अल साल्वाडोर युद्ध से जंग की रिपोर्टिंग शुरू की थी. कई सालों तक युद्धों को कवर करने के बाद, मुझे इस बात का विश्वास हो गया है कि घटनास्थल पर जाकर रिपोर्टिंग करने से बेहतर कुछ नहीं है.

दुर्भाग्य से ग़ज़ा-इसराइल युद्ध में अंतरराष्ट्रीय पत्रकार ऐसा नहीं कर सकते हैं. ग़ज़ा की सीमाओं पर नियंत्रण रखने वाले इसराइल और मिस्र नहीं चाहते हैं कि हम वहां जाएं और स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करें. इसराइल अपनी सेना के साथ कुछ करीबी निगरानी वाली यात्राओं की इजाज़त देता है. मैं बीते साल नवंबर में ऐसी एक यात्रा पर गया था.

हम ग़ज़ा के अंदर नहीं जा सकते, इसलिए हम फ़लस्तीनी पत्रकारों पर निर्भर हैं, जो बाहर नहीं निकल सकते हैं. सच्ची रिपोर्टिंग के प्रति उनके साहस और समर्पण की मैं बहुत सराहना करता हूं.

संयोग से आधुनिक दुनिया में युद्ध रोकना असंभव है. ऐसा इसलिए है क्योंकि आम लोग फोन से फिल्म बना सकते हैं. कुछ क्लिक कर वो अपनी तस्वीरों को ऑनलाइन पोस्ट कर सकते हैं. अगर कम्युनिकेशन नहीं काटा गया है तो हम उनसे बात भी कर सकते हैं. इसराइल और हमास अपने वीडियो अपलोड करते हैं. हर चीज़ सत्यापित और जांची-परखी जानी चाहिए, खासकर तब जब आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस का उपयोग बहुत आसान हो गया है.

इन सभी बाधाओं को ध्यान में रखते हुए, यरूशलम से फरवरी में एक दिन युद्ध इस तरह नज़र आता है.

ग़ज़ा का मानवीय संकट

रफ़ाह में रह रहे बच्चे
इमेज कैप्शन, रफ़ाह में रह रहे बच्चे

7 अक्टूबर को इसराइल पर हमास के हमले के ठीक बाद, इसराइल के रक्षा मंत्री योआव गैलांट ने कहा था, "हम ग़ज़ा की पूर्ण घेराबंदी कर रहे हैं... न बिजली की सप्लाई होगी न भोजन की, न पानी की और न ही गैस की. सबकी सप्लाई बंद रहेगी."

उन्होंने कहा, "हम इंसानी जानवरों से लड़ रहे हैं और हम उसी के मुताबिक काम कर रहे हैं."

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के दबाव में इसराइल अब ग़ज़ा में भोजन, पानी और दवा की सीमित आपूर्ति की इजाज़त देता है. लेकिन वह ग़ज़ा में राहत सामाग्री की सप्लाई और ग़ज़ा पट्टी में राहत काफिलों की आवाजाही पर नियंत्रण रखता है.

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इसराइल का दावा है कि जो भी सामान अंदर जाता है, वह पर्याप्त है. अंतरराष्ट्रीय सहायता समूहों का कहना है कि ग़ज़ा में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं और घायल हो रहे हैं और उन्हें भूखा भी रखा जा रहा है और उन्हें इलाज से भी वंचित किया जा रहा है. जिनेवा कन्वेंशन कहता है कि नागरिकों को उन अपराधों के लिए दंडित करना जो उन्होंने किए ही नहीं, सामूहिक दंड के समान है. यह एक युद्ध अपराध है.

अमेरिकियों ने 7 अक्टूबर से ही इसराइल से ग़ज़ा में युद्ध के कायदे-कानून का सम्मान करने की अपील की है, खासकर इतने अधिक फ़लस्तीनी नागरिकों की हत्या रोकने के लिए.

तथ्य यह है कि राष्ट्रपति जो बाइडन से लेकर नीचे तक के अमेरिकी अधिकारी अपनी आलोचनाओं को दोहराते और मज़बूत करते रहते हैं. यह दिखाता है कि उनका मानना ​​​​है कि इसराइल ने उन्हें नज़रअंदाज़ कर रहा है.

