कौन थे इसराइली हमले में मारे गए हमास के नेता याह्या सिनवार

बिन्यामिन नेतन्याहू
इमेज कैप्शन, याह्या सिनवार की मौत की पुष्टि करते हुए बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, "और जैसा कि हमने करने का वादा किया था, हमने उसके साथ हिसाब बराबर कर लिया."
    • Author, फ़्रेंक गार्डनर
    • पदनाम, बीबीसी के सुरक्षा संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 16 मिनट

इसराइल ने कहा है कि उसने ग़ज़ा में मौजूद हमास के नेता याह्या सिनवार को मार दिया है. इसराइल सिनवार को पिछले साल 7 अक्तूबर को हुए इसराइल पर हमास के हमले का मुख्य साज़िशकर्ता बताता रहा है.

उस हमास के हमले में 1200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को अग़वा कर लिया गया था. इसके तुरंत बाद इसराइल ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी थी. सिनवार इस युद्ध की शुरुआत में ही ग़ायब हो गए थे.

इसमें हैरानी की कोई बात नहीं थी क्योंकि जब ड्रोन, जासूसी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और ख़ुफिया एजेंटों की मदद से हज़ारों इसराइली सैनिक उनकी तलाश कर रहे हों, तो याह्या का ग़ायब हो जाना लाज़मी था.

लेकिन अंत में इसराइली सेना के मुताबिक, दक्षिणी ग़ज़ा में सक्रिय सैनिकों ने सिनवार को एक इमारत के भीतर मार डाला. उस इमारत में किसी के बंधक होने के कोई सबूत नहीं मिले. फिंगरप्रिंट और डेंटल रिकॉर्ड के सहारे सिनवार की शिनाख़्त करने के बाद गुरुवार को इसराइल ने उनकी मृत्यु की घोषणा की थी.

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इसरायली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, "जिसने हमारे लोगों के ख़िलाफ़ इतिहास में सबसे खराब नरसंहार को अंजाम दिया, कट्टर आतंकवादी जिसने हजारों इसराइलियों की हत्या की और हमारे सैकड़ों नागरिकों का अपहरण किया, आज हमारे बहादुर सैनिकों ने उसे मार दिया है.''

"और जैसा कि हमने करने का वादा किया था, हमने उसके साथ हिसाब बराबर कर लिया."

'उसकी मौत तय है...'

याह्या सिनवार
इमेज कैप्शन, पिछले साल इसराइली सेना के प्रवक्ता ने एलान किया, "याह्या सिनवार की मौत तय है."

झक सफ़ेद बालों और स्याह भौहों वाले याह्या सिनवार,ग़ज़ा में हमास की सियासी शाखा के नेता थे और वो इसराइल के मोस्ट वॉन्टेड लोगों में से एक थे.

इसराइल 7 अक्टूबर को अपने दक्षिणी इलाक़े पर हमले के लिए हमास के अन्य नेताओं के साथ याह्या सिनवार को भी ज़िम्मेदार मानता था.

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पिछले साल अक्टूबर महीने की शुरुआत में इसराइल के सुरक्षा बलों के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने एलान किया था "याह्या सिनवार एक कमांडर हैं… और अब उनकी मौत तय है."

इसराइल के सुरक्षा बलों के चीफ ऑफ स्टाफ हर्ज़ी हलेवी ने कहा था, "इस जघन्य हमले का फ़ैसला याह्या सिनवार ने किया था, इसलिए याह्या और उनकी कमान के तहत काम करने वाला हर शख़्स अब हमारे निशाने पर है."

इनमें लोगों की नज़र से दूर रहने वाले मुहम्मद दैफ़ भी शामिल थे, जो हमास की सैन्य शाखा इज़्ज़ेदीन अल क़ासम ब्रिगेड्स के नेता थे. दैफ़ भी इसराइली हमले में मारे जा चुके हैं.

यूरोपियन कॉउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के सीनियर पॉलिसी फेलो ह्यू लोवाट्ट मानते हैं कि 7 अक्टूबर के हमले की योजना बनाने के पीछे मुहम्मद दैफ़ का ही दिमाग़ था, क्योंकि ये एक सैन्य अभियान था.

लेकिन लोवाट्ट कहते हैं, "इस बात की काफ़ी संभावना है कि हमास के जिन नेताओं ने इस हमले की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया, उनमें याह्या सिनवार भी शामिल रहे होंगे."

