इन नुस्ख़ों से आती है रात में बढ़िया नींद

भोजन और नींद
इमेज कैप्शन, हमारी नींद भोजन के समय और तरीके से प्रभावित होती है.
    • Author, जेसिका ब्रैडली
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

हममें से ज़्यादातर लोगों को पता है कि पेट भरकर खाने से हमारी नींद पर असर पड़ता है. अगर हम यह तय कर लें कि हमें क्या और किस समय खाना है, तो हमें अच्छी नींद आ सकती है.

हममें से ज़्यादातर लोगों ने कभी न कभी देर रात ज़्यादा खाने के बाद अगली सुबह भारीपन महसूस किया है.

भारी और ज़्यादा तेल-मसाले वाले भोजन को पचाने में हमारे शरीर को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है, जिससे नींद में बाधा होती है.

कुछ भोजन और पेय पदार्थों से बचकर हम अपनी नींद को बेहतर कर सकते हैं. तो क्या सोने से पहले कुछ ख़ास प्रकार के भोजन की मदद से नींद की गुणवत्ता सुधारी जा सकती है?

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कई शोधों में रात के कुछ विशेष खाद्य पदार्थों को नींद सुधारने में सहायक पाया गया है.

कुछ अध्ययनों में यह सामने आया है कि टार्ट चेरी जूस नींद में मदद कर सकता है.

वहीं, कुछ शोध बताते हैं कि सोने से पहले कीवी फल खाना भी फायदेमंद हो सकता है.

अच्छी नींद के लिए क्या करें?

चेरी का जूस
इमेज कैप्शन, एक शोध के मुताबिक चेरी का जूस अच्छी नींद में मददगार साबित होता है.
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कुछ शोध बताते हैं कि गर्म दूध पीने से नींद आने में मदद मिलती है. माना जाता है कि दूध में ट्रिप्टोफैन की मात्रा अधिक होती है, जिससे शरीर मेलाटोनिन नामक हार्मोन बनाता है. यह नींद लाने में सहायक होता है.

मेलाटोनिन हमारे सोने और जागने के चक्र को नियंत्रित करता है. दिन ढलने के साथ शरीर में इसका स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ता है. इसके अलावा, कुछ ख़ास खाद्य पदार्थों के ज़रिए भी मेलाटोनिन प्राप्त किया जा सकता है. इनमें अंडे, मछली, मेवे और बीज शामिल हैं.

कई अध्ययनों में पाया गया है कि मेलाटोनिन से भरपूर खाद्य पदार्थ नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकते हैं और लंबे समय तक सोने में मदद कर सकते हैं. हालांकि, शोध यह भी बताते हैं कि केवल कोई एक खाद्य या पेय पदार्थ नींद सुधारने के लिए पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके लिए संपूर्ण आहार की भूमिका अहम होती है.

मैरी-पियरे सेंट-ऑन्ज न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन न्यूट्रिशन में पोषण चिकित्सा की प्रोफेसर हैं.

वे कहती हैं, "अगर आप पूरे दिन खराब भोजन करें और सोचें कि सोने से पहले एक गिलास टार्ट चेरी जूस पी लेना काफ़ी होगा, तो ऐसा नहीं है."

उनका कहना है कि शरीर को नींद दिलाने वाले न्यूरोकेमिकल्स बनाने के लिए भोजन से पोषक तत्वों को निकालने में समय लगता है और यह प्रक्रिया कुछ ही घंटों में पूरी नहीं होती. इसके बजाय, हम पूरे दिन क्या खाते हैं, वही नींद की गुणवत्ता पर असर डालता है.

खाने का वक़्त और तरीका

नींद भोजन
इमेज कैप्शन, अच्छी नींद के लिए संतुलित आहार ज़रूरी है. (सांकेतिक तस्वीर)

शोध से पता चलता है कि नींद के लिए सबसे फ़ायदेमंद आहार में साबुत अनाज जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं, जो हमें पौधों से मिलते हैं. इसके साथ ही डेयरी उत्पाद और मछली जैसे लीन प्रोटीन भी फ़ायदेमंद माने जाते हैं.

मिशिगन यूनिवर्सिटी की सहायक प्रोफेसर एरिका जानसन कहती हैं कि साल 2021 के उनके अध्ययन में पाया गया कि जो लोग तीन महीने तक रोज़ ज़्यादा फल और सब्ज़ियां खाने लगे, उनकी नींद में काफ़ी सुधार हुआ.