बीते हफ्ते अपनी यात्रा के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसराइल की अब तक की सबसे तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि इसराइल पर हमास के हमलों की क्रूरता का इस्तेमाल फ़लस्तीनियों पर क्रूरता को उचित ठहराने के लिए नहीं किया जा सकता है.

उन्होंने तेल अवीव में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "7 अक्टूबर को इसराइलियों के साथ सबसे भयानक रूप से क्रूरतापूर्ण व्यवहार किया गया. लेकिन यह दूसरों को अमानवीय बनाने का लाइसेंस नहीं दे सकता है."

ब्लिंकन ने कहा, "ग़ज़ा में अधिकांश लोगों का 7 अक्टूबर के हमलों से कोई लेना-देना नहीं था. ग़ज़ा के वे परिवार जिनका अस्तित्व इसराइल से मिलने वाली सहायता के वितरण पर निर्भर है, हमारे परिवार की तरह ही हैं. वे माता-पिता हैं, बेटे और बेटियां हैं, जो अच्छा जीवन जीना चाहते हैं, अपने बच्चों को स्कूल भेजना चाहते हैं, एक सामान्य जीवन जीना चाहते हैं. वे यही हैं. वे यही चाहते हैं."

इसके बाद भी अमेरिका ने इसराइल को दिए जाने वाले अपने विशाल सैन्य और राजनयिक समर्थन में कोई शर्त नहीं लगाने का फैसला किया है.

कैसी है ग़ज़ा में कानून व्यवस्था

फिलिप लाजारिनी (कोट-पैंट में) के साथ जेरेमी बोवेन
इमेज कैप्शन, फिलिप लाजारिनी (कोट-पैंट में) के साथ जेरेमी बोवेन

फिलिप लाजारिनी ग़ज़ा में मानवीय अभियान का नेतृत्व करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए के कमिश्नर जनरल हैं. इस सप्ताह मैंने उनसे बातचीत की. इस दौरान उन्होंने ग़ज़ा में युवाओं पर युद्ध के दीर्घकालिक परिणामों को लेकर अपनी चिंताओं के बारे में बताया.

उन्होंने कहा, "मैं बहुत चिंतित हूं. वे सभी इस अभूतपूर्व युद्ध की वजह से गहरे सदमे में हैं. वे बहुत ही दयनीय स्थिति में रह रहे हैं. अब, अगर युद्ध कल खत्म हो जाता है, तो हमारी पहली प्राथमिकता इन बच्चों को शिक्षा प्रणाली में वापस लाने के तरीके ढूंढना होनी चाहिए और अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम भविष्य में और अधिक आक्रोश और नफरत का बीज बोएंगे."

लाजारिनी की टिप्पणियों से इसराइल प्रभावित नहीं होगा. उसने यूएनआरडब्ल्यूए पर हमास की मदद करने का आरोप लगाया है. लाजारिनी एजेंसी को बचाने के लिए तब से संघर्ष कर रहे हैं जब से इसराइल ने अमेरिकियों को एक डोजियर सौंपा. इसमें कहा गया है कि 7 अक्टूबर के हमलों में यूएनआरडब्ल्यूए के करीब एक दर्जन कर्मचारी शामिल थे.

इन आरोपों के बाद यूएनआरडब्ल्यूए ने उन लोगों को बर्खास्त कर दिया था, जिन पर आरोप लगाए गए थे. यूएनआरडब्ल्यूए उन 16 प्रमुख दानदाता देशों को आश्वस्त करने की कोशिश कर रहा है जिन्होंने इन आरोपों के बाद दान रोक दिया है.

लाजारिनी का कहना है कि वे आरोपों को बहुत गंभीरता से लेते हैं, वे हमास से सहानुभूति रखने वालों को जड़ से उखाड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन इसराइल ने अभी भी उन्हें वह डोजियर नहीं दिया है, जो उसने अमेरिका को भेजा था.

