जी-7 की बैठक के लिए इटली में एकजुट हुए दुनिया के नेता, मोदी भी हुए रवाना

जी-7 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध, ग़ज़ा-इसराइल युद्ध, जलवायु परिवर्तन, प्रवासी मुद्दे, तकनीक और अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी है.

सारांश

  • नीट-यूजी में ग्रेस मार्क्स दिए गए 1,563 छात्रों के लिए दोबारा होगी परीक्षा. एनटीए ने नोटिफ़िकेशन जारी कर बताया 23 जून को होंगे एग्ज़ाम.
  • पीएम नरेंद्र मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में शामिल होने इटली रवाना हुए. तीसरी बार पीएम पद की शपथ लेने के बाद मोदी का यह पहला विदेश दौरा है.
  • अजीत डोभाल को एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त कर दिया गया है.
  • चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में जम्मू और कश्मीर पर की गई टिप्पणी पर भारत के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
  • पेमा खांडू ने लगातार तीसरी बार अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. चोओना मीन ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.

लाइव कवरेज

दीपक मंडल

  1. ट्रंप ने कहा, 'मेरे पास चॉइस होती तो ईरान का तेल ले लेता और ख़ूब पैसे कमाता'

    ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के सवालों का भी जवाब दिया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपनी धमकी दोहराई है कि अगर वो सरेंडर नहीं करता है तो अमेरिका उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करता रहेगा.

    ट्रंप सोमवार को बच्चों के लिए सालाना व्हाइट हाउस के ईस्टर कार्यक्रम में पत्रकारों से बात कर रहे थे.

    ट्रंप ने कहा, "अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके पास कोई पुल नहीं होगा. उनके पास कोई पावर प्लांट नहीं होगा. उनके पास कुछ भी नहीं होगा."

    हालांकि ट्रंप ने आगे कहा कि वह "आगे नहीं बढ़ेंगे.”

    ट्रंप ने कहा, "अगर मेरे पास चॉइस होती कि मैं क्या करना पसंद करता तो मैं तेल ले लेता. क्योंकि यह लेने के लायक है. वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते."

    "बदकिस्मती से अमेरिकी लोग हमें घर लौटते देखना चाहेंगे. अगर यह मेरे ऊपर होता तो मैं तेल ले लेता, मैं तेल रखता. खूब पैसा कमाता और मैं ईरान के लोगों का भी ख्याल रखता."

  2. 'उम्रक़ैद भी काफ़ी नहीं': तमिलनाडु में 9 पुलिसकर्मियों को दोहरी फांसी की सज़ा

  3. ईरान को लेकर ट्रंप की भाषा पर ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री ने ये कहा

    ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री ब्रिजेट फिलिप्सन

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    इमेज कैप्शन, ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री ने कहा है कि अपनी भाषा के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को ख़ुद सफाई देनी है (फ़ाइल फ़ोटो)

    ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए होर्मुज़ स्ट्रेट तुरंत खोलने या फिर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी.

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अपशब्द इस्तेमाल करने के बाद कई ओर से उनका विरोध हो रहा है.

    ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री ब्रिजेट फिलिप्सन ने उनकी इस भाषा से अपनी सरकार को अलग कर लिया है.

    ब्रिजेट फिलिप्सन ने कहा, "हम अक्सर राष्ट्रपति ट्रंप को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हुए देखते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप को ही इसकी सफाई देनी है कि उन्होंने किस तरह की भाषा चुनी है."

    "यह ऐसी भाषा या बातचीत का तरीका नहीं है जिसे हमारी सरकार अपनाएगी."

    उन्होंने यह भी दोहराया कि मौजूदा युद्ध में ब्रिटेन की स्थिति केवल रक्षात्मक कार्रवाई में हिस्सा लेने की है.

    ट्रंप के पोस्ट के बाद अमेरिका में न्यूयॉर्क के डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद चक शुमर ने तीखी टिप्पणी दी थी.

    वहीं थाईलैंड में ईरान के दूतावास ने ट्रंप के पोस्ट के बाद लिखा, "अमेरिकी राष्ट्रपति जिस तरह से किशोरों की तरह गालियाँ देते हैं, उसे देखकर ऐसा लगता है कि अमेरिका उम्मीद से कहीं पहले ही पाषाण युग में पहुँच गया है."

