मिस्र में भी 'लव जिहाद' जैसा विवाद

प्रेम संबंध, अंतरधार्मिक विवाह
    • Author, अली गमाल
    • पदनाम, बीबीसी अरबी सेवा
  • प्रकाशित

दुनिया भर में लगभग हर जगह शादी को कहीं न कहीं धर्म से जोड़कर देखे जाने का रिवाज़ रहा है.

भारत में लव जिहाद को लेकर पिछले दिनों काफी कुछ कहा सुना गया. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाप पंचायतें हुईं और सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा.

ऐसा ही कुछ मिस्र में भी हो रहा है. परंपराओं की दीवार टूट रही है तो विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं. विरोध में उठी आवाज़ें हिंसक भी हो रही हैं.

और इन्हीं सब चीजों के दरमियां नई पीढ़ी के लोगों में एक तरह का डर तो है, लेकिन उम्मीद की किरण भी दिखाई देती है.

अली गमाल की रिपोर्ट

प्रेम संबंध, अंतरधार्मिक विवाह

"हमारे प्यार की उम्र पांच साल हो गई थी, लेकिन मैंने कभी उसे छुआ तक नहीं."

यूनिवर्सिटी की साथी छात्रा होवैदा के साथ अपने रिश्तों को तारिक़ ने कुछ इस तरह से याद किया.

शादी के लिए उनका हाथ मांगना भी तारिक के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती थी.

उन्होंने बताया, "मैं बहुत हिचक रहा था. मुझे लगा कि जैसे ही मैं अपने दिल की बात कहूंगा मेरे सपने बिखर जाएंगे. इस बात के आसार बहुत ज़्यादा थे कि वह इनकार कर देगी."

मुश्किलों से लड़ाई

प्रेम संबंध, अंतरधार्मिक विवाह

तारिक मिस्र के एक मुसलमान हैं और होवैदा एक क्रिश्चियन थीं.

मिस्र में अंतरधार्मिक शादियों को स्वीकार नहीं किया जाता है और जो ऐसा करते हैं, उन्हें बड़ी क़ीमत चुकाने को तैयार रहना पड़ता है.

लेकिन इन सब के बावजूद होवैदा ने तारिक का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया.

वह बताते हैं, "मुझे उम्मीद नहीं थी. उसने सभी मुश्किलों से लड़ने की कसम ली ताकि हम शादी कर सकें."

लेकिन उनके राह में ऐसी मुश्किलें आने वाली थीं, जिससे उनके रिश्ते को जारी रखना मुश्किल हो गया.

हिंसक प्रतिक्रिया

पास्टर फ़ादर जॉर्ज मैट्टा.
इमेज कैप्शन, मेन्या के ईज़बेत हाना अयूब में सेंट जॉर्ज चर्च के पास्टर फादर जॉर्ज मैट्टा.

मिस्र में मजहब एक संवेदनशील मुद्दा रहा है. यहां ज्यादातर इसाई और मुसलमान हमेशा ऐसे रिश्तों से बचते रहे हैं. धार्मिक नेताओं ने अंतरधार्मिक विवाहों को दूसरे धर्म के लोगों की भर्ती के तौर पर देखा है.

फ़ादर जॉर्ज मैट्टा मेन्या के ईज़बेत हाना अयूब में सेंट जॉर्ज चर्च के पास्टर हैं. उनका मानना है कि मिस्र के भीतरी इलाकों में अंतरधार्मिक विवाहों को स्वीकार नहीं किया जाता है.

वे कहते हैं, "मेरी सलाह है कि नौजवान लोगों को अपने धर्म के भीतर जीवन साथी चुनना चाहिए."

लेकिन इसके साथ ही उन्हें भी लगता है कि लोगों का रवैया बदलना चाहिए, "यह महज एक सलाह है. पश्चिम की तरह खुलेपन जैसी स्थिति आने में यहां बहुत वक्त लगेगा."

सांप्रदायिक संघर्ष

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मिस्र के ही मेन्या प्रांत में पिछले साल एक मुस्लिम युवक की हत्या कर दी गई थी. इस घटना में पांच अन्य लोग घायल हो गए थे और इतना ही नहीं पांच ईसाइयों के घर भी जलाए गए थे.

और इस पूरी वारदात की वजह एक मुस्लिम लड़की और उसके क्रिश्चियन पड़ोसी की दोस्ती थी.

अहमद अताउल्लाह लेखक हैं और उन्होंने सांप्रदायिक संघर्षों पर अध्ययन भी किया है. उनका कहना है कि इस तरह की झड़पें होती रहती हैं.

वे कहते हैं, "इस तरह के ज़्यादातर सांप्रदायिक झड़पों की वजह मोहब्बत के मामले होते हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसका ज़िक्र शायद ही किया जाता है."

