ईरान में गिराए गए लड़ाकू विमान पर क्या कह रहा है अमेरिकी मीडिया

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ईरान का दावा है कि उसने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को गिरा दिया है.
अमेरिका के प्रमुख मीडिया आउटलेट्स में से एक सीएनएन ने इस घटना पर लिखा है कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध , जो पहले से ही अमेरिकी जनता के बीच काफ़ी अलोकप्रिय साबित हो रहा था, एक नए और अधिक जटिल चरण में पहुंच गया है.
इसने लिखा कि पहले ख़बर आई कि ईरान के ऊपर एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को गिरा दिया गया.
इसके बाद शुक्रवार को ख़बर आई कि ईरान ने दूसरे अमेरिकी लड़ाकू विमान को निशाना बनाया है.
जबकि सीएनएन ने लिखा है, ''लेकिन एक ऐसे संघर्ष में जिसमें सैन्य वर्चस्व अमेरिका के पक्ष में है, ये घटना एक विषम युद्ध के ख़तरों को दिखाती करती है. इसकी लागत को अमेरिकी जनता पहले से नामंजूर करती आ रही है.''
सीएनएन लिखता है, ''इन घटनाओं से ईरान के आसमान पर पूरे वर्चस्व के बारे में ट्रंप प्रशासन के दावों के साथ-साथ पिछले महीने से बनाए जा रहे अभेद्य होने के दिखावे की भी धज्जियां उड़ती हैं.''
'टूट गई ईरान के आसमान में अमेरिकी वर्चस्व की धारणा'

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एनबीसी न्यूज़ ने ईरान की ओर से विमान गिराने के दावे का ज़िक्र करते हुए लिखा है, ''यह पहली बार है जब इस ताजा संघर्ष के तहत ईरान के अंदर अमेरिकी विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है, जिससे यह धारणा गलत साबित होती है कि अमेरिका का ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण है.''
एनबीसी लिखता है, ''ट्रंप ने इस युद्ध में जीत की घोषणा करते हुए कहा है कि उन्होंने ईरान पर युद्ध समाप्त करने पर सहमत होने के लिए दबाव डाला है. वहीं उन्होंने मध्यपूर्व में नए सैनिकों की तैनाती करते हुए कहा है कि अगर ईरान होमुर्ज़ स्ट्रेट को नहीं खोलता तो इस क्षेत्र में तनाव और बढ़ जाएगा.''
इसमें आगे कहा गया है, ''अब ईरान की ओर से अमेरिकी विमानों को गिराने का दावा किया गया है. इससे उसके आसमान पर अमेरिकी-इसराइली वर्चस्व के दावों पर संदेह और भी बढ़ जाएगा.''
''इसराइल और अमेरिका के संयुक्त अभियान का प्रमुख मक़सद ईरान की मिसाइल रक्षा प्रणाली को नष्ट करना और कमजोर करना रहा है, लेकिन ईरान ने पूरे क्षेत्र में जवाबी हमला करने की क्षमता बरकरार रखी है.''
वहीं फ़ॉक्स न्यूज़ ने लिखा है कि ईरान की सरकारी मीडिया ने शुक्रवार को कुछ तस्वीरें जारी की हैं जिनमें कथित तौर पर एक क्षतिग्रस्त अमेरिकी लड़ाकू विमान को दिखाया गया है, इसमें इजेक्टर सीट भी शामिल है.
फ़ॉक्स न्यूज़ ने लिखा है कि वो इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता.
फ़ॉक्स न्यूज़ के मुताबिक़, ''विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध क्षेत्र के ऊपर आसमान को नियंत्रित करने का मतलब कभी ये नहीं होता कि यहां जोखिम बिल्कुल नहीं है.''
''हालांकि वायु सेना के एफ-15ई लड़ाकू विमान को गिराए जाने से ईरान के आसमान पर वर्चस्व के ट्रंप प्रशासन के दावों पर सवाल उठने लगे हैं.''
रिटायर्ड लेफ़्टिनेंट जनरल डेविड डेप्टुला ने शुक्रवार को फ़ॉक्स न्यूज़ के एक शो में कहा, "ऐतिहासिक मानकों को भी देखें तो बेहद सुरक्षित क्षेत्र में चार हफ़्तों के युद्ध के बाद एक लड़ाकू विमान का नुक़सान होना आश्चर्यजनक तौर पर काफी कम है.''
उन्होंने कहा, "इसका मतलब ये है कि आपके पास बगैर किसी बाधा के अपनी इच्छानुसार कहीं भी और कभी भी काम करने की क्षमता है."
डेप्टुला ने बताया कि ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म में गठबंधन सेना ने 43 दिनों के युद्ध के दौरान लगभग हर दिन एक विमान खोया था.
साल 1990 में कुवैत पर इराक़ के हमले के बाद इराक़ के ख़िलाफ़ ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म चलाया गया था.
'ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती है ये घटना'

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एबीसी न्यूज़ ने लिखा है कि अमेरिका की ओर से छेड़े गए युद्ध के दौरान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बार-बार कहा है कि ईरान की क्षमताओं को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है.
उन्होंने कहा था कि ईरान के विमानरोधी सिस्टम को अमेरिकी सेना ने ख़त्म कर दिया है.
''लेकिन शुक्रवार को उस दावे पर सवाल उठने लगे जब कई अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक़, ईरान ने अपने क्षेत्र में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान, एफ-15ई को गिरा दिया है.''
अंग्रेज़ी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने विमान गिराए जाने की घटना का ज़िक्र करते हुए लिखा है, "लापता क्रू सदस्य की तलाश अमेरिकी सैनिकों के लिए अब तक का सबसे जोखिम भरा पल बन गई है. इससे न केवल लापता एयरमैन बल्कि उसे बचाने वाली टीम भी सीधे ईरानी हमलों के ख़तरे में आ गई है."
''यह इस संघर्ष की पहली घटना है, जब किसी अमेरिकी मानव-संचालित विमान को दुश्मन क्षेत्र के अंदर गिराया गया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह घटना राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन सकती है.''
''उन्हें ईरान युद्ध के विरोधियों, यहां तक कि अपने कुछ समर्थकों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.''
''इस हफ्ते अपने संबोधन में ट्रंप ने इस युद्ध को 'ख़त्म होने के क़रीब' बताया था, लेकिन ताजा घटनाओं से उस दावे पर सवाल उठने लगे हैं.''
'कॉम्बैट सर्च और रेस्क्यू मिशन' अमेरिकी सेना के सबसे ख़तरनाक अभियानों में से होते हैं. इनमें शामिल हेलिकॉप्टर और विमान अक्सर ज़मीन के क़रीब उड़ते हैं, जिससे वे दुश्मन का निशाना बनने के लिहाज से ज्यादा संवेदनशील होते हैं.
विमान के रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में एक पूर्व अमेरिकी जनरल के जेम्स स्लाइफ़ ने कहा, ''यह एक हाई-रिस्क मिशन है. जितनी देर कोई ज़मीन पर रहता है, उसे सुरक्षित निकालना उतना ही मुश्किल हो जाता है."
उन्होंने कहा कि भले ही जानकारी अधूरी हो लेकिन ऐसे ऑपरेशन तुरंत शुरू किए जाते हैं क्योंकि पायलट के पकड़े जाने पर दुश्मन उसे प्रचार के लिए इस्तेमाल कर सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित




