याह्या सिनवार, इस्माइल हनिया के बाद हमास के दूसरे नंबर के नेता माने जाते थे. इसी वर्ष जुलाई में इसमाइल हानिया को भी इसराइल ने मार दिया था. इसके बाद हमास का नेतृत्व याह्या ने संभाल लिया था.

इसराइल को ये मालूम था कि सिनवार ज़मीन के नीचे, अपने सुरक्षाकर्मियों से घिरे ग़ज़ा की किसी सुरंग में छुपे हुए थे. और वो किसी से संपर्क नहीं करते थे क्योंकि सिनवार को डर था कि वो किसी से बात करेंगे तो उनके ठिकाने का सुराग़ मिल जाएगा.

वीडियो कैप्शन, इसराइल हमले में हमास के शीर्ष नेता याह्या सिनवार की मौत हो गई है.

परवरिश और गिरफ़्तारी

ग़ज़ा की दीवार पर बनी हमास के दिवंगत आध्यात्मिक नेता शेख़ अहमद यासीन की तस्वीर
इमेज कैप्शन, ग़ज़ा की दीवार पर बनी हमास के दिवंगत आध्यात्मिक नेता शेख़ अहमद यासीन की तस्वीर

याह्या सिनवार को लोग अबु इब्राहिम के नाम से जानते थे उनका जन्म ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी इलाक़े में स्थित ख़ान यूनिस के शरणार्थी शिविर में हुआ था.

याह्या के मां-बाप अश्केलॉन के थे, लेकिन, जब 1948 में इसराइल की स्थापना की गई, और हज़ारों फलस्तीनियों को उनके पुश्तैनी घरों से निकाल दिया गया, तो याह्या के माता-पिता भी शरणार्थी बन गए थे. फलस्तीनी उसे 'अल-नक़बा' या तबाही कहते हैं.

याह्या सिनवार ने ख़ान यूनिस में लड़कों के सेकेंडरी स्कूल में शुरुआती पढ़ाई की थी. इसके बाद उन्होंने, ग़ज़ा की इस्लामिक यूनिवर्सिटी से अरबी ज़बान में बैचलर की डिग्री ली.

वॉशिंगटन इंस्टीट्यूट ऑफ नियर ईस्ट पॉलिसी में फेलो, एहुद यारी कहते हैं कि, जब याह्या पढ़ाई कर रहे थे, तब ख़ान यूनिस का शिविर मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों का गढ़ था. एहुद ने जेल में याह्या का चार बार इंटरव्यू किया था.

एहुद यारी बताते हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड, "मस्जिद जाने वाले उन नौजवानों के लिए एक बड़ा इस्लामी आंदोलन था, जो शरणार्थी शिविरों की ग़रीबी में रहते थे. बाद में हमास के लिए भी इसकी अहमियत काफ़ी बढ़ गई."

याह्या सिनवार को पहली बार इसराइल ने 1982 में गिरफ़्तार किया था. उस समय उनकी उम्र महज़ 19 साल थी. याह्या पर 'इस्लामी गतिविधियों' में शामिल होने का इल्ज़ाम था. 1985 में उन्हें दोबारा गिरफ़्तार किया गया. लगभग इसी दौरान, याह्या ने हमास के संस्थापक शेख़ अहमद यासीन का भरोसा जीत लिया.

तेल अवीव के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज़ में सीनियर रिसर्चर कोबी माइकल कहते हैं, "याह्या और शेख़ यासीन एक दूसरे के बेहद बेहद क़रीब आ गए."

माइकल कहते हैं कि, बाद के दिनों में इसी रिश्ते की बुनियाद पर हमास के आध्यात्मिक नेता ने सिनवार को हमास के भीतर एक ऊंचा दर्जा दिया.

1987 में हमास की स्थापना के दो साल बाद, याह्या ने इसके बेहद ख़तरनाक कहे जाने वाले अंदरूनी सुरक्षा संगठन, अल-मज्द की स्थापना की. उस वक़्त याह्या की उम्र केवल 25 बरस थी.

माइकल बताते हैं कि, "अल-मज्द, तथाकथित अनैतिक अपराध करने वालों को सज़ा देने के लिए बदनाम संगठन था."