अहमद बताते हैं, "अधिकारी धर्मांतरण और यहां तक कि अपहरण जैसी घटनाओं को सांप्रदायिक झड़पों के लिए ज़िम्मेदार बताते हैं, लेकिन वे कभी नहीं कहते कि प्यार मोहब्बत के मामले इसके पीछे होते हैं."

रोकने वाले कानून

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अया और मिलाद का रिश्ता 2011 में मिस्र की क्रांति के दरमियां तहरीर स्क्वॉयर पर शुरू हुआ था, लेकिन तीन साल बाद वे निराश हो गए.

वे मिस्र में शादी नहीं कर सकते थे क्योंकि मिलाद एक ईसाई थे और अया एक मुसलमान लड़की.

मिस्र के कानून के मुताबिक़, मिलाद को इस शादी के लिए मुसलमान बनना होगा, लेकिन कोई इसाई लड़की बगैर मजहब बदले किसी मुसलमान से शादी कर सकती है.

अया और मिलाद ने किसी और मुल्क में जाकर शादी करके घर बसाने के बारे में सोचा भी, लेकिन इससे उनकी मुश्किलें आसान होने वाली नहीं थीं.

24 साल की अया कहती हैं, "तब भी हमें सिविल मैरिज डॉक्यूमेंट पर दस्तखत करने होंगे और इसका मतलब होगा कि हम मिस्र कभी वापस नहीं लौट पाएंगे."

अंतरधार्मिक शादी

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अया बताती हैं, "सरकार कभी हमारी शादी पर मुहर नहीं लगाएगी और न हमारे बच्चे मिस्र के कहलाएंगे और हमें हमारी आखिरी सांस तक मिस्र के बाहर ही रहना होगा."

अहमद अताउल्लाह का कहना है कि मिस्र में अंतरधार्मिक शादियों पर लगभग प्रतिबंध जैसी स्थिति है.

वे बताते हैं, "जब एक ईसाई लड़की किसी नोटरी के पास शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए जाती है तो अधिकारी उससे चर्च से मंजूरी की चिट्ठी लाने के लिए कहते हैं."

उन्होंने बताया, "मिस्र के चर्च ने ईसाई धर्म की विभिन्न शाखाओं से जुड़े लोगों की शादी को मंजूरी देने से लगातार इनकार किया है."

भारी कीमत

प्रेम संबंध, अंतरधार्मिक विवाह

अबीर एक क्रिश्चियन हुआ करती थीं. 24 साल पहले उन्होंने मोहम्मद से शादी की थी. वे मेन्या में ही रहते हैं, उसी प्रांत में जहां साल भर पहले भीषण सांप्रदायिक हिंसा हुई थी.

वे बताती हैं कि अंतरधार्मिक विवाहों को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया दिन पर दिन हिंसक होती जा रही है.

मोहम्मद बताते हैं कि जब उनकी शादी हुई थी तो गांव में वे जहां कहीं भी गए हर किसी ने उन्हें बधाई दी.

हालांकि इस जोड़े को जैसा कि इन हालात में अक्सर होता है, अपने रिश्ते के लिए फ़िर भी भारी क़ीमत चुकानी पड़ी.

एक मुसलमान से शादी करने और धर्म बदलने पर अबीर के परिवार ने उनसे अपने नाते तोड़ लिए और जब वे शादी के बाद अपने पिता से मिली थीं तो उन्होंने कहा, "मेरी अबीर मर चुकी है."

परिवार से नुकसान!

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इमेज कैप्शन, मिश्र में भी है प्यार पर धर्म का पहरा.

तारिक और होवैदा की मोहब्बत कॉलेज का प्यार था, लेकिन वे अबीर की तरह क़ीमत नहीं चुका पाए, हालांकि होवैदा इस्लाम कबूल करने के लिए तैयार थीं. वर्ष 2009 में वे अलग हो गए.

तारिक कहते हैं कि उन्हें डर था कि होवैदा को उसके परिवार वाले ही नुकसान पहुंचा सकते हैं.

उन्हें इसका मलाल रह गया. वे कहते हैं, "मैं अब शादीशुदा हूं. एक बुर्कानशीं और खूबसूरत बीवी का शौहर. प्यारे-प्यारे बच्चे हैं. खुदा करे कि उसे भी ये सब मिले."

तारिक का ग़म उनकी इन बातों से जाहिर हो जाता है, "लेकिन मैं ये नहीं कह सकता कि मैं अपनी बेगम से मोहब्बत करता हूं. मैं उस क्रिश्चियन लड़की से आज भी प्यार करता हूं जिससे मैं मिला करता था. मैं उसे कभी नहीं भूल पाऊंगा"

इस कहानी के किरदारों के नाम उनकी गुजारिश पर बदल दिए गए हैं.

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