अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर बुधवार को क़रीब 19 मिनट का संबोधन दिया. इस दौरान उन्होंने ईरान को धमकी देने समेत कई बातें कहीं
आर्टेमिस-2 मिशन: अमेरिका अंतरिक्ष यात्री कहां तक पहुंचे?
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इमेज कैप्शन, आर्टेमिस-2 मिशन बुधवार को फ़्लोरिडा से रवाना हुआ
आधी सदी बाद पहला मानवयुक्त चंद्र मिशन बुधवार को अमेरिका के फ़्लोरिडा से रवाना हुआ है. इस मिशन का नाम दिया गया है आर्टेमिस-2.
आर्टेमिस-2 मिशन पर गए अंतरिक्ष यात्री इस समय पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहे हैं और चंद्रमा की ओर रवाना होने से पहले ज़रूरी जांच कर रहे हैं.
अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक़ रहा, तो अंतरिक्ष यान आधी रात (जीएमटी) के आसपास पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर चंद्रमा की ओर बढ़ेगा.
अंतरिक्ष यान के भीतर ठंड का माहौल बताया जा रहा है.
इस 10 दिन के मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाएंगे.
माना जा रहा है कि वे पृथ्वी से अब तक किसी भी इंसान के मुक़ाबले ज़्यादा दूरी तक जा सकते हैं.
यह पूरी यात्रा एक मिनीबस के आकार के अंतरिक्ष यान में की जा रही है.
बांग्लादेश, श्रीलंका समेत इन पड़ोसी देशों को ऊर्जा की आपूर्ति पर भारत ने ये जानकारी दी
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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत अपने पड़ोसी देशों को ऊर्जा आपूर्ति जारी रखे हुए है.
प्रेस ब्रीफ़िंग में उन्होंने कहा, "बांग्लादेश को हम 2007 से ऊर्जा की आपूर्ति कर रहे हैं. हाल ही में हमने श्रीलंका को उनकी मांग पर 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद भी भेजे हैं."
जायसवाल ने बताया कि नेपाल और भूटान के साथ भी भारत का ऊर्जा सहयोग जारी है.
उन्होंने कहा, "मालदीव सरकार ने भी हमसे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों आधार पर संपर्क किया है. इन अनुरोधों पर हमारी उपलब्धता और घरेलू ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए विचार किया जा रहा है."
राघव चड्ढा की जगह डिप्टी लीडर की ज़िम्मेदारी मिलने पर आप सांसद अशोक कुमार ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद अशोक कुमार मित्तल ने डिप्टी लीडर की ज़िम्मेदारी मिलने पर प्रतिक्रिया दी है.
इससे पहले इस पद पर आप सांसद राघव चड्ढा थे.
पार्टी की ओर से आधिकारिक तौर पर इस बदलाव की कोई जानकारी नहीं दी गई है.
गुरुवार को न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में अशोक कुमार मित्तल ने कहा, "राज्यसभा या लोकसभा में पार्टी के जो लीडर या डिप्टी लीडर होते हैं, समय-समय पर उनका बदलाव होता रहता है. राघव जी से पहले एनडी गुप्ता जी डिप्टी लीडर थे, आज मैं बना हूं, कल कोई और आएगा."
उन्होंने कहा, "हमारी पार्टी लोकतांत्रिक पार्टी है और वह समय-समय पर पार्टी के लोगों को ट्रेनिंग भी देना चाहती है और सभी की प्रतिभा को उभारने की कोशिश भी करती है. इसी कड़ी में पार्टी ने यह फ़ैसला लिया है ताकि मैं यह ज़िम्मेदारी निभाऊं और और सीख सकूं."
उन्होंने कहा कि पार्टी में सब ठीक है.
ईरान को 'पाषाण युग' में ले जाने के ट्रंप के बयान पर आज का कार्टून
ट्रंप की 'पाषाण युग' की धमकी पर आईआरजीसी कमांडर ने क्या जवाब दिया
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकी दी है कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर बमबारी करेगा और उसे 'पाषाण युग' में पहुँचा देगा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के एक कमांडर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि आने वाले हफ़्तों में हमले ईरान को 'पाषाण युग' में पहुंचा सकते हैं.