इसके ज़रिए उन लोगों को निशाना बनाया जाता था, जो 'सेक्स वीडियो' रखते थे. इसके अलावा अल-मज्द के सदस्य हर उस शख़्स का पीछा करके उस मार डालते थे, जिस पर उन्हें इसराइल के साथ साठ-गांठ का शक होता था.

जब सिनवार ने जासूसी के शक में ज़िंदा दफ़्न करवा दिया था...

साल 2021 में याह्या की रैली में निगरानी करता हथियारबंद सुरक्षाकर्मी
इमेज कैप्शन, साल 2021 में याह्या की रैली में निगरानी करता हथियारबंद सुरक्षाकर्मी

एहुद यारी कहते हैं कि ऐसी कई लोगों की 'निर्मम हत्याओं' के पीछे याह्या का हाथ था, जिन पर इसराइल के साथ सहयोग का शक था. वो बताते हैं कि, "इनमें से कइयों को तो याह्या ने अपने हाथों से मारा था और उन्हें इसका बहुत गर्व था. उन्होंने मुझसे और दूसरे लोगों से बातचीत में ये बात कही भी थी."

इसराइल के अधिकारियों के मुताबिक़, बाद में याह्या ने क़बूल किया था कि उन्होंने इसराइल के लिए जासूसी करने के शक में एक आदमी को उसके ही भाई के हाथों ज़िंदा दफ़्न करा दिया था, और ज़िंदा दफ़्न करने का ये काम फावड़े से नहीं, चम्मच से किया गया था.

एहुद यारी कहते हैं, "याह्या ऐसे इंसान थे जो अपने इर्द गिर्द अपने समर्थकों और अनुयायियों के साथ बहुत से ऐसे लोगों को भी जमा कर सकते हैं, जो उनसे ख़ौफ़ ख़ाते हैं और उनसे किसी भी तरह की दुश्मनी मोल नहीं लेना चाहते."

आरोप है कि 1988 में याह्या सिनवार ने दो इसराइली सैनिकों को अगवा करके उनकी हत्या करने की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया. उनको उसी साल गिरफ़्तार कर लिया गया. इसराइल ने उन्हें 12 फलस्तीनियों की हत्या के लिए दोषी ठहराया और एक साथ चार उम्र क़ैदों की सज़ा सुनाई गई.

जेल के दिन

2017 में मिस्र की सीमा पर याह्या सिनवार
इमेज कैप्शन, साल 2017 में मिस्र की सीमा पर याह्या सिनवार

याह्या सिनवार ने अपनी वयस्क ज़िंदगी के बेशतर दिन, 1988 से 2011 के बीच क़रीब 22 बरस इसराइल की जेलों में गुज़ारे हैं. ऐसा लगता है कि जेल में गुज़ारे दिनों के दौरान, कई बार तो उन्हें तन्हा भी रखा क़ैद रखा गया था, और शायद उन दिनों ने याह्या को और भी कट्टरपंथी बना डाला.

एहुद यारी कहते हैं, "जेल के भीतर याह्या, ताक़त के बल पर अपना दबदबा क़ायम करने में कामयाब रहे. उन्होंने क़ैदियों के बीच ख़ुद को नेता के तौर पर स्थापित कर लिया. वो क़ैदियों की तरफ़ से जेल अधिकारियों से बातचीत करते थे और उनके बीच अनुशासन क़ायम करते थे."

याह्या सिनवार के जेल में गुज़ारे दिनों का इसराइली सरकार ने जो विश्लेषण किया था, उसमें उन्हें 'निर्दयी, दबदबा क़ायम करने वाला, प्रभावशाली, बर्दाश्त करने की असामान्य क्षमता वाला, धूर्त, लोगों को अपने जाल में फंसाने वाला, बहुत कम सुविधाओं में संतुष्ट… जेल के भीतर क़ैदियों की भीड़ के बीच भी राज़ छुपाने में माहिर… और भीड़ जुटाने की क्षमता वाला' बताया गया था.

याह्या सिनवार से चार मुलाक़ातों के बाद, एहुद यारी ने उनके किरदार का जो मूल्यांकन किया उसके मुताबिक़ वो याह्या को एक मनोरोगी मानते हैं. हालांकि वो ये भी कहते हैं, "याह्या को सिर्फ़ एक मनोरोगी मान लेना ग़लती होगी. क्योंकि तब आप एक अजीब और पेचीदा इंसान की असलियत से वाक़िफ़ नहीं हो सकेंगे."