  4. ईरान के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर ट्रंप ने पत्रकारों से क्या कहा?

    ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बच्चों के लिए सालाना व्हाइट हाउस के ईस्टर कार्यक्रम में बोलते हुए

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करने के पीछे वजह बताई है.

    ट्रंप ने रविवार को ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ईरान के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए होर्मुज़ स्ट्रेट तुरंत खोलने या फिर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी.

    डोनाल्ड ट्रंप के अपशब्द इस्तेमाल करने के बाद कई नेताओं ने उनका विरोध किया है.

    सोमवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने होर्मुज़ पर अपनी बात रखने के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया.

    पत्रकारों ने ट्रंप से पूछा कि उन्होंने रविवार को अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में "इतनी गंदी भाषा" का इस्तेमाल क्यों किया.

    ट्रंप ने जवाब दिया, "सिर्फ अपनी बात रखने के लिए. मुझे लगता है कि आपने यह पहले भी सुना होगा."

  5. इसराइल ने किया ईरान के अहम पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमला, बड़े नुक़सान का दावा

    साउथ पार्स गैस फ़ील्ड

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    इमेज कैप्शन, साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर मार्च महीने में भी हमला हुआ था, यह तस्वीर उसी समय की है

    इसराइल ने कहा है कि उसने ईरान के एक अहम पेट्रोकेमिकल प्लांट पर हमला किया है.

    इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने एक बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने ईरान में एक पेट्रोकेमिकल फ़ैसिलिटी पर हमला किया है.

    उन्होंने कहा कि आईडीएफ़ को निर्देश दिया गया है कि वह ईरान के इंफ़्रास्ट्रक्चर पर 'पूरी ताक़त से' हमले जारी रखे.

    उन्होंने कहा, "आईडीएफ़ ने अब ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल फ़ैसिलिटी पर ज़ोरदार हमला किया है, जो असालुयेह में स्थित है. यह फ़ैसिलिटी देश के लगभग आधे पेट्रोकेमिकल्स का उत्पादन करती थी.''

    कात्ज़ ने बताया कि यह नया हमला 'पिछले हफ़्ते' एक अन्य फ़ैसिलिटी पर हुए हमले के बाद हुआ है.

    बयान में कहा गया है, "अब ये दोनों फ़ैसिलिटीज़, जिनसे ईरान क़रीब 85% पेट्रोकेमिकल निर्यात करता था, वो अब काम नहीं कर रही हैं."

    उन्होंने कहा, "यह ईरानी शासन के लिए अरबों डॉलर का एक बड़ा आर्थिक झटका है. पेट्रोकेमिकल उद्योग, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की गतिविधियों को फ़ंड देने और ईरान की सैन्य ताक़त को बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभाता है."

    तेहरान हमला

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    इमेज कैप्शन, ईरान पर इसराइल के हमले लगातार जारी हैं. यह तस्वीर एक अप्रैल को तेहरान पर हुए हमले की है

    ईरान की मीडिया ने क्या बताया

    ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने भी पुष्टि की है कि देश में दो पेट्रोकेमिकल कंपनियों पर हमला किया गया है.

    ईरान का साउथ पार्स गैस फ़ील्ड दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस फ़ील्ड में आता है.

    ईरान की कई न्यूज़ एजेंसियों ने ​​रिपोर्ट दी है कि मर्वदश्त पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को 'दुश्मन के हमले' में निशाना बनाया गया है.

    फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी का कहना है कि इस हमले की वजह से आग लग गई थी, जिसे 'शुरुआती कुछ ही मिनटों में बुझा दिया गया.'

    मर्वदश्त के गवर्नर के कार्यालय का हवाला देते हुए, न्यूज़ एजेंसी तस्नीम ने आगे बताया कि हमले से औद्योगिक इकाई को 'कोई ख़ास नुक़सान नहीं पहुँचा है.'

  6. 'मरने के बाद दो ग़ज़ ज़मीन मिल जाए': मीर जाफ़र के वंशजों का नाम वोटर लिस्ट से कटा

  7. भारत में ईरान के राजदूत ने मध्य पूर्व संकट और ब्रिक्स को लेकर क्या कहा?