आईआरजीसी की एयरोस्पेस फ़ोर्स के कमांडर माजिद मूसावी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "आप ही अपने सैनिकों को उनकी कब्रों तक भेज रहे हैं, ईरान नहीं, जिसे आप पाषाण युग में धकेलना चाहते हैं."
उन्होंने यह प्रतिक्रिया अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की उस पोस्ट के जवाब में दी, जिसमें ट्रंप के बयान को दोहराया गया था.
मूसावी ने कहा, "हॉलीवुड जैसी कल्पनाओं ने आपके दिमाग़ को इतना प्रभावित कर दिया है कि आप अपने मात्र 250 साल के इतिहास के साथ 6,000 साल पुरानी सभ्यता को धमकी दे रहे हैं."
ईरान को ट्रंप की धमकी पर चीन ने क्या प्रतिक्रिया दी?
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इमेज कैप्शन, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आने वाले हफ़्तों में ईरान के ख़िलाफ़ बड़े हमले शुरू करने की धमकी के बाद चीन ने मध्य पूर्व में तत्काल युद्धविराम का आह्वान किया है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "सैन्य समाधान समस्या का मूल रूप से हल नहीं कर सकते हैं और संघर्षों को बढ़ाना किसी भी पक्ष के हित में नहीं है."
उन्होंने सभी पक्षों से 'सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद करने' का आह्वान किया है.
बीबीसी फ़ारसी के मुताबिक़, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के आवाजाही में रुकावट का मुख्य कारण 'ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल के अवैध सैन्य अभियान' हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के मुद्दे पर बुधवार को क़रीब 19 मिनट का संबोधन दिया.
इस दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर 'बड़ा हमला' करेगा और उसे 'पाषाण युग में पहुंचा देगा'.
होर्मुज़ स्ट्रेट से किन जहाज़ों को गुज़रने दिया जाएगा, ईरान ने बताया
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इमेज कैप्शन, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई का कहना है कि ईरान 'युद्ध, बातचीत और युद्धविराम के दुष्चक्र' को बर्दाश्त नहीं करेगा
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों को गुज़रने की अनुमति दी जा रही है, लेकिन शर्त यह है कि वे 'हमलावर पक्ष से जुड़े न हों'.
टीवी चैनल न्यूज़रूम अफ़्रीका को दिए इंटरव्यू में बग़ाई ने कहा कि जहाज़ों को 'हमारे अधिकारियों के साथ ज़रूरी तालमेल के बाद' ही इस स्ट्रेट से गुज़रने दिया जाएगा.
संघर्ष का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान 'युद्ध, बातचीत और युद्धविराम के दुष्चक्र' को बर्दाश्त नहीं करेगा.
बग़ाई ने कहा, "उन्होंने (अमेरिका) कहा कि चलिए रुकते हैं, तो हम रुक गए और फिर नौ महीने बाद उन्होंने दोबारा शुरू कर दिया."
गौरतलब है कि जून में ईरान और इसराइल के बीच 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान अमेरिका ने ईरान के कई परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे.
उसके बाद बीते 28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया. मौजूदा संघर्ष को अब एक महीने हो चुके हैं.
देश में गैस और पेट्रोल-डीज़ल की आपूर्ति पर नितिन गडकरी ने क्या कहा
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इमेज कैप्शन, मध्य पूर्व संघर्ष पर नितिन गडकरी ने प्रतिक्रिया दी है
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष पर कहा है कि इससे भारत में 'आम आदमी को किसी प्रकार की तकलीफ़' नहीं है.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा, "सरकार ने बहुत प्रभावी क़दम उठाए हैं. कहीं गैस की कमी नहीं है, पेट्रोल-डीज़ल मिल रहा है. कठिनाइयां हैं, समस्याएं हैं फिर भी उसके बावजूद हमारी सरकार ने जो नीतियां अपनाई हैं उसके कारण आम आदमी को किसी प्रकार की तकलीफ़ नहीं है और लोगों में रोष नहीं है."
उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम हमारे ऊर्जा के संसाधनों का 86 फ़ीसदी आयात करते हैं, तो उसमें अड़चनें तो हैं क्योंकि हमारे देश की ताक़त तो 14 फ़ीसदी है. हम देश में इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर और बसें ले आए हैं. 100 फ़ीसदी एथेनॉल की गाड़ियां हम लेकर आए हैं."
उनका कहना है कि 'आत्मनिर्भर भारत' बनाने का जो उद्देश्य हमने सामने रखा है उसके लिए 'आयात को कम करना, निर्यात को बढ़ाना' है.
उन्होंने कहा, "जो पैसा बचेगा उसके कारण रोज़गार का निर्माण होगा. यही सोच है और उसी आधार पर हम आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं."
नितिन गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत में कई गैस सिलेंडर एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं.
सऊदी अरब का दावा, देश पर दागे गए ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल नष्ट किए गए
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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि देश ने ड्रोन से किए गए नए हमलों को नाकाम कर दिया है.
प्रवक्ता के मुताबिक़, चार ड्रोन को हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया गया.
इससे पहले मंत्रालय ने बताया था कि देश के पूर्वी क्षेत्र की ओर आ रही एक बैलिस्टिक मिसाइल को भी रोका गया है.
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अपने संबोधन में धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर 'बड़ा हमला' करेगा और उसे 'पाषाण युग में पहुंचा देगा'.
हालांकि ट्रंप की इस धमकी पर अमेरिका के कुछ सांसदों ने ट्रंप की कड़ी आलोचना की, जबकि कुछ नेताओं ने इसका समर्थन किया.
ट्रंप के 19 मिनट के भाषण में नेटो का ज़िक्र नहीं, पहले कर चुके हैं गठबंधन से निकलने की बात
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इमेज कैप्शन, ट्रंप ने ईरान में 'बड़ा हमला' करने और उसे 'पाषाण युग में पहुंचाने' की धमकी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने
ईरान युद्ध के मुद्दे पर बुधवार को क़रीब 19 मिनट का संबोधन दिया. इस दौरान
उन्होंने ईरान को धमकी देने समेत कई बातें कहीं.
लेकिन इस भाषण में एक बड़ी बात नेटो
का ज़िक्र न होना था. नेटो इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि बुधवार को ट्रंप ने 'द टेलीग्राफ़' को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि वह अमेरिका को इस गठबंधन से बाहर
निकालने पर विचार कर रहे हैं.
उन्होंने 'द टेलीग्राफ़' से कहा
कि यह गठबंधन एक 'काग़ज़ी शेर' है. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह मध्य-पूर्व संघर्ष के बाद अमेरिका की
सदस्यता पर दोबारा विचार करेंगे, तो
उन्होंने कहा, "हाँ, मैं कहूंगा कि यह पुनर्विचार से भी आगे की बात है."
ट्रंप के इस इंटरव्यू के बाद ख़बर आई
कि नेटो के महासचिव मार्क रुटे अगले हफ़्ते वॉशिंगटन डीसी का दौरा करेंगे.
बीबीसी से व्हाइट हाउस के एक अधिकारी
ने पुष्टि की कि अपने दौरे के दौरान रुटे व्हाइट हाउस जाएंगे. हालांकि समय को लेकर
कोई जानकारी नहीं दी गई है.
वहीं, नेटो के एक प्रवक्ता ने रॉयटर्स को बताया कि यह "पहले से तय
दौरा" है.
नमस्कार!
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मध्य-पूर्व संघर्ष में मरने वालों की संख्या पाँच हज़ार के पार होने का दावा, किस देश में कितनी मौतें?
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इमेज कैप्शन, दक्षिणी लेबनान के एक गाँव में हुए इसराइली हवाई हमले के बाद बचावकर्मी लोगों की तलाश करते हुए (2 अप्रैल 2026 की तस्वीर)
अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच जारी
युद्ध में मरने वालों की संख्या पाँच हज़ार से ज़्यादा हो गई है.