एहुद यारी ने बीबीसी को बताया, "याह्या बेहद धूर्त और चालाक थे. वो ऐसे इंसान थे जिन्हें पता था कि दूसरों पर कब और कैसे जादू चलाकर उसको अपने बस में करना है."

जब याह्या सिनवार, एहुद यारी से कहा करते थे कि इसराइल को तबाह करना ही होगा और वो इस बात पर भी ज़ोर देते थे कि फलस्तीन में यहूदियों के लिए कोई जगह नहीं है, तब वो मज़ाक़ में उनसे ये भी कहते थे, "अच्छा चलिए, शायद हम अपवाद के तौर पर आपको यहां जगह दे देंगे."

जेल में रहने के दौरान, याह्या ने इसराइल के अख़बार पढ़-पढ़कर धड़ल्ले से हिब्रू ज़बान बोलना सीख लिया था.

एहुद यारी कहते हैं कि उनको अरबी भाषा आती है, फिर भी याह्या सिनवार उनसे हमेशा हिब्रू में बात करने को तरज़ीह देते थे.

एहुद यारी बताते हैं, "वो हिब्रू पर अपनी पकड़ बेहतर करने की कोशिश करते थे. मुझे लगता है कि वो जेल के कर्मचारियों से बेहतर हिब्रू बोलने वाले से फ़ायदा उठाना चाहते थे."

जेल से रिहाई

याह्या सिनवार

2011 में जब क़ैदियों की अदला-बदली का समझौता हुआ, तो इसराइल के एक सैनिक गिलाड शलिट के बदले में इसराइल ने 1027 फलस्तीनी इसराइली अरब क़ैदियों को रिहा किया.

इनमें याह्या सिनवार भी शामिल थे.

गिलाड शलिट को अगवा करने के बाद पांच साल से बंधक बनाकर रखा गया था. उनको अगवा करने में याह्या सिनवार के भाई भी शामिल थे, जो हमास के वरिष्ठ सैन्य कमांडर हैं. उसके बाद से याह्या ने इसराइल के और सैनिकों को अगवा करने की अपील की है.

उस समय तक इसराइल ने ग़ज़ा पट्टी पर अपना क़ब्ज़ा छोड़ दिया था और ग़ज़ा की कमान हमास के हाथ में आ गई थी.

हमास ने चुनाव जीतने के बाद अपने प्रतिद्वंद्वियों यानी यासिर अराफ़ात की अल-फ़तह पार्टी के के नेताओं का सफ़ाया कर डाला था. अल-फ़तह के कई नेताओं को तो ऊंची ऊंची इमारतों से नीचे फेंक दिया गया था.

माइकल बताते हैं कि, जब याह्या सिनवार ग़ज़ा लौटे, तो उन्हें फ़ौरन ही नेता के तौर पर स्वीकार कर लिया गया. इसमें बहुत बड़ा हाथ उनकी हमास के एक ऐसे संस्थापक होने की इमेज का भी था, जिसने अपनी ज़िंदगी के कई बरस इसराइल की जेलों में गुज़ारे थे.

हालांकि, माइकल कहते हैं कि "लोग उनसे डरते भी थे कि ये वो शख़्स था जिसने अपने हाथों से लोगों का क़त्ल किया था."

माइकल के मुताबिक़, "याह्या, एक ही वक़्त में बहुत निर्मम और आक्रामक होने के साथ साथ करिश्माई भी थे."

एहुद यारी कहते हैं कि, "वो बहुत अच्छे वक़्ता नहीं थे. जब वो लोगों को संबोधित करते थे, तो लगता था कि भीड़ में से कोई शख़्स बोल रहा है."

एहुद यारी बताते हैं कि जेल से रिहा होने के फ़ौरन बाद, याह्या सिनवार ने इज़्ज़ेदीन अल-क़साम ब्रिगेड और इसके चीफ ऑफ स्टाफ मारवान इस्सा के साथ गठबंधन बना लिया था.

ख़ान यूनिस का 'क़साई'

अपने क्रूर और हिंसक तौर-तरीक़ों की वजह से सिनवार को ख़ान यूनिस का क़साई भी कहा जाता था.
इमेज कैप्शन, अपने क्रूर और हिंसक तौर-तरीक़ों की वजह से सिनवार को ख़ान यूनिस का क़साई भी कहा जाता था.

