लखनऊ का मौसम नगर और बेगम अख़्तर की कब्र

बेगम अख्तर
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
  • प्रकाशित

लखनऊ के मौसमनगर तक पहुँचने का रास्ता तंग, घुमावदार गलियों से गुज़रता है.

यहां पसंदबाग में अवध की मशहूर ग़ज़ल और ठुमरी गायिका बेगम अख़्तर का फार्म हुआ करता था. आज यहां बेगम अख़्तर और उनकी माँ की कब्रें हैं. ये कब्रगाह ही अब उनका स्मारक है.

मौसमनगर तक पहुंचना आसान नहीं है. एक बार वहाँ पहुँचने पर ही लोग फैज़ाबाद में जन्मी बेगम अख़्तर के स्मारक का पता बता पाते हैं.

अतुल चंद्रा की रिपोर्ट

इस छोटे लेकिन खूबसूरत स्मारक के लिए बेगम अख़्तर के पोते शहजान पूरा श्रेय शांति हीरानंद को देते हैं, "शांति आपा की मेहनत से ही यह बन पाया है. दो साल पहले तक यह बहुत बुरे हाल में था."

अब इसकी देख-रेख का ज़िम्मा लखनऊ की एक संस्था सनतकदा ने लिया है. इस संस्था की माधुरी कुकरेजा पिछले कुछ वर्षों से बेगम अख़्तर की याद में उनकी बरसी पर यहाँ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं.

जायदाद पर विवाद

बेगम अख्तर के पोते शहज़ान.
इमेज कैप्शन, बेगम अख्तर के पोते शहज़ान.

सनतकदा ने इस स्थान की साफ़-सफाई के लिए सुरैया और उनके परिवार को लगा रखा है.

साल 1944 इश्तियाक अहमद अब्बासी से विवाह के कुछ साल बाद बेगम अख़्तर ने लखनऊ के ही दो बच्चों हसन अख़्तर और नसीम अख़्तर को गोद ले लिया था.

हसन अख़्तर के बेटे शहजान बताते हैं कि लखनऊ के हेवलॉक रोड स्थित जायदाद को लेकर हुए विवाद के बाद उनके पिता मानसिक रूप से इतना विक्षिप्त हो गए कि वे सबको छोड़ कर कहीं चले गए.

बकौल शहजान, "उन्हें आज भी लापता माना जाता है." उनके जाने के बाद शहजान के परिवार ने पसंदबाग के फार्म को अपना ठिकाना बना लिया.

'लगन और मोहब्बत'

बेगम अख्तर की बेटी नसीम अख्तर
इमेज कैप्शन, बेगम अख्तर की बेटी नसीम अख्तर.

लेकिन बेगम अख़्तर की बेटी नसीम को अपनी माँ की सुखद यादें हैं, "उन्होंने हमें शहज़ादी की तरह पाला था. हमें याद है हमारी शादी में गवर्नर आए थे और अखबारों में खबरें भी छपी थीं."

नसीम कहती हैं कि बेगम अख़्तर का अपने बच्चों के प्रति 'लगन और मोहब्बत' उन्हें आज भी याद आता है.

लेकिन एक कब्रगाह के अलावा बेगम अख़्तर की अन्य कोई धरोहर लखनऊ या फैज़ाबाद में नहीं है. कैसरबाग वाला घर उन्होंने ख़ुद ही बेच दिया था.

हेवलॉक रोड वाला घर भी उनके मरने के बाद गिरवा दिया गया. नसीम के अनुसार उसमें हिस्सेदारी को लेकर आज भी मुकदमा चल रहा है.

पुश्तैनी मकान

बेगम अख्तर

ऐसा ही कुछ हाल उनकी फैज़ाबाद वाली जायदाद का है. हमदानी कोठी मोहल्ले में जो उनका घर था वो सुरक्षित तो है, लेकिन अब किसी और का है. भदरसा बाजार स्थित उनका पुश्तैनी मकान टूट चुका है.

लेखक और साहित्यकार यतीन्द्र मिश्रा कहते हैं, "अगर मैं फैज़ाबाद के समाचार पत्रों में उनके घर की फोटो छपवा दूँ तो शायद ही कोई सक्षम होगा जो उसे पहचानें. उनके नाम की एक सड़क तक तो है नहीं."

यतीन्द्र कहते हैं कि भले ही अब फैज़ाबाद में लोग उनके गायन से या उनकी शख़्सियत से वाकिफ ना हों लेकिन अख़्तरी बाई से जुड़े तखल्लुस फ़ैज़ाबादी को पढ़ कर आज भी फख्र महसूस करता है."

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