जम्मू-कश्मीर: विशेष राज्य का दर्जा हटने के बाद पहली बार होगा विधानसभा चुनाव, कैसा है माहौल

कश्मीर में लोकसभा चुनाव में वोटिंग की तस्वीर
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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

जम्मू -कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के बाद पहली बार केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराए जा रहे हैं.

ये विधानसभा चुनाव क़रीब एक दशक के बाद होने जा रहे हैं. साल 2019 में केंद्र सरकार ने विशेष दर्जा ख़त्म कर जम्मू-कश्मीर को दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बांट दिया था.

लद्दाख को भी अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. जम्मू-कश्मीर में ये विधानसभा चुनाव तीन चरणों में होंगे.

जम्मू-कश्मीर में बीते दो दशकों में इस बार का चुनाव सबसे कम समय में कराया जा रहा है.

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आख़िरी बार 2014 में हुए थे विधानसभा चुनाव

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 तक जम्मू -कश्मीर में चुनाव कराने के लिए कदम उठाने को कहा था.
इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए क़दम उठाने को कहा था

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के आख़िरी चुनाव साल 2014 में हुए थे. साल 2018 में बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन वाली सरकार गिर गई थी.

उस वक़्स आपसी मतभेद के चलते बीजेपी ने पीडीपी से अपना समर्थन वापस ले लिया था.

सरकार गिरने के बाद जम्मू-कश्मीर क़रीब छह सालों तक केंद्र सरकार के शासन में रहा.

इस समय जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल का शासन है और मनोज सिन्हा यहां के उपराज्यपाल हैं.

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जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक दल एक लंबे समय से विधानसभा चुनाव कराने की मांग कर रहे थे.

भारत के निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस सम्मेलन में चुनाव की घोषणा करते हुए बताया कि जम्मू-कश्मीर में मतदाताओं की संख्या 87.09 लाख है.

विधानसभा के चुनाव जम्मू-कश्मीर में कई तब्दीलियों के बाद किए जा रहे हैं.

साल 2022 में जम्मू-कश्मीर में परिसीमन करके सात नई सीटें जोड़ी गई हैं और अब 83 सीटों की जगह नई विधानसभा में 90 सीटें होंगी.

05 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने के बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दल राज्य का दर्जा वापस देने की मांग कर रहे हैं.

2019 में विशेष दर्जा हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में एक लंबे समय तक कर्फ्यू और प्रतिबंध लगाए गए थे और इंटरनेट को भी बंद किया गया था.

सरकार ने हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया था जिनमें नेता भी शामिल थे.

सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ कई राजनीतिक दलों ने याचिकाएं दायर कर इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

हालांकि, दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने फ़ैसला सुनाते हुए जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने का फ़ैसला बरक़रार रखा.

इस फ़ैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए क़दम उठाने को कहा था.

क्या है नेताओं की राय?

डॉक्टर फारूक अब्दुल्लाह ने चुनाव की घोषणा की स्वागत तो की लेकिन सरकार के कई फैसलों की आलोचना भी की
इमेज कैप्शन, डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने चुनाव की घोषणा का स्वागत तो किया लेकिन सरकार के कई फ़ैसलों की आलोचना भी की

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा पर जम्मू-कश्मीर के आम लोगों, सियासी दलों और विश्लेषकों ने अपनी अलग-अलग राय ज़ाहिर की है.

पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉक्टर फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि वो चुनाव की घोषणा का स्वागत करते हैं, साथ ही उन्होंने सरकार के कई फ़ैसलों की आलोचना भी की है.

उनका कहना है, "मैं, आज बहुत ख़ुश हूँ. अल्लाह का करम है. जिस दुविधा में सियासी जमातों को रखा गया था कि चुनाव होंगे या नहीं होंगे, वो दुविधा आज ख़त्म हो गई है. सुप्रीम कोर्ट की मेहरबानी से चुनाव आयोग ने तारीख़ों के साथ चुनाव की घोषणा की. हम चुनाव आयोग से ये विनती करेंगे कि सभी सियासी जमातों को अपना रोल निभाने का मौका दिया जाए और ये चुनाव अच्छे से हों."