यह जानकारी
अलग-अलग एजेंसियों के ताज़ा आँकड़ों के आधार पर दी गई है, जिसे रॉयटर्स ने रिपोर्ट किया है.
बीबीसी इन आँकड़ों की स्वतंत्र रूप
से पुष्टि नहीं कर पाया है.
ईरान: 3,519 मौतें
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन
एचआरएएनए के अनुसार, ईरान में मारे गए लोगों में 1,598 आम
नागरिक हैं, जिनमें कम से कम 244 बच्चे शामिल
हैं.
रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट ने
शुक्रवार को कहा कि अब तक अमेरिकी-इसराइली हमलों में ईरान में कम से कम 1,900
लोगों की मौत हुई है और 20,000 लोग घायल हुए हैं. हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन
आँकड़ों में चार मार्च को श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले में
मारे गए कम से कम 104 लोग शामिल हैं या नहीं.
लेबनान: 1,318 मौतें
लेबनानी अधिकारियों के अनुसार,
मरने वालों में 124 बच्चे शामिल हैं. इसराइल ने 2
मार्च को लेबनान पर हमले शुरू किए थे और तब से हिज़्बुल्लाह के 400 से अधिक लड़ाके
मारे जा चुके हैं.
अलग-अलग घटनाओं में कम से कम नौ
लेबनानी सैनिक मारे गए हैं और यूएन पीस कीपिंग फ़ोर्स के तीन सैनिकों की भी मौत
हुई है. ये तीनों सैनिक इंडोनेशिया के थे.
इराक़: कम से कम 107 मौतें
इराक़ के स्वास्थ्य अधिकारियों के
अनुसार, मरने वालों में आम नागरिक, ईरान समर्थित शिया पॉपुलर मोबिलाइज़ेशन फ़ोर्स के
सदस्य, अमेरिका समर्थित कुर्द पेशमर्गा
लड़ाके, पुलिस और सेना के जवान शामिल हैं.
इसके अलावा एक विदेशी क्रू सदस्य की
भी मौत हुई, जो इराक़ी बंदरगाह के पास टैंकरों पर
हुए हमले में मारे गए. साथ ही 'काउंटर
टेररिज़्म ट्रेनिंग' दे रहे एक फ़्रांसीसी सैनिक की भी
ड्रोन हमले में मौत हुई है.
इसराइल: 19 मौतें
इसराइल की एंबुलेंस सेवा के अनुसार,
ईरान और लेबनान से दागी गई मिसाइलों से 19 लोगों
की मौत हुई है. इसराइली सेना का कहना है कि दक्षिणी लेबनान में उसके 10 सैनिक भी
मारे गए. इसके अलावा, 22 मार्च को सीमा के पास एक इसराइली
किसान की भी मौत हुई, जब इसराइली सैनिकों से ग़लती से गोली
चल गई.
अमेरिका: 13 मौतें
अमेरिकी सेना के अनुसार, इराक़ में एक सैन्य रिफ़्यूलिंग विमान के
दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद छह सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है. वहीं ईरान में
ऑपरेशन के दौरान सात अन्य सैनिक मारे गए.
क्षेत्र के अन्य हिस्सों में मौतें
संयुक्त अरब अमीरात (11), क़तर (7), कुवैत (7), वेस्ट बैंक (4), सीरिया (4), बहरीन (2), ओमान (2) और सऊदी अरब (2) में भी
मौतें दर्ज की गई हैं.
अमेरिकी रक्षा मंत्री के 'पाषाण युग' वाले पोस्ट पर ईरानी दूतावास ने दिया ऐसा जवाब
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इमेज कैप्शन, पीट हेगसेथ ने ट्रंप की टिप्पणी को दोहराते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को
अपने संबोधन में धमकी देते हुए कहा कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर 'बड़ा हमला' करेगा और उसे 'पाषाण
युग में पहुंचा देगा'.
इसके बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट
हेगसेथ ने एक्स पर पोस्ट किया, "वापस
पाषाण युग में."
