अमेरिकी सेना ने कहा- दक्षिणी ईरान में नए हमले शुरू

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इमेज कैप्शन, अप्रैल 2026 में ली गई तस्वीर में अमेरिकी वायुसेना का F-35 लाइटनिंग II लड़ाकू विमान
    • Author, टोबी मान
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 3 मिनट

अमेरिकी सेना ने कहा है कि उसने दक्षिणी ईरान में नए हमले किए हैं, जिनमें ईरानी मिसाइल ठिकानों और उनके जहाज़ों को निशाना बनाया गया जो समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान में कहा कि ये हमले आत्मरक्षा में किए गए और उनका मक़सद ईरानी बलों से सैनिकों को होने वाले ख़तरे से बचाना था.

सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने कहा कि अमेरिकी सेना जारी युद्धविराम के दौरान संयम बरतते हुए अपने सैनिकों की रक्षा करती रहेगी.

ये हमले ऐसे समय हुए हैं, जब ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन संघर्ष ख़त्म करने वाला कोई समझौता तत्काल होने वाला नहीं है.

हॉकिन्स ने बताया कि हमले बंदर अब्बास के पास किए गए. यह दक्षिणी बंदरगाह शहर ईरानी नौसैनिक अड्डे का केंद्र है और होर्मुज स्ट्रेट पर स्थित है.

इससे पहले ईरानी सरकारी मीडिया ने ख़बर दी थी कि बंदर अब्बास में धमाकों की आवाज़ सुनने के बाद स्थानीय अधिकारी जांच कर रहे हैं.

युद्धविराम के बीच हमला

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इमेज कैप्शन, इससे पहले 28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे

ईरान ने अभी तक इन नए अमेरिकी हमलों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

यह भी साफ़ नहीं है कि इन हमलों का अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते पर क्या असर पड़ेगा.

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पिछले हफ़्ते के आख़िर में डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि दोनों पक्ष किसी समझौते के क़रीब हैं लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि उन्होंने वार्ताकारों को जल्दबाजी न करने का निर्देश दिया है.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि संभव है कि सोमवार तक कोई समझौता हो जाए.

लेकिन ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने जवाब देते हुए कहा, "यह सही है कि चर्चा में शामिल कई मुद्दों पर हम किसी निष्कर्ष तक पहुंचे हैं लेकिन यह कहना कि समझौते पर हस्ताक्षर अब तुरंत होने वाले हैं, ऐसा दावा कोई नहीं कर सकता."

अमेरिका और ईरान की सेनाएं आठ अप्रैल से युद्धविराम का पालन कर रही हैं.

ईरान ने होर्मुज से गुज़रने वाले समुद्री व्यापार पर अपना नियंत्रण बनाए रखा है जबकि अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की कोशिश कर रही है.

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर व्यापक हमले शुरू किए थे, जिसके बाद पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष फैल गया.

इसके जवाब में ईरान ने इसराइल और खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगी देशों पर हमले किए और प्रभावी रूप से होर्मुज को बंद कर दिया.

इस क़दम से वैश्विक स्तर पर तेल की क़ीमतों में भारी उछाल आ गया.

क्या बोले मार्को रुबियो

अपनी पत्नी के साथ भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो

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इमेज कैप्शन, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा कि अब भी ईरान के साथ समझौते की संभावना है

अमेरिका के इन ताज़ा हमलों के बावजूद विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ईरान के साथ समझौता अभी भी संभव है.

उन्होंने यह भी कहा, "क़तर में बातचीत हुई है, हमें देखना होगा कि आगे कोई प्रगति होती है या नहीं. मुझे लगता है कि ज़्यादा समय समझौते के दस्तावेज़ों में इस्तेमाल किए गए शब्दों और भाषा को समझने पर लगेगा, इसलिए इसमें कुछ दिन लगेंगे."

भारत दौरे पर आए रुबियो ने पत्रकारों से कहा, "होर्मुज़ स्ट्रेट खुला रहना चाहिए. जो वहां हो रहा है वह ग़ैरक़ानूनी है, नियमों के ख़िलाफ़ है, दुनिया को अस्थिर कर रहा है और अस्वीकार्य है."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.