उनका कहना था, "जिस तरह से सरकार ने रातों-रात अधिकारियों के तबादले किए हैं, मैं समझता हूँ कि चुनाव आयोग को इसे भी देखना चाहिए कि इसकी वजह क्या थी."

चुनाव की घोषणा से पहले ही गुरुवार और शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर सरकार ने सौ से अधिक अधिकारियों का तबादला किया है.

ये पूछने पर कि हाल के दिनों में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल को जो अधिकार दिए गए हैं, उन अधिकारों से नई विधानसभा पर क्या फर्क पड़ सकता है, तो वो कहते हैं, "मुझे नहीं मालूम कि इससे क्या फर्क पड़ेगा और ये बात नई विधानसभा बनने के बाद ही पता चल सकती है. उपराज्यपाल को जो अधिकार दिए गए हैं, हम उनके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाएंगे. ये अधिकार स्टेट के पास होने चाहिए न कि उपराज्यपाल के पास. ये दिल्ली नहीं है बल्कि जम्मू-कश्मीर है. इनको राज्य का दर्जा भी वापस देना चाहिए."

सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना

पूर्व विधायक मोहम्मद यूसुफ तारिगामी कहते हैं कि चुनाव घोषणा से आम लोगों में एक उम्मीद बन गई है
इमेज कैप्शन, पूर्व विधायक मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी कहते हैं कि चुनाव की घोषणा से आम लोगों में एक उम्मीद बन गई है

हाल के समय में गृह मंत्रालय ने एक नोटिफ़िकेशन जारी कर जम्मू और कश्मीर संघ राज्य क्षेत्र सरकार के कार्य संचालन (दूसरा संशोधन) नियम 2024 के तहत ये तय किया है कि जम्मू-कश्मीर में ऑल इंडिया सर्विस के जितने भी तबादले होंगे या कोई पोस्टिंग होगी, उसके लिए उपराज्यपाल की अनुमति होनी चाहिए.

केंद्र सरकार के इस क़दम की कश्मीर में राजनीतिक दलों की तरफ़ से सख़्त आलोचना की गई थी.

चुनाव से पहले इस बदलाव को जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने इस बात का इशारा समझा कि केंद्र सरकार प्रमुख शक्तियां को अपने अधिकार में रखना चाहती है.

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के नेता और पूर्व विधायक मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने बताया कि चुनाव की घोषणा से आम लोगों में एक उम्मीद बन गई है.

उनका कहना था कि जिस तरह एक लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव नहीं कराए जा रहे थे, उस वजह से कोई उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी. उनका ये भी कहना था कि जिस तरह से सरकार बार-बार जम्मू-कश्मीर में शांति बहाल होने का दावा कर रही थी, लेकिन उसके बावजूद चुनाव नहीं कराए जा रहे थे, तो इन सब बातों को देखकर लगता था कि जम्मू-कश्मीर के विधानसभा चुनाव शायद कभी नहीं हो पाएंगे.

तारिगामी कहते हैं, "अब ये उम्मीद बन गई है कि विधानसभा चुनाव से कुछ दरवाजे़ खुल पाएंगे और जहां हमारे प्रतिनिधि बात कर सकेंगे. लोग अफ़सरशाही के शासन से तंग आ चुके हैं. इस वजह से चुनाव आयोग की घोषणा का हम स्वागत करते हैं."

तारिगामी भी संशोधन नियम (2024) पर सवाल उठाते हैं कि इस संशोधन से केंद्र सरकार ने जिस तरह से उपराज्यपाल को अधिकार दिए हैं, उससे विधानसभा और कैबिनेट दोनों ही के अधिकार कम हुए हैं.

बीजेपी और पीडीपी का क्या कहना है?

एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की भीड़
इमेज कैप्शन, एक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की भीड़

जम्मू-कश्मीर बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सुनील सेठी बताते हैं कि जिस तरह से चुनाव आयोग ने हर बात का ख़याल रखते हुए विधानसभा चुनाव की घोषणा की है, उसकी हम सराहना करते हैं.

उनका कहना था कि ये चुनाव जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र के एक नए चैप्टर का आगाज़ होगा. उनका ये भी कहना था कि जिस तरह से देश के दूसरे केंद्र शासित प्रदेशों में उपराज्यपाल को अधिकार होते हैं, उसी तरह जम्मू-कश्मीर में भी होगा. उनका ये भी कहना था कि कोई भी इलाक़ा या राज्य केंद्र शासित प्रदेश बनता है तो वहां उपराज्यपाल को अधिकार मिलते हैं.

जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष अल्ताफ़ बुखारी ने विधानसभा चुनाव की घोषणा पर ख़ुशी ज़ाहिर की है.

पीडीपी ने जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की घोषणा पर ख़ुशी तो ज़ाहिर की है लेकिन उनका ये भी कहना है कि कि ''चुनाव करवा के लोगों पर कोई अहसान नहीं किया जा रहा है.''

पीडीपी की मीडिया सलाहकार इल्तिजा मुफ्ती कहती हैं कि विशेष अधिकार हटाने के बाद लोगों से सभी अधिकार छीन लिए गए हैं और किसी तरह की कोई सियासी जवाबदेही नहीं है. उनका कहना था कि अब जो चुनाव होने जा रहे हैं उससे कम से कम इतना तो होगा कि लोगों की समस्याओं का समाधान होगा और एक जवाबदेही का माहौल कायम होगा.

एक स्थानीय नागरिक तारिक अहमद कहते हैं कि जम्मू -कश्मीर में चुनाव की घोषणा एक बेहतर कदम है.

वो बताते हैं कि अब जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा भी खत्म किया गया है और लोग उम्मीद करते हैं इन चुनाव से उनकी मुश्किलें कम होंगी और ये चुनाव साफ-सुथरे होंगे. तारिक कहते हैं कि कुछ न कुछ तो हो रहा है.

विश्लेषक कहते हैं कि बीते छह से अधिक वर्षों से जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक संस्थान काम नहीं कर रहे थे और अब अगर विधानसभा बन भी जाती है तो उसके पास ज़्यादा अधिकार नहीं होंगे.

विश्लेषक क्या कहते हैं?

कश्मीर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर नूर अहमद बाबा कहते हैं कि जम्मू -कश्मीर में जिस तरह की विधानसभा बनेगी, ये एक नया अनुभव होगा
इमेज कैप्शन, कश्मीर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफे़सर रह चुके नूर अहमद बाबा कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में जिस तरह की विधानसभा बनेगी, ये एक नया अनुभव होगा

कश्मीर यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफे़सर रह चुके प्रोफे़सर नूर अहमद बाबा कहते हैं, "इन चुनाव से इतना ज़रूर होगा कि लोगों के काम होंगे. जम्मू-कश्मीर में जिस तरह की विधानसभा बनेगी, ये एक नया अनुभव होगा. इस बारे में हम ज़्यादा जानते भी नहीं हैं और न बोल सकते हैं. आगे चलकर जिस तरह के भी हालात उभरेंगे और यहां की विधानसभा जब काम करना शुरू करेगी और एक स्थानीय प्रशासन बनेगा, उसके बाद ये देखा जाएगा कि उनके पास क्या अधिकार होंगे. जबकि 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर के ज़्यादा अधिकार अब केंद्र सरकार के पास हैं."

हाल ही में लोकसभा चुनाव के बाद अब विधानसभा चुनाव भी बीजेपी के लिए परीक्षा से कम नहीं होंगे.

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद बीजेपी लगातार ज़ोर देकर कहती रही है कि जम्मू-कश्मीर में अगली सरकार उन्हीं की होगी.

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जम्मू में दो सीटें जीती थीं, जबकि कश्मीर घाटी से नेशनल कॉन्फ्रेंस को दो सीटें और निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद को एक सीट मिली थी.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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