डांस करने के ये फ़ायदे जानकर आप आज ही थिरकने लगेंगे!

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अपने दिमाग को बड़ा, तेज़ और मज़बूत बनाने के कई तरीके हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि उनमें सबसे अच्छे तरीकों में से एक क्या है? अगर नहीं जानते हैं तो जवाब है डांस.
डांसिंग दिमाग को मजबूत बनाने के सबसे अच्छे तरीकों में से एक है. इसमें न सिर्फ़ आपके पूरे शरीर का इस्तेमाल होता है, बल्कि यह आपके दिमाग के ज़्यादातर हिस्से को भी एक्टिव करता है.
यह कुछ-कुछ जॉगिंग करने और साथ में सुडोकू खेलने जैसा है. यहां चार ऐसे तरीके बताए गए हैं जिनसे डांसिंग आपके दिमाग को बदलता है और उसे ज़्यादा मज़बूत बनाता है.
बेशक डांस करना एक मुश्किल काम है. और उससे भी मुश्किल है, हफ़्ते-दर-हफ़्ते डांस करने के लिए मोटिवेटेड रहना.
लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक डांस आपके दिमाग के लिए दूसरी किसी भी एक्सरसाइज़ से बेहतर हो सकता है.
डॉक्टर चेन एक पूर्व प्रोफ़ेशनल डांसर हैं और वह इसके पीछे की वजह बताते हैं.
उनके मुताबिक, "अगर हम सिर्फ़ अपनी मसल्स की एक्सरसाइज़ कर रहे हैं, जैसे कि अगर हम सिर्फ़ ट्रेडमिल पर दौड़ रहे हैं या वज़न उठा रहे हैं, तो समय के साथ यह सिर्फ़ एक मैकेनिकल मसल मेमोरी बन जाती है. इसमें आप अपने दिमाग को उतना चैलेंज नहीं कर रहे होते हैं.
"वहीं डांस करते समय आप लगातार दिमाग के अलग-अलग हिस्सों का इस्तेमाल करते हैं. जैसे शरीर को शेप में लाने के लिए वर्कआउट करते हैं, वैसे ही आप अपने दिमाग को भी शेप दे सकते हैं. इसमें आपकी पूरी ज़िंदगी को बदलने, नए कनेक्शन बनाने और खुद को फिर से व्यवस्थित करने की अद्भुत क्षमता होती है. इसे न्यूरोप्लास्टिसिटी कहते हैं. और डांस दिमाग की अच्छी कसरत है."
डांस करने से क्या फायदा होता है

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रिसर्च से पता चला है कि डांस करने से ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर दोनों बढ़ते हैं. आपके न्यूरॉन्स बड़े और ज़्यादा असरदार हो जाते हैं. आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.
दिमाग न्यूरॉन्स नाम की कोशिकाओं से बना होता है. दिमाग का टिश्यू इन्हीं से बनता है. हर न्यूरॉन का एक सिरा होता है, जो उसका कंट्रोल सेंटर होता है. ये सब मिलकर दिमाग की बाहरी परत में ग्रे मैटर बनाते हैं. यहीं पर जानकारी मिलती है और प्रोसेस होती है. न्यूरॉन की पूंछ या एक्सॉन व्हाइट मैटर होता है.
यह मुख्य कनेक्टिंग टिश्यू है और दिमाग के अलग-अलग हिस्सों और शरीर के बाकी हिस्सों में संदेश भेजता है. तो डांसिंग असल में उस सारे ब्रेन टिश्यू को बढ़ा सकती है. वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि रेगुलर एक्सरसाइज़ एक बहुत फ़ायदेमंद चीज़ ज़्यादा बनाकर दिमाग को मज़बूत बनाती है.
जब आप डांस करते हैं या आम तौर पर एक्सरसाइज़ करते हैं, तो आप 'ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फ़ैक्टर' नाम का हार्मोन बनाते हैं. यह असल में आपके ब्रेन सेल्स के लिए फर्टिलाइजर का काम करता है. और यह आपके ब्रेन सेल्स को बढ़ने में मदद करता है. और यह न्यूरोप्लास्टिसिटी में भी मदद करता है.
इंसानी दिमाग लगभग 86 अरब ऐसे सेल्स से बना होता है. हर न्यूरॉन एक सेकंड में 1 से 200 बार तक सिग्नल भेज सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप क्या कर रहे हैं.
ये न्यूरल मैसेज इलेक्ट्रिकल पल्स की तरह होते हैं जो पलक झपकने से भी तेज़ी से इधर-उधर भेजे जाते हैं. और यह देखा गया है कि डांस करने से इन मैसेज के आने-जाने का तरीका बेहतर होता है.
डॉक्टर जूलिया बेसल यह तब देखती हैं जब वे डांसर्स के रियल-टाइम में डांस करते समय खास कैप्स का इस्तेमाल करके उनके दिमाग की एक्टिविटी को मापती हैं.
उनके मुताबिक जब आप आस-पास किसी को डांस करते हुए देखते हैं तो दिमाग के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक जानकारी का बहाव तेज़ हो सकता है और इससे जानकारी सीखने और याद रखने, बेहतर सोचने-समझने की क्षमता और इमोशनल हेल्थ को बेहतर बनाने में मदद मिलती है.
"आपका दिमाग आपके शरीर को कंट्रोल करता है, इसलिए अगर आपके न्यूरॉन्स बेहतर तरीके से कम्युनिकेट करते हैं, तो इसका असर आपके हर काम पर पड़ सकता है. इससे कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है. बातचीत और बोलने के ज़रिए दूसरों को जवाब देने का हमारा तरीका बेहतर होता है. यहां तक कि मैथ के सवालों के जवाब देने या समस्या सुलझाने की हमारी क्षमता भी बेहतर होती है."
डांस करने में क्यों आता है मजा