कई अध्ययनों में यह दिखता है कि जिन लोगों का आहार बेहतर होता है, उनकी नींद भी अच्छी होती है. हालांकि यह भी संभव है कि वे बेहतर नींद की वजह से ही बेहतर भोजन कर रहे हों.

जानसन ने पाया कि जो महिलाएं दिन में तीन या उससे अधिक बार फल और सब्ज़ियां खाने लगीं, उनमें नींद न आने के लक्षणों में सुधार की संभावना दोगुनी से भी अधिक थी.

इसकी एक वजह यह है कि फल और सब्ज़ियां (साथ ही मांस, डेयरी, मेवे, बीज, साबुत अनाज और दालें) ट्रिप्टोफैन नामक ज़रूरी अमीनो एसिड से भरपूर होती हैं.

साल 2024 में स्पेन में किए गए एक अध्ययन में 11 हज़ार से अधिक छात्रों से उनकी नींद की आदतों और आहार के बारे में पूछा गया.

अध्ययन में पाया गया कि जो छात्र रोज़ाना सबसे कम ट्रिप्टोफैन का सेवन करते थे, उनकी नींद की गुणवत्ता सबसे ख़राब थी.

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि ट्रिप्टोफैन की कम मात्रा लेने वालों में नींद की अवधि कम होने और नींद न आने की संभावना ज़्यादा थी. उनका सुझाव है कि ट्रिप्टोफैन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन नींद की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है.

नींद भोजन

पौधों से मिलने वाले भोजन से नींद में सुधार के कई और तरीके हो सकते हैं. ऐसे आहार शरीर में इंफ्लेमेशन को कम करने में मददगार माने जाते हैं. कुछ शोध बताते हैं कि कम इंफ्लेमेशन का स्तर बेहतर नींद की गुणवत्ता से जुड़ा होता है.

अपने शोध में, सेंट-ऑन्ज ने पाया कि बेहतर नींद उन आहारों से जुड़ी होती है जिनमें फाइबर की मात्रा अधिक होती है.

मैग्नीशियम एक और पोषक तत्व है जो पौधों से मिलने वाले आहार में पाया जाता है और अच्छी नींद में मददगार हो सकता है. यह तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करने में मदद करता है, जिससे नर्वस सिस्टम शांत होता है.

30 साल से अधिक उम्र के वयस्कों को आमतौर पर हर रोज़ लगभग 420 मिलीग्राम मैग्नीशियम सेवन की सलाह दी जाती है. यह हरी पत्तेदार सब्ज़ियों, दालों, मेवों, बीजों और साबुत अनाज में पाया जाता है.

बहुत से लोगों में इस पोषक तत्व की कमी पाई जाती है. विशेषज्ञों का कहना है कि इसका एक कारण आधुनिक पश्चिमी भोजन शैली है, जिसमें पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थ कम और अल्ट्रा-प्रॉसेस्ड फ़ूड अधिक होते है. दूसरा कारण यह है कि खेती की आधुनिक प्रक्रियाएं मिट्टी में मैग्नीशियम की मात्रा को कम कर देती हैं.

नींद भोजन
इमेज कैप्शन, पालक में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है

साल 2024 के एक अध्ययन में, फ्लोरिडा स्थित जैक्सनविल यूनिवर्सिटी की एक्सरसाइज़ साइंस की प्रोफेसर हीदर हॉज़नब्लास ने उन लोगों पर मैग्नीशियम सेवन के प्रभावों का परीक्षण किया, जिन्होंने बताया कि उन्हें अच्छी नींद नहीं आती है.

इसमें शामिल लोगों ने दो सप्ताह तक सोने से एक घंटे पहले मैग्नीशियम सप्लीमेंट लिया. अगले दो सप्ताह उन्होंने प्लेसीबो (बिना असर वाली दवा) ली. उनकी नींद को शरीर पर पहने जाने वाले ट्रैकर से मापा गया.

हॉज़नब्लास ने पाया कि जब लोगों ने मैग्नीशियम लिया, तो उनकी गहरी नींद और आरईएम (रेपिड आई मूवमेंट) नींद में प्लेसीबो की तुलना में अधिक सुधार हुआ.