संयुक्त राष्ट्र और अन्य सहायता एजेंसियों के लिए उत्तरी ग़ज़ा अभी भी दुर्गम बना हुआ है. वहां से सामने आई जानकारी के मुताबिक खंडहरों में रहने वाले स्थानीय लोगों ने भुखमरी और बच्चों में कुपोषण की सूचना दी है. इस तरह जीवित बचे लोगों में जीवन भर के लिए स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.

हमें अधिक जानकारी दक्षिणी ग़ज़ा से मिलती हैं, जहां 20 लाख लोग ज़िंदा रहने की कोशिश कर रहे हैं. करीब 14 लाख लोग रफाह में हैं, जो मिस्र की सीमा से लगा हुआ है. अधिकांश लोग सीवेज के पानी के तालाबों के पास प्लास्टिक शीट से बने तंबूओं में रह रहे हैं.

पत्रकार तो नहीं लेकिन राहत प्रयासों में शामिल राहतकर्मी ग़ज़ा में आ-जा सकते हैं. युद्ध क्षेत्र का कई दशक का अनुभव रखने वाले संयुक्त राष्ट्र के कई अधिकारियों से मैंने बात की. सभी ने कहा कि यह उनका अब तक देखा हुआ सबसे बुरा मामला है. एक ने मुझसे कहा, "मैंने इस आकार, पैमाने और गहराई की कोई चीज़ पहले कभी नहीं देखी है."

वहीं एक दूसरे का कहना था कि ग़ज़ा अब तक की सबसे खतरनाक और कठिन जगह है, केवल इसराइली बमबारी की वजह से नहीं, बल्कि इसलिए कि कानून और व्यवस्था खत्म हो गई है.

ग़ज़ा में युद्ध की भयावहता

रफ़ाह में रह रहे फलस्तीनियों के तंबू
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रफ़ाह में फ़लस्तीनी इसराइली सैनिकों के ज़मीनी हमले से दहशत में हैं. बीबीसी अरबी के एक सहयोगी ने रफ़ाह में अधेड़ जबर अल-बुर्दिनी से बात की. वो पड़ोसी के घर के खंडहरों से मृत बच्चों को बाहर निकाल रहे थे.

उन्होंने कहा, "अगर यहां इसराइली कार्रवाई होती है तो हज़ारों लोग मारे जाएंगे. बच्चे और बड़े डरे हुए हैं. बच्चे सो नहीं पा रहे हैं."

लाजारिनी ने मुझे बताया कि रफ़ाह पर एक बड़ा इसराइली हमला ग़ज़ा पट्टी में एक और विनाशकारी परत जोड़ देगा.

उन्होंने कहा कि आबादी का करीब पांच फीसदी या करीब 100,000 लोग पिछले चार महीनों में या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं या गायब हो गए हैं, हो सकता है कि वे मलबे में दबकर मर गए हों.

रफाह में हवाई हमलों में पहले ही कई लोग मारे गए हैं. संयम बरतने के अमेरिका की अपील के बाद भी इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का कहना है कि उन्होंने सेना को शहर पर हमला करने का आदेश दिया है, क्योंकि सेना की रफ़ाह से फ़लस्तीनी नागरिकों को बाहर निकालने की योजना है.

चूंकि ग़ज़ा में कोई भी जगह सुरक्षित नहीं है, इसलिए निवासियों को यह आश्वस्त करने वाला नहीं लगता है. लगता है कि नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं.

एक अन्य संभावित दर्शक हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय हो सकता है, जिसने फैसला सुनाया है कि इसराइल को 'स्वीकार्य' आरोपों का सामना करना पड़ रहा है कि वह ग़ज़ा में फ़लस्तीनी लोगों के खिलाफ जनसंहार कर रहा है.