    मोहम्मद फथाली

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    इमेज कैप्शन, भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फ़थाली ने कई अहम मुद्दों पर राय रखी है

    भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फ़थाली ने सोमवार को कहा कि ईरान की प्राथमिकता दुश्मन के आक्रमण और उनके क़दम से देश की रक्षा करना है.

    समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक लिखित इंटरव्यू में फ़थाली से मौजूदा संघर्ष को लेकर अमेरिका से बातचीत पर ईरान के रुख़ के बारे में पूछा गया.

    उन्होंने कहा, "हम 38 दिनों से हमलावरों से अपनी रक्षा कर रहे हैं और पूरी ताक़त के साथ ऐसा करते रहेंगे. हमारा मुख्य ध्यान अमेरिकी और ज़ायोनी हमलावरों के हमलों का उचित जवाब देने पर है."

    उन्होंने कहा, "किसी भी तरह की बातचीत में शामिल होने का फ़ैसला व्यापक नीतियों के दायरे में और फ़ैसले लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं की राय से होते हैं. जब भी यह तय होगा कि कूटनीति के ज़रिए ईरानी लोगों के हितों को सुरक्षित किया जा सकता है, तो ज़रूरी क़दम उठाए जाएँगे."

    उन्होंने आगे कहा, "इस बात पर भी ज़ोर दिया जाना चाहिए कि लड़ाई, संघर्षविराम, बातचीत और फिर से जंग के दोषपूर्ण सिलसिले से जुड़ा हमारा अनुभव बहुत ही बुरा रहा है. हमारे अधिकारी पूरी समझदारी से यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहे हैं कि यह दोहराया न जाए."

    ईरानी राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय तंत्र के रूप में ब्रिक्स के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि ईरान के लिए यह उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ सहयोग बढ़ाने और पारंपरिक वैश्विक ढाँचों से स्वतंत्र दृष्टिकोणों को मज़बूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है.

    उन्होंने कहा, "ईरान का मानना ​​है कि ब्रिक्स अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों का समर्थन करने, एकतरफ़ा वर्चस्व का मुक़ाबला करने और तनाव कम करने में एक प्रभावी भूमिका निभा सकता है."

    उनकी यह टिप्पणी पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के बीच आई है, क्योंकि अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच संघर्ष अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है.

    इस संघर्ष में क्षेत्र के नागरिक, ऊर्जा और सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमले लगातार जारी हैं.

  8. इसराइली सेना ने हिज़्बुल्लाह नेता की जगह किसी दूसरे शख़्स को मार डाला, डेनियल डि सिमोन, बीबीसी न्यूज़ यरूशलम

    पियरे मुआवाड

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    इमेज कैप्शन, इसराइल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के एक नेता को मारने के लिए हमला किया था, लेकिन हिज़्बुल्लाह के विरोधी एक बड़े नेता (तस्वीर में) को मार डाला (फ़ाइल फ़ोटो)

    लेबनान में हिज़्बुल्लाह के एक नेता को मारने की कोशिश में इसराइल ने ग़लती से एक दूसरे शख़्स को मार डाला है.

    रविवार को हुई इस घटना में इसराइल ने जिस शख़्स को मारा है वह ऐसे राजनीतिक समूह के वरिष्ठ नेता थे जो हिज़्बुल्लाह का बड़ा विरोधी है.

    आईडीएफ़ ने बीबीसी के संपर्क करने पर माना कि वह अपने लक्ष्य को मारने में नाकाम रहा और उन्हें नागरिकों को हुए "नुक़सान का दुख है."

    लेबनीज़ फोर्सेज पार्टी, जो ज़्यादातर ईसाइयों का एक समूह है, उसका कहना है कि एक अपार्टमेंट ब्लॉक पर हुए इस हमले में उनके वरिष्ठ अधिकारी पियरे मुआवाड और उनकी पत्नी फ्लाविया की मौत हो गई.

    यह अपार्टमेंट ब्लॉक ऐन सादेह में था, जो बेरूत के पूर्व में स्थित एक ईसाई-बहुल कस्बा है.

    लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस हमले में एक पुरुष और दो महिलाओं की मौत हुई है.

    स्थानीय मेयर का कहना है कि जिन लोगों की मौत हुई, वे उस अपार्टमेंट से ठीक एक मंज़िल नीचे रह रहे थे, जिसे निशाना बनाया गया था.

    आईडीएफ़ का कहना है कि "इस हमले के नतीजे में कई ऐसे लोग भी घायल हुए हैं जिनका इससे कोई लेना-देना नहीं था, और इन रिपोर्टों की समीक्षा की जा रही है."

    लेबनीज़ फोर्सेज पार्टी का कहना है कि पियरे मुआवाड "न तो कोई लड़ाके थे और न ही कोई सैन्य लक्ष्य. इस जानलेवा हमले से ठीक पहले उन्होंने अपने परिवार के साथ घर पर ही ईस्टर का त्योहार मनाया था."

    पार्टी ने हिज़्बुल्लाह की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह घटना इस बात का नतीजा है कि सैन्य टकरावों को अब रिहायशी इलाक़ों तक खींचकर लाया जा रहा है.

  9. अमेरिका का वो रेस्क्यू मिशन जो ईरान में बुरी तरह नाकाम रहा था

  10. इसराइल के हाइफ़ा में चार लोगों की मौत के बाद नेतन्याहू ने की ये गुज़ारिश

    बिन्यामिन नेतन्याहू

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    इमेज कैप्शन, बिन्यामिन नेतन्याहू ने हाइफ़ा में चार लोगों की मौत के बाद एक वीडियो संदेश जारी किया है

    इसराइल के हाइफ़ा में रविवार रात एक ईरानी मिसाइल आकर गिरी थी. इस हमले में चार लोगों की मौत हुई है. बीबीसी की टीम ने सोमवार को हमले की ज़द में आई इमारत से चार बॉडी बैग निकलते हुए भी देखा.

    इस हमले पर इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने प्रतिक्रिया दी है.

    उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, “मैंने अभी-अभी हाइफ़ा के मेयर योना याहाव से बात की और हाइफ़ा में चार लोगों की मौत की दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया.”

    ''बातचीत में एक महत्वपूर्ण बात जो फिर से सामने आई, वह एक सीधा-सा सिद्धांत है- एक अटल सिद्धांत, वह यह है कि जो कोई भी होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करता है और किसी सुरक्षित स्थान पर चला जाता है, उसके घायल होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है.''

    उन्होंने कहा, ''मैं जानता हूँ कि यह आपके लिए कितना मुश्किल है. मैं आपसे यह कहता हूँ कि हम जिस भी तरह से संभव होगा, आपकी मदद करेंगे. मैं आपसे यह अनुरोध करता हूँ कि आप होम फ्रंट कमांड के निर्देशों का पालन करें.''

  11. दिल्ली विधानसभा परिसर में किस तरह की सुरक्षा चूक का मामला सामने आया है?

  12. ईरान युद्ध: भारत ने बताया दो दिनों में कितने भारतीय जहाज़ों ने होर्मुज़ स्ट्रेट को पार किया

    मुकेश मंगल

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    इमेज कैप्शन, मिनिस्ट्री ऑफ़ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज़ के एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाज़ों के बारे में जानकारी दी

    भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ़ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वाटरवेज़ के एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाज़ों और नाविकों के बारे में ताज़ा जानकारी दी है.

    सोमवार को एक प्रेस कॉनफ़्रेंस में मुकेश मंगल ने बताया, “इस क्षेत्र में सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं. पिछले चौबीस घंटे में भारतीय झंडे वाले किसी जहाज़ से जुड़ी कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है.”

    उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो दिनों में भारतीय झंडे के साथ दो जहाज़ ‘ग्रीन सांग्वी’ और ‘ग्रीन आशा’ एलपीजी लेकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पार कर चुके हैं.

    प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बताया गया है कि ग्रीन सांग्वी पर क़रीब 46.5 हज़ार मेट्रिक टन एलपीजी कार्गो और 25 भारतीय नाविक हैं, जबकि ग्रीन आशा पर 15.5 हज़ार टन एलपीजी कार्गो और 26 नाविक हैं.

    अभी पश्चिमी फ़ारस खाड़ी क्षेत्र में भारतीय झंडे के साथ 16 जहाज़ मौजूद हैं, जिन पर 433 भारतीय नाविक हैं.

    डीजी शिपिंग ने अब तक समुद्री जहाज़ों पर काम करने वाले क़रीब 1600 लोगों की वापसी कराई है.

    28 फ़रवरी को इसराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए थे, उसके बाद से इस क्षेत्र में संघर्ष लगातार जारी है.

    ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के अहम समुद्री मार्ग होर्मुज़ स्ट्रेट की नाकेबंदी कर रखी है और इलाक़े में समुद्री जहाज़ भी हमले का निशाना बने हैं.

    ईरान युद्ध के बाद से दुनिया के कई देशों में तेल और गैस की कमी हो गई है और इनकी कीमतों में उछाल भी आया है.

  13. कांग्रेस से निकले हिमंत बीजेपी में इतने अहम कैसे बने?

  14. इसराइल के हाइफ़ा में ईरानी हमले में चार लोगों की मौत, लुसी विलियम्सन, हाइफ़ा से बीबीसी की मध्य पूर्व संवाददाता

    हाइफ़ा की इमारत का मलबा

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    इमेज कैप्शन, रविवार को हाइफ़ा की इस इमारत पर ईरानी मिसाइल गिरी थी

    बीबीसी ने इसराइल के हाइफ़ा में मलबे से चार बॉडी बैग बाहर निकलते देखे हैं. ये उस इमारत के रहने वाले लोग थे जिस पर रविवार रात एक ईरानी मिसाइल गिरी थी.

    सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि विस्फोटक गिरने के बाद फटा नहीं था और जब बचाव दल के लोग वहाँ पहुँचे, तब भी वह फटा नहीं था, जिससे तलाशी का काम और मुश्किल हो गया.

    ख़बरों के मुताबिक़, तलाशी दलों को अंदर फँसे चार लोगों तक पहुँचने के लिए पास की एक इमारत की कंक्रीट में सुरंग बनानी पड़ी.

    हमले वाली जगह के ठीक सामने वाली इमारत में रहने वाले मोर बारेल ने कहा, “इसराइल की कई-स्तरीय हवाई सुरक्षा होने के बावजूद, ईरानी हमलों के ख़तरे के साथ जीना हर रोज़ "रशियन रूलेट" खेलने जैसा लगता है.”

    सर्वेक्षणों से पता चलता है कि पाँच हफ़्तों से ज़्यादा समय तक चले इस संघर्ष के बाद, इस युद्ध के लिए यहूदी इसराइलियों का ज़बरदस्त समर्थन अब कम होने लगा है.

    इसराइल ने अपनी जीत को ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल साइटों और उसके नेतृत्व पर हमला करने में मिली सफलता के रूप में पेश किया है.

  15. आईआरजीसी की ख़ुफ़िया विंग के प्रमुख माजिद ख़ादेमी कौन थे?

  16. ईरान के विदेश मंत्रालय ने युद्धविराम को लेकर जारी चर्चाओं पर अब क्या कहा

    इस्माइल बग़ाई

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    इमेज कैप्शन, इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि हमले की धमकी और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती (फ़ाइल फ़ोटो)

    युद्धविराम की चर्चाओं के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने प्रतिक्रिया दी है.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने कहा है कि 'युद्धविराम का मतलब है कि विरोधियों को नए अपराध के लिए ताक़त जुटाने का मौक़ा देना और कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा.'

    बीबीसी फ़ारसी सेवा के मुताबिक़ बग़ाई ने अपनी साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में यह बात कही.

    उन्होंने कहा कि युद्धविराम और इस युद्ध को समाप्त करने के साथ ही ईरान की मांगों को पूरा किया जाना चाहिए.

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अमेरिका के साथ बातचीत के बारे में कहा, ''मध्यस्थों का आपस में विचारों का आदान-प्रदान करना कोई असामान्य बात नहीं है. ये मुद्दे शुरू से ही मध्यस्थों के माध्यम से उठाए गए थे और संदेशों का आदान-प्रदान करना स्वाभाविक है.''

    उन्होंने कहा, ''अल्टीमेटम और युद्ध अपराधों की धमकियों के साथ बातचीत संभव नहीं है. ऐसी स्थिति में जब हमारा दुश्मन अपने अपराधों की संख्या बढ़ा रहा है, तो सारी ख़ुफ़िया जानकारी और ध्यान देश की रक्षा पर केंद्रित होना चाहिए."

    इस्माइल बग़ाई ने कहा, "जब 15 सूत्रीय अमेरिकी योजना का प्रस्ताव भेजा गया था तो हमने कहा था कि ऐसे प्रस्ताव अत्यंत महत्वाकांक्षी, अनुचित और अतार्किक थे और हमें किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं थे."

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ज़ोर देते हुए कहा, "आप नियमित रूप से अलग-अलग अंतरालों पर किसी देश के बुनियादी ढांचे को नष्ट करने की धमकी देते हैं और नागरिक ठिकानों पर हमला करने की खुली छूट देते हैं. यह युद्ध अपराध का एक उदाहरण है."

  17. होर्मुज़ और स्वेज़ के अलावा दुनिया के अहम स्ट्रेट और नहरें कहां हैं?

  18. क़तर के विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत का ब्यौरा जारी किया

    अब्दुलरहमान अल-थानी और एस जयशंकर

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    इमेज कैप्शन, अब्दुलरहमान अल-थानी और एस जयशंकर के बीच क्षेत्र के कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई है (फ़ाइल फ़ोटो)

    क़तर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख़ मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी की भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से फ़ोन पर बात हुई है.

    क़तर के विदेश मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है कि अब्दुलरहमान बिन अल-थानी को भारत के विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर का फ़ोन आया.

    इस पोस्ट में कहा गया है, “इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने के घटनाक्रमों, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर इसके गंभीर नतीजों की समीक्षा की. साथ ही सभी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के तरीक़ों पर भी चर्चा की.”

    उन्होंने समुद्री जहाज़ों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया.

    क़तर के विदेश मंत्रालय ने बताया, “प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने क़तर और क्षेत्र के अन्य देशों पर ईरान के अनुचित हमलों को रोकने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने को लेकर आगाह किया.”

    इस तरह के निशानों में ख़ास तौर पर पानी, भोजन और ऊर्जा ठिकानों से संबंधित ढाँचे शामिल हैं.

    इस बातचीत में दोनों पक्षों को शांति वार्ता की मेज़ पर लौटने पर भी ज़ोर दिया गया.

  19. ईरान युद्ध: आईआरजीसी के इंटेलिजेंस चीफ़ अमेरिकी-इसराइली हमले में मारे गए

    माजिद ख़ादेमी

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    इमेज कैप्शन, माजिद ख़ादेमी की मौत सोमवार सुबह हुई (फ़ाइल फ़ोटो)

    इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के ख़ुफ़िया संगठन के प्रमुख माजिद ख़ादेमी अमेरिका और इसराइल के हमलों में मारे गए.

    आईआरजीसी ने ख़ुद ही एक बयान में इसकी पुष्टि की है, उसने कहा, "माजिद ख़ादेमी की मौत सोमवार सुबह, 6 अप्रैल को हुई."

    इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ और इसराइल डिफेंस फोर्सेज़ (आईडीएफ़) ने माजिद ख़ादेमी को मारने की ज़िम्मेदारी ली है.

    आईडीएफ़ ने टेलीग्राम पर लिखा है कि उनका मारा जाना आईआरजीसी के लिए "एक और बड़ा झटका" है.

    15 जून 2025 को एक इसराइली हमले में मोहम्मद काज़ेमी की हत्या के चार दिन बाद उनकी जगह ख़ादेमी को आईआरजीसी इंटेलिजेंस संगठन का कमांडर नियुक्त किया गया था.

    ईरान के साइबर स्पेस की "संप्रभुता की रक्षा" को ज़रूरी बताते हुए पिछले साल अगस्त में, ख़ादेमी ने संसद से एक घरेलू इंट्रानेट को पूरा करने को प्राथमिकता देने का आग्रह किया था.

  20. नमस्कार!

    अब तक बीबीसी संवाददाता रौनक भेड़ा आप तक ख़बरें पहुंचा रहे थे.

    अब से रात 10 बजे तक बीबीसी संवाददाता चंदन कुमार जजवाड़े आप तक अहम ख़बरें पहुंचाएंगे.

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