हेगसेथ के ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर
करते हुए भारत में मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट ने प्रतिक्रिया दी है.
ईरानी कॉन्सुलेट जनरल ने लिखा,
"पहले उन्होंने कहा कि ईरान को 'फिर से महान' बनाना है. अब अचानक उनका लक्ष्य 'पाषाण युग' हो गया है?"
"मज़ेदार बात ये है कि जिन सभ्यताओं
की जड़ें एकेमेनिड एम्पायर जैसी प्राचीन सभ्यताओं तक जाती हैं, वे 'फिर से' नहीं आतीं. वे बस होती
हैं."
'हमारी नेवी होर्मुज़ से भारतीय टैंकरों को सुरक्षित निकाल रही है': राजनाथ सिंह
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इमेज कैप्शन, राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि 'देश में पेट्रोल, डीज़ल और गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं' है (फ़ाइल फ़ोटो)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार
को कहा कि 'भारतीय नौसेना होर्मुज़ स्ट्रेट से
भारतीय जहाज़ों को सुरक्षित निकाल रही' है.
केरल के तिरुवनंतपुरम में 'सैनिक सम्मान सम्मेलन' को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने यह बात कही. उन्होंने यह भी कहा
कि 'देश में पेट्रोल, डीज़ल और गैस सिलेंडर की कोई कमी नहीं' है.
राजनाथ सिंह ने कहा, "कुछ लोग पश्चिम एशिया के संघर्ष के कारण कई तरह
झूठ फैलाकर पैनिक फैलाना चाहते हैं. न तो देश में पेट्रोल-डीज़ल की कमी है,
न तो कुकिंग गैस सिलेंडर की कमी है और भारत किसी
भी ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है."
उन्होंने कहा, "हमारी नेवी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से भारतीय
टैंकरों को सुरक्षित तरीक़े से निकाल रही है. हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी रोज़
अपने डिप्लोमैटिक स्किल्स का प्रयोग करते हुए भारतीयों के हितों की रक्षा कर रहे
हैं."
ट्रंप के ईरान को 'पाषाण युग में पहुंचाने' की धमकी पर अमेरिकी सांसदों की कैसी प्रतिक्रिया
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इमेज कैप्शन, रिपब्लिकन नेताओं ने ट्रंप के भाषण की तारीफ़ की है, जबकि डेमोक्रेट्स ने कड़ी आलोचना की (फ़ाइल फ़ोटो)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने
धमकी दी है कि अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर 'बड़ा हमला' करेगा और उसे 'पाषाण युग' में पहुंचा देगा.
इस धमकी पर अमेरिका के कुछ सांसदों
ने ट्रंप की कड़ी आलोचना की, जबकि कुछ
नेताओं ने इसका समर्थन किया.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने
एक्स पर लिखा, "वापस पाषाण युग में."
वहीं, एरिज़ोना से डेमोक्रेट सांसद यासमिन अंसारी ने कहा, "वह 9 करोड़ की आबादी वाले देश की बात कर रहे हैं.
यह घिनौना, भयावह और बुरा है."
मैरीलैंड के सीनेटर क्रिस वैन होलेन
ने भी भाषण की आलोचना की. इसके साथ ही उन्होंने ट्रंप को 'अमेरिका और दुनिया के लिए ख़तरा' बताया.
डेमोक्रेट नेता वैन होलेन ने कहा,
"ट्रंप ने हमेशा की तरह हमसे झूठ
बोला. दो हफ़्ते पहले उन्होंने कहा था 'हम जीत
गए.' अगर ऐसा है, तो हम अब भी वहां क्यों हैं? आगे क्या
होगा? हम ट्रंप से सिर्फ़ अधिक झूठ की ही
उम्मीद कर सकते हैं."
उन्होंने कहा, "भ्रम में रहने वाला यह आदमी हमारे देश और दुनिया
के लिए ख़तरा है."
वहीं लुइज़ियाना से रिपब्लिकन सांसद
स्टीव स्कैलीज़ ने भाषण की तारीफ की.
