मुश्किल में मायावती की नज़र नौजवानों पर

 बसपा नेता, बीएसपी लीडर
    • Author, अनिल यादव
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
  • प्रकाशित

अपने राजनीतिक कैरियर का सबसे बुरा वक़्त देख रही बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश में फिर सत्ता हासिल करने के लिए युवाओं पर नज़रें टिकाई हैं.

मायावती ने आदेश दिया है कि पार्टी में हर स्तर पर समितियों में 35 साल तक की उम्र के कम से कम 50 फ़ीसदी सदस्य होने चाहिए. इसके लिए नए सिरे से भर्ती की जानी चाहिए. यह पहला मौका है जब बसपा में युवाओं को महत्व दिया जा रहा है.

पार्टी की कमान मायावती के हाथ में आने के बाद से ही पार्टी में कभी कोई युवा या छात्र संगठन नहीं रहा और न ही कभी किसी युवा नेता का नाम सुना गया.

प्रोफ़ेशनल युवाओं को तरजीह

मायावती, बसपा नेता, बीएसपी लीडर

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर ने कहा, "बहन जी के हुक़्म के मुताबिक़ पार्टी में 50 फ़ीसदी युवाओं को रखने के फ़ैसले के बाद निष्क्रिय कमेटियों और पदाधिकारियों की समीक्षा का काम शुरू कर दिया गया है."

सूत्रों के मुताबिक़, पार्टी की संकीर्ण, सर्वण विरोधी, चुनाव के अलावा अन्य गतिविधियों से दूर रहने वाली छवि बदलने के लिए मैनेजमेंट, क़ानून या अन्य प्रोफेशनल डिग्री वाले नौजवानों को तरजीह दी जा रही है ताकि युवा वोटरों को आकर्षित किया जा सके.

कार्यकर्ताओं से कहा जा गया है कि वे छात्रों और युवाओं को पार्टी की वेबसाइट के बारे में बताएं और सवर्णों को “हमारे अन्य भाई” कह कर संबोधित करें.

आरोप और अंसतोष

मायावती, बसपा नेता, बीएसपी लीडर

पिछले लोकसभा चुनाव में दलित वोट के खिसकने के कारण उत्तर प्रदेश में किसी सुरक्षित सीट पर भी जीत हासिल नहीं होने के बाद बड़ी तादाद में लोग पार्टी छड़ कर जाने लगे.

दूसरी ओर, चुनाव आयोग बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा भी ख़त्म कर सकता है.

मायावती पर कई तरह के आरोप लगे हैं. इनमें टिकट देने पर विवाद, दलित आंदोलन से समझौता करने के आरोप और पार्टी को तानाशाह की तरह चलाने के आरोप शामिल हैं.

इनके कारण कई नेता दूसरी पार्टियों में चले गए हैं. बसपा के भीतर के असंतोष को समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पाटी भी लगातार हवा दे रही हैं.

'सामाजिक परिवर्तन मंच' के नेता और कभी मायावती के करीबी रहे पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद ने रविवार को पार्टी के संस्थापक कांशीराम का समानांतर जन्मदिवस आयोजित किया.

पार्टी से किनारा करने वाले इन नेताओं का कहना है कि अधिकांश युवा मायावती को अवसरवादी मानते हैं, वे उनके साथ नहीं जा सकते.

संभलने का मौक़ा

मायावती, बसपा नेता, बीएसपी लीडर

पूर्व आईपीएस अधिकारी और दलित एक्टिविस्ट, एसआर दारापुरी मायावती पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हैं और दावा करते हैं कि इसी कारण दलितों को बसपा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा नहीं मिल पाया.

वो कहते हैं कि मायावती पर लगे तमाम तरह के आरोपों के कारण दलितों का उनसे भावनात्मक जुड़ाव काफी कमजोर पड़ चुका है और बसपा को दोबारा संभल पाना मुश्किल है.

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