सियासत में फंसे एक सींग वाले सिमटते गैंडे

    • Author, दिलीप कुमार शर्मा
    • पदनाम, गुवाहाटी से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

पूर्वोत्तर राज्य असम में इस साल 10 महीनों मे 15 गैंडे मारे जा चुके हैं. लेकिन राज्य सरकार के वन और पर्यावरण मंत्री एतुवा मुंडा कहते हैं कि इस साल गैंडों की मौत में कमी आई है.

उनके अनुसार पिछले साल कुल 33 गैंडे मारे गए थे जबकि इस वर्ष 15 गैंडे ही मरे हैं.

असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में एक सींग वाले दुनिया के दो-तिहाई गैंडे रहते हैं. लेकिन अब तक कोई भी सरकार उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर पाई है. लिहाज़ा यहां गैंडों की लगातार हत्या हो रही है.

इस उद्यान में विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रहे एक सींग वाले गैंडों की सुरक्षा के बड़े-बड़े सरकारी दावों के बीच भारी हथियारों से लैस शिकारी गैंडों को मार कर सींग काट ले जाते हैं.

अतुवा मुंडा, वन मंत्री, असम

असम दौरे पर आए केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने पिछले दिनों एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि गैंडों की सुरक्षा के लिए गठित की जा रही प्रस्तावित राइनो प्रोटेक्शन फ़ोर्स की पहली कपंनी के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही धन की मंज़ूरी दे दी है.

लेकिन असम सरकार की तरफ़ से इस सुरक्षा कंपनी में जवानों की भर्ती की प्रक्रिया को पूरा करने का काम अभी बाक़ी है.

असम के वन मंत्री मुंडा ने अपनी प्रतिक्रया में कहा कि केंद्रीय मंत्री पूरी तरह झूठ बोल रहे हैं.

उन्होंने कहा, "हम 1,200 कर्मियों की एक विशेष राइनो प्रोटेक्शन फ़ोर्स बनाना चाहते थे. लेकिन केंद्र सरकार ने केवल 112 जवानों की एक ही कंपनी के लिए धन की मंज़ूरी दी है. वास्तविक राशि अभी तक नहीं मिली है."

मुंडा ने यहां तक आरोप लगाया कि मोदी सरकार बनने के बाद पिछले डेढ़ साल में कई केंद्रीय मंत्रियों ने यहां का दौरा किया, लेकिन क्षेत्र से संबंधित मुद्दों को संबोधित करने की बजाए वे ज़्यादातर राजनीतिक बयान देने में लिप्त रहे हैं.

मुंडा अब कह रहे हैं कि प्रस्तावित कंपनी में 112 जवानों की भर्ती के लिए अगर केंद्र सरकार मंजूर किए गए 2 करोड़ रुपये नहीं भेजती है तो जल्द ही राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया का काम शुरू करेगी.

गैंडों की हत्या से जुड़े सवाल पर वन मंत्री कहते हैं कि इस साल जनवरी से अक्टूबर के बीच शिकारियों ने 15 गैंडों की हत्या की है, जिनमें 12 गैंडे काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के थे. उनके विभाग द्वारा किए गए उपायों के कारण इस साल कम गैंडे मरे हैं. पिछले वर्ष कुल 33 गैंडों की हत्या की गई थी, जिनमें 27 गैंडे काजीरंगा उद्यान के थे.

पर्यावरण संरक्षण पर काम कर रहे गैर सरकारी संगठन आरण्यक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी विभव तालुकदार ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि इस साल गैंडों की हत्या थोड़ी कम हुई है लेकिन इस संख्या को शून्य करने के लिए जिन प्रयासों की जरूरत है वैसा काम ज़मीनी स्तर पर देखने को नहीं मिल रहा है.

काजीरंगा के अलावा गैंडों के प्रजनन के लिए उरांग, पबीतोरा जैसे उद्यान में जो छोटे इलाके हैं वहां इनकी सुरक्षा के लिए सरकार बराबर अर्थिक मदद नहीं दे रही है.

वे कहते हैं कि गैंडों की सुरक्षा के लिए इंटेलिजेंस नेटवर्क सबसे अहम है और इस नेटवर्क को चलाने के लिए असम सरकार को धन देना होगा. इस तरह की खामियों को जब तक दूर नहीं किया जाएगा, गैंडों की हत्या को पूरी तरह रोक पाना असंभव होगा.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 2000 से अधिक एक सींग वाले गैंडे हैं.

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