स्कैलीज़ ने कहा, "आज रात राष्ट्रपति ट्रंप ने ऑपरेशन
एपिक फ़्यूरी के लिए देश के सामने बेहद ठोस तर्क रखा. ईरानी शासन का आतंक और
अमेरिकियों की हत्या का लंबा इतिहास दिखाता है कि उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने
से रोकना क्यों ज़रूरी था."
ईरान में और क्या हासिल करना है यह 'स्पष्ट नहीं': ऑस्ट्रेलियाई पीएम
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इमेज कैप्शन, ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने नेशनल प्रेस क्लब में अपना संबोधन दिया
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी
अल्बनीज़ ने कहा है कि उनका देश "ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से
रोकने" के लक्ष्य का समर्थन करता है.
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब यह
स्पष्ट नहीं है कि इस युद्ध में "आगे और क्या हासिल करना है या इसका अंतिम
लक्ष्य क्या है".
उनकी यह टिप्पणी नेशनल प्रेस क्लब
में दिए गए संबोधन के दौरान आई, जो
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषण के साथ ही हो रहा था.
अल्बनीज़ से ख़ास तौर पर उस समयसीमा
को लेकर भी सवाल किया गया, जो ट्रंप
ने संघर्ष ख़त्म करने के लिए बताई है. इस पर उन्होंने कहा कि युद्ध की
"शुरुआत से पहले ऑस्ट्रेलिया से कोई सलाह नहीं ली गई थी".
उन्होंने कहा, "मैंने बहुत स्पष्ट रूप से कहा है कि हम तनाव कम
होते देखना चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि यह कैसे ख़त्म होगा, इस पर ज़्यादा स्पष्टता हो".
अल्बनीज़ की यह टिप्पणी क़रीब 24
घंटे पहले दिए गए उनके एक छोटे संबोधन के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों को चेतावनी दी थी कि "आने
वाले महीने आसान नहीं हो सकते".
उन्होंने कहा, "ऑस्ट्रेलिया इस युद्ध में सक्रिय भागीदार नहीं
है. लेकिन इसके कारण सभी ऑस्ट्रेलियाई लोगों को बढ़ती क़ीमतों का सामना करना पड़
रहा है".
ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिकी लोगों के लिए लिखा पत्र, युद्धविराम का ज़िक्र नहीं
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इमेज कैप्शन, ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके देश ने 'कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया' (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान के राष्ट्रपति मसूद
पेज़ेश्कियान ने 'अमेरिकी लोगों' को संबोधित करते हुए एक पत्र लिखा है. इस पत्र को
उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया.
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने पत्र में
कहा कि ईरान ने "कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया". उन्होंने कहा कि उनका देश
लंबे समय से "क़ब्ज़े और हमले" का सामना कर रहा है.
यह पत्र उस दावे के कुछ घंटों बाद
सामने आया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने
कहा था कि "ईरान के नए शासन के राष्ट्रपति" ने अमेरिका से युद्धविराम की
मांग की है. हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह
किसकी बात कर रहे थे.
सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका युद्धविराम पर तभी विचार करेगा "जब होर्मुज़ स्ट्रेल
खुला, स्वतंत्र और सुरक्षित होगा. तब तक हम
ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे या जैसा कहा जाता है, उसे वापस पाषाण युग में भेज देंगे!!!"
लेकिन पेज़ेश्कियान ने अपने पत्र में
युद्धविराम का कोई ज़िक्र नहीं किया.
उन्होंने लिखा कि ईरानी लोगों की
अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के
प्रति कोई दुर्भावना नहीं है. अंत में उन्होंने कहा कि "टकराव और संवाद"
के बीच लिया गया फ़ैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा.
ईरान युद्ध से जुड़े ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों की कैसी प्रतिक्रिया
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इमेज कैप्शन, सीनेटर चक शूमर ने ट्रंप के भाषण की कड़ी आलोचना की है (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरान युद्ध को लेकर राष्ट्रपति
डोनाल्ड ट्रंप के भाषण पर अमेरिकी सांसदों ने भी प्रतिक्रिया दी है.