साल 2013 में याह्या को ग़ज़ा पट्टी में हमास के सियासी ब्यूरो का सदस्य चुना गया और 2017 में वो इसके प्रमुख बन गए.

याह्या सिनवार के छोटे भाई मुहम्मद भी हमास में एक बड़ी भूमिका निभाने लगे. कहा जाता है कि 2014 में मृत घोषित किए जाने से पहले मुहम्मद, कई बार इसराइल के हाथों हत्या की कोशिशों से बच निकले थे.

उसके बाद मीडिया की कई ख़बरों में ये दावा किया गया है कि मुहम्मद अभी भी ज़िंदा हैं और वो हमास की सैन्य शाखा में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. मुहम्मद के बारे में कहा जाता है कि वो ग़ज़ा की सुरंगों में छुपे हुए हैं और हो सकता है कि 7 अक्टूबर के हमले में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई हो.

अपने क्रूर और हिंसक तौर-तरीक़ों की वजह से सिनवार को ख़ान यूनिस का क़साई भी कहा जाता था.

यारी कहते हैं, "वो ऐसे शख़्स थे जो बर्बर अनुशासन क़ायम करते थे. हमास में लोगों को ये पता था कि अगर आप सिनवार का हुक्म नहीं मानते, तो आप अपनी ज़िंदगी को दांव पर लगा देते हैं."

कहा जाता है कि 2015 में हमास के कमांडर महमूद इश्तिवी को नज़रबंद करके उनको टॉर्चर करने और फिर उनकी हत्या करने के पीछे भी याह्या सिनवार का ही हाथ था. महमूद इश्तिवी पर सैमलैंगिकता और पैसों की हेरा-फेरी करने का इल्ज़ाम था.

2018 में जब अमरीका ने इसराइल में अपने दूतावास को तेल अवीव से यरूशलम ले जाने का फ़ैसला किया तो, अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए याह्य सिनवार ने कहा था कि वो इसके विरोध में हज़ारों फलस्तीनियों के इसराइल के साथ सीमा पर लगी तारों को तोड़कर इसराइल में घुसने का समर्थन करते हैं.

बाद में उसी साल याह्या ने दावा किया कि पश्चिमी तट पर हुकूमत कर करने वाले हमास के प्रतिद्वंद्वी फलस्तीनी प्राधिकरण ने उनकी हत्या कराने की साज़िश रची थी, लेकिन वो बच निकले.

हालांकि, याह्या ने कई बार बहुत व्यावहारिक रुख़ अपनाते हुए, इसराइल के साथ युद्ध विराम, क़ैदियों की अदला बदली और फलस्तीनी प्राधिकरण के साथ मेल-मिलाप का भी समर्थन किया है. इसके लिए विरोधियों ने याह्या को कुछ ज़्यादा ही नरमपंथी बताते हुए उनकी आलोचना भी की थी.

ईरान से नज़दीकी

14 अक्टूबर, 2023 को इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेख़्त ने याह्या सिनवार को 'शैतान का चेहरा' करार दिया था.
इमेज कैप्शन, 14 अक्टूबर, 2023 को इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेख़्त ने याह्या सिनवार को 'शैतान का चेहरा' करार दिया था.

इसराइल के रक्षा और सुरक्षा तंत्र में बहुत से लोग ये मानते हैं कि क़ैदियों की अदला बदली के तहत याह्या सिनवार को रिहा करना एक घातक ग़लती थी.

इसराइलियों का मानना है कि वो इस बात के धोखे में आ गए कि अगर हमास को आर्थिक प्रोत्साहन और फलस्तीनियों और ज़्यादा वर्क परमिट दिए जाएंगे तो इससे इसराइल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और हमास, इसराइल से जंग लड़ने की बात भूल जाएगा. हालांकि साफ़ है कि इसराइल की ये सोच घातक रूप से ग़लत साबित हुई.

एहुद यारी कहते हैं, "याह्या सिनवार ख़ुद को ऐसे शख़्स के रूप में देखते थे, जो फलस्तीन को आज़ाद कराने के लिए पैदा हुआ था. उनका ग़ज़ा पट्टी के आर्थिक हालात सुधारने और सामाजिक सेवाएं बेहतर करने का कोई इरादा नहीं है. उनका ये मक़सद ही नहीं था."