इसराइल ने जीत के लिए एक उच्च मानक स्थापित किया है. इसे कई महीनों में भी हासिल नहीं किया जा सकता है. वह हमास का सफाया कर इसराइल की सुरक्षा बहाल करना चाहता है और हमास की ओर से 7 अक्टूबर को बंधक बनाए गए लोगों को रिहा कराना चाहता है. ग़ज़ा में कैद इसराइलियों के कई परिवार और उनके समर्थक प्रधानमंत्री के इस तर्क से सहमत नहीं हैं कि केवल ताकत ही बंधकों को मुक्त कराएगी. वे युद्धविराम समझौता चाहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, उतनी ही कम संभावना होगी कि वे अपने प्रियजनों को फिर कभी देख पाएं.

इसराइल ने हमास को काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन वह उसकी लड़ने की क्षमता नहीं तोड़ पाया है. पश्चिम के एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी ने मुझे बताया कि इसराइल ने हमास के करीब एक-तिहाई लड़ाकों को मार डाला है. उसके सुरंग नेटवर्क के करीब एक-तिहाई हिस्से को नष्ट कर दिया है.

नेतन्याहू ने यह भी कहा है कि इसराइल हमास नेताओं को मारना चाहता है. इसकी शुरुआत याह्या सिनवार से होगी. माना जाता है कि याह्या ने ही 7 अक्टूबर के हमलों का निर्देशन किया था. माना जाता है कि सिनवार और उनके निकटतम सहयोगी अभी भी जिंदा हैं. वे लोग शायद उन सुरंगों में रह रहे हैं, जिनमें इसराइली बंधकों को रखा गया है.

मध्य पूर्व में फैलता युद्ध

शनिवार को हुए एक ड्रोन हमले के बाद क्षतिग्रस्त कार का मुआयना करते सैनिक
इमेज कैप्शन, शनिवार को हुए एक ड्रोन हमले के बाद क्षतिग्रस्त कार का मुआयना करते सैनिक

बीते चार महीनों में ग़ज़ा युद्ध की लहरें पूरे मध्य पूर्व में फैल गई हैं. ईरान के सहयोगियों का नेटवर्क, जिसे वह प्रतिरोध की धुरी कहता है, वह इस युद्ध में लगा हुआ है.

जॉर्डन में ईरान की ओर से प्रशिक्षित और वित्तपोषित मिलिशिया ने तीन अमेरिकी सैनिकों की हत्या कर दी थी. इसके बाद अमेरिका ने सीरिया और इराक़ में हवाई हमले किए. ब्रिटेन के साथ मिलकर उसने यमन में हूतियों पर भी बमबारी की. हूती लाल सागर में जहाजों को निशाना बना रहे हैं.

हूती और ईरान के अन्य प्रॉक्सियों का कहना है कि वे ग़ज़ा में फ़लस्तीनियों के साथ एकजुटता दिखाने का काम कर रहे हैं. लेबनान में ईरान का सबसे ताकतवर सहयोगी हिज़बुल्लाह है. इसराइल के साथ उसका सीमा युद्ध दिन प्रति दिन और अधिक गंभीर और तेज़ होता जा रहा है. इसराइल में दक्षिणी लेबनान में सेना भेजने का दबाव बढ़ रहा है.

अमेरिकी मध्य पूर्व में शांतिपूर्ण भविष्य का रास्ता बनाने की कोशिशों में लगे हैं. विदेश मंत्री ब्लिंकन ने एक नज़रिया यह पेश किया है कि अगर इसराइल फलस्तीनियों को अपना स्वतंत्र देश बनाने की इजाज़त देता है, तो सऊदी अरब इसराइल के साथ संबंधों को सामान्य बनाएगा.

वहीं प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कहना है कि फ़लस्तीन स्वतंत्र नहीं होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा है कि इसराइल तब तक दबाव बनाए रखेगा जब तक कि वह 'पूरी जीत' दर्ज नहीं कर लेता है.

यह युद्ध जारी है. युद्धविराम की अभी कोई संभावना नहीं है. जितने लंबे समय तक यह चलता रहेगा, ग़ज़ा में जो कुछ हो रहा है उसके नतीजों को नियंत्रित कर पाना उतना ही कठिन होगा.

वीडियो कैप्शन, दक्षिणी ग़ज़ा में इसराइली सेना की कार्रवाई के बीच रफाह में बड़े धमाकों की आवाज़ सुनी गई.

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