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आप चाहे क्लास में हों, क्लब में, टिकटॉक पर या जब कोई न देख रहा हो, डांस करने में मज़ा आता है.
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिमाग ऐसे हार्मोन का एक मज़ेदार कॉकटेल रिलीज़ करता है जो आपके मूड को बेहतर बनाते हैं.
ये वही हार्मोन हैं जिनके बारे में आपने शायद सुना होगा, जैसे एंडोर्फिन - शरीर का नैचुरल पेनकिलर, डोपामाइन और सेरोटोनिन, दोनों ही नैचुरल मूड बेहतर बनाने वाले हार्मोन हैं.
और अगर आप दूसरे लोगों के साथ डांस कर रहे हैं, तो आपको ऑक्सीटोसिन भी मिलता है, जिसे बॉन्डिंग हार्मोन कहा जाता है. आप डांस जैसी एक्टिविटी जितनी ज़्यादा करते हैं, आपका दिमाग उसे दोबारा करने के लिए उतना ही उत्सुक रहता है, बल्कि उसकी चाहत भी रखने लगता है.
हम जितना ज़्यादा डांस में हिस्सा लेते हैं और इन न्यूरोकेमिकल्स के संपर्क में आते हैं, उतना ही ज़्यादा आप उन अनुभवों को पाना और उन एहसासों को महसूस करना चाहेंगे.
और यही एक वजह है कि लोग बार-बार डांस फ्लोर पर लौटकर आते हैं. भले ही आपको अभी अपने बड़े, तेज़ दिमाग का असर न दिखे, लेकिन जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, यह बहुत ज़रूरी हो सकता है.
उम्र बढ़ने के साथ, हमारे न्यूरॉन्स नैचुरली मरने लगते हैं. इससे पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी बीमारियां हो सकती हैं.
सेविंग्स अकाउंट

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पार्किंसंस और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का कोई इलाज नहीं है, इनसे बस बचाव ही किया जा सकता है. इसका सबसे अच्छा तरीका क्या है? एक बड़ा न्यूरल रिज़र्व बनाना.
आप इसे एक सेविंग्स अकाउंट की तरह समझ सकते हैं. और कुछ नया सीखना, बहुत मुश्किल काम करना या डांस करना, ये सब आपके सेविंग्स बैंक में पैसे जमा करने जैसा है.
अगर आपके पास सिर्फ़ 100 डॉलर हों और कोई बड़ी मुसीबत आ जाए, तो आप कर्ज़ में डूब जाएंगे. लेकिन अगर आपके पास, मान लीजिए, दस लाख डॉलर हों. कॉग्निटिव रिज़र्व का भी यही मतलब है, अगर आपका कॉग्निटिव रिज़र्व अच्छा है, तो आपके पास बहुत सारा 'पैसा' (यानी न्यूरल रिज़र्व) है.
बहुत सारे न्यूरॉन्स होने का मतलब है कि आपके पास मैसेज भेजने के लिए कई रास्ते हैं, सिर्फ़ एक या दो नहीं. इसलिए, जो न्यूरॉन्स मर चुके हैं, आप दूसरे रास्तों का इस्तेमाल करके उन्हें बायपास कर सकते हैं.
हो सकता है कि ये रास्ते दूसरे लोगों के पास न हों, लेकिन आपके पास हों क्योंकि आपने सालों तक इन्हें बनाया है. साइंटिफिक एविडेंस हैं कि डांस करने से ऐसा ही होता है.
रिसर्चर्स ने अलग-अलग खाली समय की गतिविधियों और डिमेंशिया के जोखिम के बीच संबंध की जांच की. इस स्टडी में 11 तरह की फिजिकल एक्टिविटीज़, जैसे स्विमिंग, वॉकिंग या घर के कामों के असर को देखा गया. डांस ही एकमात्र ऐसी एक्टिविटी थी जिससे डिमेंशिया का जोखिम कम होता पाया गया.
उम्र बढ़ने के साथ दिमाग कमजोर होने लगता है और डांस इसे रोकने में मदद कर सकता है. यह सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ाने, दिमाग की सेहत को बेहतर बनाने, न्यूरॉन्स को बढ़ाने और उन न्यूरोट्रांसमीटर को बढ़ाने में मदद कर सकता है जो उम्र बढ़ने के साथ कम हो सकते हैं. इसके अलावा किसी भी उम्र में डांस शुरू करना फायदेमंद होगा क्योंकि न्यूरोप्लास्टिसिटी पूरी ज़िंदगी चलती रहती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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