साल 2015 में अमेरिका के विदेश विभाग ने आधिकारिक रूप से याह्या सिनवार को 'विशेष नामांकित वैश्विक आतंकवादी' के दर्जे में डाल दिया था. मई 2021 में इसराइल के हवाई हमलों में ग़ज़ा पट्टी में याह्या के घर और दफ़्तर को निशाना बनाया गया था. अप्रैल 2022 में टेलीविज़न पर प्रसारित एक भाषण में याह्या ने लोगों को हर उपलब्ध तरीक़े से इसराइल पर हमला करने के लिए उकसाया था.

विश्लेषकों ने याह्या की पहचान, हमास के सियासी ब्यूरो और उसकी हथियारबंद शाखा इज़्ज़ेदीन अल-क़साम ब्रिगेड के बीच की सबसे अहम कड़ी के रूप में की थी. अल-क़साम ब्रिगेड की अगुवाई में ही पिछले साल 7 अक्टूबर को दक्षिणी इसराइल पर हमला किया गया था.

14 अक्टूबर, 2023 को इसराइली सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल रिचर्ड हेख़्त ने याह्या सिनवार को 'शैतान का चेहरा' करार दिया था. उन्होंने कहा था कि 'वो शख़्स और उसकी पूरी टीम हमारे निशाने पर है. हम उस इंसान तक ज़रूर पहुंचेंगे.'

याह्या सिनवार, ईरान के क़रीबी थे. एक शिया मुल्क और एक सुन्नी अरब संगठन के बीच साझेदारी कोई आम बात नहीं है. लेकिन, दोनों का मक़सद एक था- एक देश के तौर पर इसराइल का नाम-ओ-निशान मिटाना और यरूशलम को इसराइल के क़ब्ज़े से आज़ाद कराना.

ईरान और याह्या सिनवार एक दूसरे से तालमेल बिठा करके काम करते थे. ईरान, हमास को पैसे देता है और उसके लड़ाकों को ट्रेनिंग देता है, जिससे वो अपनी फौजी ताक़त को बढ़ा सके और हज़ारों रॉकेट इकट्ठा कर सके, जिनका इस्तेमाल हमास, इसराइली शहरों को निशाना बनाने के लिए करता है.

साल 2021 में एक भाषण के दौरान याह्या सिनवार से इस मदद के लिए ईरान का शुक्रिया अदा किया था. याह्या ने कहा था कि, "अगर ईरान ने मदद नहीं की होती, तो फ़लस्तीन की आज़ादी की मुहिम के पास वो ताक़त नहीं होती, जो आज है."

भूकंप के झटके जैसा...

सिनवार की मौत से नाराज़ हमास अब किसी भी जंगबंदी के समझौते और अधिक दूर जा सकता है.
इमेज कैप्शन, सिनवार की मौत से नाराज़ हमास अब किसी भी जंगबंदी के समझौते और अधिक दूर जा सकता है.

याह्या सिनवार की मौत हमास के लिए एक भूकंप के झटके जैसा है.

जब हमास ने अगस्त में इसमाइल हनिया की मौत के बाद उन्हें चुना था तो यह एक मज़बूत फ़ैसला था क्योंकि सिनवार जैसे आदमी को चुनने का अर्थ था कि वो किसी भी हाल में इसराइल से समझौता नहीं करेंगे.

हमास को अब यह तय करना होगा कि क्या ऐसा समझौता करने का समय आ गया है जो ग़ज़ा पट्टी को तबाह करने वाले साल भर के इसरायली सैन्य अभियान का अंत कर दे.

या इसके उलट, क्या इस संघर्ष में फ़लस्तीनियों की लगातार मौतों के बावजूद हमास इसराइल के धैर्य को टूटने के इतंज़ार में लड़ता रहेगा.

अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने हाल ही में कहा था कि ग़ज़ा में युद्धविराम समझौता लगभग 90% हो चुका है.

सिनवार की हत्या आख़िरकार उस डील को पूरा करने और इसराइल के बंधकों को घर लाने का एक अवसर हो सकता है.

लेकिन इसमें एक जोखिम भी है. सिनवार की मौत से नाराज़ हमास अब किसी भी जंगबंदी के समझौते और अधिक दूर जा सकता है.

अतिरिक्त रिपोर्टिंग- जोन केली

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