सांसद चक शूमर, जो कि न्यूयॉर्क से डेमोक्रेट नेता हैं, उन्होंने भाषण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा,
"डोनाल्ड ट्रंप के ईरान से जुड़े
फ़ैसले हमारे देश के इतिहास की सबसे बड़ी नीतिगत ग़लतियों में गिने जाएंगे."
उनका कहना है कि ट्रंप "अपने
उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से बताने में नाकामयाब रहे, वह सहयोगियों को दूर कर रहे हैं और अमेरिकी लोगों की रोज़मर्रा की
समस्याओं को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं."
वहीं रिपब्लिकन नेता और साउथ
कैरोलीना से सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप के भाषण पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी.
उन्होंने फॉक्स न्यूज़ से कहा कि ईरान के पास समझौता करने या और बमबारी का सामना
करने का विकल्प है.
ग्राहम ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसे लक्ष्यों की रूपरेखा दी
है जो समय के साथ इस शासन के टिके रहने की क्षमता को ख़त्म कर देंगे."
यह
बयान ट्रंप की उस चेतावनी के संदर्भ में है जिसमें उन्होंने ईरान के इलेक्ट्रिक
ग्रिड पर हमले की बात कही थी.
उन्होंने कहा, "अगर आप यह समझौता नहीं करते हैं, तो हम उन सभी चीज़ों को नष्ट कर देंगे जिनकी आपको
ज़रूरत होगी. यह इस अभियान का निर्णायक क्षण था."
ईरानी दूतावास ने क्यों कहा, 'भारतीय सुरक्षित हाथों में हैं'
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इमेज कैप्शन, ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज़ स्ट्रेट लगभग बंद है (फ़ाइल फ़ोटो)
ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास
अराग़ची ने बुधवार को कहा कि 'होर्मुज़
स्ट्रेट के भविष्य का फ़ैसला सिर्फ़ ईरान और ओमान तय करेंगे'.
उनके इस बयान को दुनिया के विभिन्न
देशों में स्थित ईरानी दूतावासों ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर किया है.
भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने भी
इसे साझा किया है और अपने एक अन्य पोस्ट में कहा, "हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं है."
होर्मुज़ को लेकर ईरान और अमेरिका
आमने-सामने हैं. ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से इस रास्ते से भारत, पाकिस्तान और चीन जैसे कुछ चुनिंदा देशों के
जहाज़ों को ही गुजरने की अनुमति दी है.
इस संकरे समुद्री मार्ग के बंद होने
से दुनियाभर में तेल की क़ीमतें बढ़ गई हैं. दुनियाभर का 20 फ़ीसदी ऊर्जा
व्यापार इसी रास्ते से होता है.
ट्रंप के संबोधन के बाद अमेरिकी शेयर बाज़ार के वायदा कारोबार में गिरावट
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इमेज कैप्शन, डाउ जोंस और एस एंड पी 500 फ़्यूचर्स क़रीब 0.7% नीचे हैं (सांकेतिक तस्वीर)
ईरान युद्ध को लेकर अमेरिकी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन का बाज़ारों पर नकारात्मक असर हुआ है.
एक ओर वैश्विक क्रूड की क़ीमतों
में बढ़ोतरी हो रही है, दूसरी ओर अमेरिकी शेयर बाज़ार के
वायदा कारोबार (फ़्यूचर्स) में गिरावट आई है.
डाउ जोंस और एस एंड पी 500 फ़्यूचर्स
क़रीब 0.7% नीचे हैं, जबकि नैस्डैक फ़्यूचर्स लगभग 1% गिरा
है.
शेयर बाज़ार में फ़्यूचर्स ऐसे
कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जो निवेशकों को भविष्य की किसी तारीख़ पर तय क़ीमत पर शेयर
ख़रीदने या बेचने की अनुमति देते हैं.
यह एक तरह का दांव होता है, जिसमें यह पता चलता है कि निवेशक बाज़ार की दिशा
को किस ओर जाते हुए देखते हैं. ये भी माना जाता है कि फ्यूचर्स मार्केट शेयर बाज़ार की दिशा बताता है..