ईरान परमाणु वार्ताः अब यहाँ से कहाँ?

वियना में ईरान परमाणु वार्ता
    • Author, जेरेमी बोवन
    • पदनाम, बीबीसी मध्य-पूर्व संपादक
  • प्रकाशित

ईरान के विवादित परमाणु समझौते की समय सीमा बढ़ाकर अगले साल जून अंत तक कर दी गई है.

इससे पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विएना में चल रही बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला.

विश्व की छह महाशक्तियों ने परमाणु कार्यक्रम को लेकर जो समयसीमा तय की थी वो सोमवार को ख़त्म हो गई.

ये सभी शक्तियाँ चाहती हैं कि अमरीकी प्रतिबंधों को हटाए जाने के एवज में ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम सीमित करे.

वियना में सोमवार को संपन्न हुए परमाणु कार्यक्रम वार्ता में भाग लेने वाले सभी पक्षों को उम्मीद है कि वे किसी समझौते पर जरूर पहुंचेंगे.

तेहरान राष्ट्रपति हसन रूहानी

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी का मानना है कि बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए बिना यहां से चले जाना बेवकूफी होगी.

तो तेहरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी का कहना है कि आज या कल बातचीत का नतीजा जरूर निकलेगा.

हालांकि सभी पक्षों ने ये भी स्वीकार किया कि समझौते पर पहुंचना कठिन होगा.

लेकिन सबने इस बात पर सहमति जताई कि बातचीत जारी रहनी चाहिए क्योंकि इसकी अनुपस्थिति में मामला युद्ध तक पहुंच सकता है.

निराशाजनक

एक साल पहले जिनेवा में हुए शुरुआती समझौते के पहले ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर मध्य-पूर्व का माहौल धीरे धीरे मगर लगातार युद्ध की ओर बढ़ता नजर आ रहा था.

ईरान परमाणु समझौता कार्यक्रम

इसराइल ने कई बार हमले की चेतावनी तक दे डाली थी.

वियना वार्ता में सभी देश जिस समझौते पर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं वो जटिल तो है लेकिन बातचीत का जारी रहना बेहद जरूरी है.

हालांकि वार्ता के बावजूद इस सवाल पर अब तक कोई सहमति नहीं बन पाई है कि ईरान यूरेनियम की कितनी मात्रा का संवर्धन कर सकेगा और इसके खिलाफ लगे प्रतिबंध किस हद तक कम किए जाएंगे.

ब्रिटेन के विदेश मंत्री फिलिप हेमंड ने बीबीसी से कहा है कि उन्हें वार्ता को लेकर अभी भी उम्मीद है.

ईरान परमाणु समझौता

ईरान परमाणु समझौते पर बातचीत में प्रगति तब संभव हुई जब साल 2013 की गर्मियों में ईरान में हसन रूहानी राष्ट्रपति चुने गए थे.

रूहानी की जीत ने उम्मीद जता दी कि वे परमाणु मुद्दे को पश्चिम के साथ सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाएंगे और इससे प्रतिबंधों से पैदा हुए बोझ को हल्का करने का रास्ता खुलेगा.

उन्होंने राष्ट्रपति बराक ओबामा से बात की, संयुक्त राष्ट सभा में अपना पक्ष रखा.

लेकिन उनका शासन भी जल्द ही खत्म होने वाला है. अगले छह महीने तक भले ये खिंच जाए लेकिन निश्चित तौर पर उससे ज्यादा नहीं चलेगा.

इधर तेहरान में भी वार्ता के खिलाफ लोगों का तर्क है कि पश्चिमी देशों का किसी भी हाल में विश्वास नहीं किया जाना चाहिए.

उनका कहना है कि वे तब तक दम नहीं लेंगे जब तक इस्लामिक रिपब्लिक को खत्म नहीं कर देते.

संशयपूर्ण स्थिति

ईरान परमाणु समझौता कार्यक्रम

ईरान परमाणु समझौता वार्ता के लिए कुछ और चीजें बेहद खतरनाक हैं, जैसे वाशिंगटन डीसी में चक्कर काट रहे कट्टरपंथी.

नए साल में अमरीकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकनों का नियंत्रण हो जाएगा.

और इस बात की मजबूत संभावना जताई जा रही है कि नई कांग्रेस ईरान पर कुछ और प्रतिबंध लगाने की कोशिश करेगी. और इसका साफ मतलब होगा वार्ता का बीच रास्ते में रुक जाना.

ईरान के साथ हुए करार को पूरी तरह खत्म कर देने के लिए सऊदी अरब और इसराइल के बीच एक गुपचुप गठबंधन भी बनता नजर आ रहा है.

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू
इमेज कैप्शन, वियना वार्ता में इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ईरान की तुलना फिर से नाजी जर्मनी से की.

दोनों देश इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति बेहद आशंकित हैं.

सऊदी अरब के लिए ईरान एक प्रतिद्वंद्वी क्षेत्रीय सुपरपावर है.

वियना में जब वार्ता चल रही थी इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ईरान की तुलना फिर से नाजी जर्मनी से की थी.

नेतन्याहू ने बीबीसी को बताया, "एक खराब समझौते से अच्छा है कि कोई समझौता ही न हो."

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