हॉज़नब्लास को संदेह है कि यह असर दो सप्ताह से अधिक समय तक रह सकता है, लेकिन वे इसे लेकर निश्चित नहीं हैं. वे यह भी कहती हैं कि एक अच्छी गुणवत्ता वाला मैग्नीशियम सप्लीमेंट लोगों की नींद को बेहतर बना सकता है, लेकिन यह नींद न आने वाली हर वजह का इलाज नहीं है.

वे कहती हैं, "अगर आप बाहर नहीं जाते, व्यायाम नहीं करते, बहुत अधिक प्रोसेस्ड खाना खाते हैं और आपकी सोने-जागने का समय नियमित नहीं है तो सिर्फ सोने से पहले यह ले लेना आपकी सभी नींद संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं कर सकता."

साल 2017 के एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि रोज़ाना मैग्नीशियम सप्लीमेंट लेने से डिप्रेशन और चिंता में उल्लेखनीय सुधार हुआ.

सिर्फ़ भोजन ही नहीं...

नींद भोजन
इमेज कैप्शन, कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि मैग्नीशियम सप्लीमेंट से हमारी नींद बेहतर हो सकती है.

शोधकर्ता इस बात से सहमत हैं कि रात का कोई विशेष भोजन हमें खराब नींद से नहीं बचा सकता, लेकिन दिन भर बेहतर और सही समय पर भोजन से इसमें सफलता मिल सकती है.

जानसन कहती हैं, "नींद से पहले सबसे ज़रूरी बातों में से एक है कि सोने से कुछ घंटे पहले भोजन न करें. विशेष रूप से, सोने से पहले अधिक कैलोरी वाला भोजन न करें."

कुछ शोध सुझाव देते हैं कि दिन में जल्दी भोजन करना, विशेषकर नाश्ते से शुरुआत करना, बेहतर नींद के साथ जुड़ा होता है. अगर आप रात का खाना सोने से ठीक पहले खाते हैं, तो आपको नींद आने में अधिक समय लग सकता है.

जानसन कहती हैं, "जब दिन और रात के बीच स्पष्ट अंतर होता है, तो दिमाग़ को यह समझने में आसानी होती है कि अब सोने का समय है. दिमाग़ हर सुबह नई शुरुआत करता है, और सुबह जल्दी रोशनी के संपर्क में आना हमारे शरीर की घड़ी को रीसेट करने के लिए महत्वपूर्ण होता है."

शोधकर्ताओं का कहना है कि दिन की रोशनी में खाना खाने से शरीर अधिक मेलाटोनिन बना सकता है. हालांकि, सेंट-ऑन्ज के अनुसार, वैज्ञानिकों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि पौधों से प्राप्त मेलाटोनिन हमारे शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन को कैसे प्रभावित करता है और यह नींद पर क्या असर डालता है.

नींद भोजन
इमेज कैप्शन, अच्छी नींद के लिए केवल सही भोजन ही पर्याप्त नहीं है. (सांकेतिक तस्वीर)

ऐसा लगता है कि कई वजहों से पौधों से मिलने वाला आहार नींद के लिए सबसे अधिक फ़ायदेमंद है.

साथ ही इसमें पूरे दिन के दौरान नियमित समय पर भोजन करना मददगार हो सकता है.

लेकिन अच्छी नींद पाने के लिए हमारा आहार अकेले काम नहीं करता.

शोधकर्ता इस बात पर ज़ोर देते हैं कि हमारी नींद इस बात से भी प्रभावित होती है कि हम दिन में शारीरिक तौर पर कितना सक्रिय रहते हैं और हमारा मानसिक स्वास्थ्य कैसा है.

इसके साथ ही हम रोशनी और अंधेरे के संपर्क में कितने समय तक रहते हैं, इससे भी अच्छी नींद पाने का संबंध है.

सेंट-ऑन्ज कहती हैं कि साथ ही यह समझना ज़रूरी है कि खराब नींद और नींद से जुड़ी बीमारी (जैसे अनिद्रा या स्लीप एपनिया) में अंतर होता है.

वो कहती हैं, "अगर आपको नींद की कोई बीमारी है, तो आपको जांच करवानी चाहिए और इसका इलाज लेना चाहिए. इलाज का एक हिस्सा आहार में सुधार हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को अन्य उपचार की ज़रूरत होती है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित