लंदन है दुनिया का सबसे महान शहर?

लंदन शहर
प्रकाशित

दुनिया का सबसे महान शहर कौन सा है? इस सवाल के जवाब में हर बड़े शहर के लोग अपने शहर को नंबर वन बताने लगेंगे. न्यूयॉर्क, पेरिस, बर्लिन, मॉस्को, दिल्ली, मुंबई, टोक्यो. फेहरिस्त इतनी लंबी है कि यहां उसे गिनना मुश्किल है.

मगर, ब्रिटेन की राजधानी लंदन को हमेशा से महान शहर का दर्जा हासिल था. एक वो दौर था कि लंदन उस ब्रिटिश साम्राज्य की राजधानी था जिस पर कभी सूर्यास्त नहीं होता था.

फिर दूसरे विश्व युद्ध में शहर को भारी नुक़सान हुआ. ब्रिटेन की दुनिया की सियासत में हैसियत घट गई. ब्रिटेन की हैसियत घटी तो लंदन की अहमियत भी कम हो गई.

लंदन शहर

मगर एक बार फिर अंग्रेज़ और लंदन में रहने वाले दूसरे लोग अपने शहर को सबसे महान महानगर बताने लगे हैं. इसकी बड़ी दिलचस्प वजह है.

ब्रिटेन में इन दिनों ऐसी किताबों की भरमार है जो किसी ख़ास दौर की कहानी बयां करती हैं. जैसे कि बिली ब्रायन ने सन 1927 के बारे में किताब लिखी.

उनसे पहले डेविड हेपवर्थ ने 1971 की कहानी बयां की. शायद एक दिन ऐसा भी आएगा जब बीसवीं सदी के हर साल की किताबों को मिलाकर एक मोटी किताब तैयार हो जाएगी.

लंदन के इतिहास में एक साल का ख़ास तौर से ज़िक्र होता है. ये साल है 1966. सबसे पहले शॉन लेवी ने 2003 में अपनी किताब 'रेडी स्टेडी गो' में इस साल की कहानी लिखी.

लंदन शहर

फिर जॉन सैवेज ने 2015 में 1966 के नाम से ही किताब लिख डाली. उनका दावा है कि ये वही साल है जब लंदन शहर अपनी बुलंदी पर था.

कुछ लोगों को अगर लंदन के 1966 में उरूज पर होने पर ऐतराज़ हो, तो ये साल 1971 भी हो सकता है. जब पंक रॉक का दौर था. या फिर नब्बे का दशक जब ब्रिट पॉप को ख़ूब पसंद किया जा रहा था.

लेकिन, ये सारे दावे ग़लत हैं. ऐसा नहीं है कि उसके बाद लंदन शहर का गौरव घटने लगा. आज भी लंदन बेहद दिलचस्प है. बल्कि पहले से ज़्यादा बेहतर शहर है.

भले ही बीसवीं सदी के साठ के दशक में लंदन आने वाले अमरीकी सैलानियों की भरमार थी. वो दौर बीटल्स, द रॉलिंग स्टोन्स, द किंग्स रोड, कर्नाबी स्ट्रीट का था.

लंदन शहर

वो दौर एड लिब जैसे नाइट क्लब का था. मगर साठ के दशक का वो लंदन शहर सबके लिए नहीं था. आपकी जेब में अगर पैसे नहीं थे, तो आप इनमें से किसी का मज़ा नहीं ले सकते थे.

लंदन के इतिहास पर नज़र डालें तो आज का दौर सबसे अच्छा कहा जा सकता है. आज ये शहर सबसे महान है. सबसे गतिमान है. सबसे अच्छा है. पहले से कहीं बेहतर है आज का लंदन शहर.

किसी और शहर से तुलना करने पर आपकी ख़ुशी काफ़ूर हो सकती है. मगर ज़रूरी है कि आज के लंदन की तुलना, दुनिया के बाक़ी बड़े शहरों से की जाए. तभी इसकी महानता का आपको एहसास होगा.

न्यूयॉर्क हो, मिलान हो या फिर पेरिस. लंदन के मुक़ाबले कोई और शहर नहीं ठहरता.

लंदन शहर

हां, यहां रहने का ठिकाना खोज पाना, अपना घर बना पाना, पहले के मुक़ाबले और मुश्किल हो गया है. मगर, लंदन के कारोबारी हालात बदलने का नतीजा ये हुआ है कि ये आज यूरोप का आर्थिक केंद्र बन गया है. आज ये यूरोप में आर्किेटेक्चर और कला का भी सबसे बड़ा केंद्र बन गया है.

आज लंदन में नई-नई ख़ूबसूरत इमारतें बन रही हैं. चीन के अलावा लंदन ही ऐसा शहर है जहां सबसे ज़्यादा नई इमारतें बनायी जा रही हैं. ये शहर की क्रिएटिविटी की मिसाल है.

पैसे और कला के मेल से यहां कई नई चीज़ें देखने को मिल रही हैं. नई आर्ट गैलरीज़ खुल रही हैं. दुनिया का सबसे अच्छा कला का मेला, 'फ्रीज़े' यहां लगता है.

आज से तीस साल पहले लंदन में अच्छा टिक्का मिलना मुश्किल था. रविवार की शाम को शहर के अच्छे होटलों में खाना खाना तो क़रीब-क़रीब असंभव सा था.

लंदन शहर

लेकिन आज लंदन में एक से एक बेहतरीन रेस्तरां हैं. न्यूयॉर्क और पेरिस के रेस्तरां जैसे भले न हो, लेकिन लंदन के ये रेस्तरां अच्छा खाना परोसते हैं.

इन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही स्टार दर्जे न मिलें, मगर ग्राहकों को संतुष्टि के मामले में ये दुनिया के किसी भी दूसरे शहर के रेस्तरां के मुक़ाबले आगे हैं.

यहां के स्थानीय प्रशासन ने भी कला और कारोबार के मेल को बढ़ावा देने की कोशिश में ज़ोर लगाया है.

लंदन के पूर्वी हिस्से में शोरडिच नाम का उपनगर बस गया है. वहीं स्टार्ट अप कंपनियों के लिए टेक सिटी भी बसाया गया है. ये उपनगर अचानक ही नहीं उग आए हैं. इनके पीछे एक सोच है, तरक़्क़ी की.

लंदन शहर

इसके लिए बुनियादी ढांचा विकसित किया गया है. पढ़ाई के केंद्र स्थापित किए गए हैं. सारा काम योजना बनाकर किया गया है.

लंदन की सूरत बदलने में साल 2000 का एक फ़ैसला बहुत अहम पड़ाव बन गया. तब लंदन के 33 प्रशासनिक इलाक़ों को मिलाकर एक जगह कर दिया गया.

उससे पहले लंदन 33 हिस्सों में बंटा हुआ था. हर इलाक़े का अपना मेयर होता था. यही हाल होता तो लंदन को 2012 के ओलंपिक की मेज़बानी न मिलती.

सोचिए, 33 मेयर मिलकर ओलंपिक की मेज़बानी का दावा करते! किसी भी मसले पर उनमें एक राय बनना क़रीब क़रीब नामुमकिन था.

लंदन शहर

लंदन आज दुनिया की फ़ैशन कैपिटल भी बन गया है. एक दौर था जब लंदन में नए-नए फ़ैशन डिज़ाइनर उभरते थे.

कामयाब होते ही फ़ैशन की दुनिया के बड़े नाम, उन्हें अपने साथ पेरिस, न्यूयॉर्क या मिलान ले जाते थे. मगर आज ऐसा नहीं है. यहां पर नाम कमाने के बाद फैशन डिज़ाइनर यहीं रहते हैं. दूसरे शहर नहीं जाते. आज लंदन दुनिया का सबसे फ़ैशनेबल शहर बन गया है.

सड़कछाप फ़ैशन से लेकर कोत्यूर और बड़े ब्रांड्स के फ़ैशन तक, यहां हर दर्जे की चीज़ें मिलेंगी. किसी और शहर में ये मुमकिन नहीं.

लंदन शहर आज अपनी विविधता के लिए भी जाना जाता है. आज लंदन में रहने वाले लोगों में से 37 फ़ीसदी यहां नहीं पैदा हुए, यानी बाहर से आकर यहां बसे हैं.

लंदन शहर

एक दशक पहले ये फ़ीसद 27 था. यहां दुनिया भर की सभ्यताओं का मेल होता है. अलग-अलग नस्ल, जाति और धर्म के लोग यहां आकर एक साथ हंसी-ख़ुशी से रहते हैं. यहां कमोबेश दुनिया की हर ज़बान के बोलने वाले मिल जाएंगे.

फिर लंदन की चुनौतियां, किसी भी तेज़ी से बढ़ते दूसरे शहर जैसी हैं. अमीरी और ग़रीबी का फ़र्क़ यहां हिंसा को जन्म देता है. एक दूसरे के प्रति नफ़रत यहां भी देखने को मिलती है.

इन चुनौतियों के बीच भी लंदन का काफ़िला चलता रहता है. बेहतर होगा लंदन को सिंगापुर की तरह एक शहरी देश में तब्दील कर दिया जाना चाहिए.

लंदन शहर

या फिर इसे एक ऐसे क़िले में बदल दिया जाए जो ये एलान करे कि ये दुनिया का सबसे अहम शहर है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख <link type="page"><caption> यहां पढ़ें</caption><url href=" http://www.bbc.com/culture/story/20160509-move-over-new-york-why-london-is-the-worlds-greatest-city" platform="highweb"/></link>, जो बीबीसी कल्चर पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)