'मैं गेंदबाज़ों के बारे में ज़्यादा नहीं सोचता', वैभव के करिश्मे से राजस्थान खिताब के क़रीब

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
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कुछ वर्ष पहले तक भारतीय क्रिकेट में बिहार की चर्चा न के बराबर होती थी. लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने यह तस्वीर पूरी तरह से बदल दी है.
अगर बिहारियों की तारीफ़ में यह बात कही जाती है कि एक बिहारी सब पर भारी तो वैभव सूर्यवंशी इस मामले में पूरी तरह से फिट बैठते हैं.
वैभव सूर्यवंशी के तौर पर बिहार की एक असाधारण प्रतिभा ना सिर्फ़ देश बल्कि दुनिया में नाम कमा रही है. वैभव को देखकर हर किसी के ज़ेहन में सचिन तेंदुलकर की किशोरावस्था की यादें ताज़ा हो रही हैं.
हैरानी की बात है कि वैभव के आदर्श तेंदुलकर या धोनी ना होकर ब्रायन लारा रहे हैं जो उनके पैदा होने से पहले ही रिटायर हो चुके थे.
बुधवार की रात आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ सूर्यवंशी ने रिकॉर्ड्स का अंबार लगा दिया. लेकिन, इसमें भी एक ख़ास रिकॉर्ड ये रहा कि उन्होंने एक दशक से ज़्यादा समय तक टिके क्रिस गेल के एक सीज़न में सबसे ज़्यादा 59 छक्के के रिकॉर्ड को तोड़ दिया.
सूर्यवंशी की 97 रनों की तूफ़ानी पारी की बदौलत राजस्थान रॉयल्स ने निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट पर 243 रन बनाए, जवाब में दिग्गज बल्लेबाज़ों से सजी सनराइजर्स हैदराबाद की टीम 19.2 ओवर में 196 रन पर ऑल आउट हो गई.
इस तरह से रॉजस्थान रॉयल्स ने हैदराबाद पर 47 रन से जीत दर्ज की.
बनाए कई रिकॉर्ड्स

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सूर्यवंशी भले ही तीन रनों के चलते मैच में आईपीएल के इतिहास में सबसे तेज़ शतक से चूक गए लेकिन 680 रनों के साथ ऑरेंज कैप अब भी उनके नाम ही है और वो भी क़रीब 250 की स्ट्राइक रेट से.
आईपीएल प्ले ऑफ मैचों में उनसे तेज़ अर्धशतक (16 गेंदों) पर किसी और ने नहीं लगाया है. इतना ही नहीं एक मैच में 10 से ज़्यादा छक्के जड़ने का कमाल वो 1-2 नहीं बल्कि अब तक चार बार कर चुके हैं.
ऐसे में अब भारतीय चयनकर्ताओं के सामने एक सीधा सवाल और लेकिन मुश्किल चुनौती ये है कि अब किस तर्क के ज़रिए ऑयरलैंड दौरे के लिए उनको नहीं चुना जाएगा.
रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गज ने मुझे आईपीएल की शुरुआत में ये कहा था कि भावना में बहने की ज़रूरत नहीं है और वैभव को एक सीज़न फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेलनी होगी. सब्र रखना होगा सभी को.. आईपीएल के बीच में ही अश्विन ने अपनी राय बदली और ये कहा कि ये लड़का निश्चित तौर पर टी20 टीम में जगह पाने के योग्य है.
हैदराबाद के ख़िलाफ़ सनसनीखेज़ पारी के बाद अश्विन ने कहा कि सिर्फ़ एक ही फॉर्मेट के चयन के बारे में हम लोग क्यों बातें कर रहे हैं?
अजीत अगरकर और उनके साथियों के लिए वैभव सूर्यवंशी को टीम इंडिया में नहीं चुनने पर शायद सुप्रीम कोर्ट में कोई उन्हें ना ले जाये!
आलोचक भी मुरीद

बहरहाल, वैभव की मौजूदा कामयाबी के उन्माद में ये नहीं भू जाना चाहिए कि कुछ महीने पहले तक अक्सर आलोचक उनकी उम्र को लेकर सवाल उठाते थे.
लेकिन, अब भी हर मैच के बाद उनकी बातों को सुनिये और उनके आचरण को देखिये तो आपको कहीं से यह लगेगा कि यार ये तो वाक़ई में 15 साल का ही बच्चा है.
लेकिन, ये बच्चा बल्ला हाथ में लेते ही 29 गेंदों पर 12 छक्के लगाता है! वैभव की बातों में वही मासूमियत है जो कभी तेंदुलकर के शुरुआती दौर में दिखती थी.
जिस तरह की परिपक्वता सचिन ने तेज़ी से पहले टेस्ट क्रिकेट और फिर वन-डे क्रिकेट में दिखाई, वैभव इस दौर में आईपीएल और अंडर 19 वर्ल्ड कप में ऐसा कर रहें हैं.
अंतर सिर्फ़ इतना है कि तेंदुलकर मुंबई घराने से आते थे, जहां पर उन्हें गावस्कर-वेंगसरकर और ना जाने कितने दिग्गज आदर्श और मार्गदर्शकों का साथ मिला, वहीं वैभव बिहार के एक छोटे से गांव ताजपुर (समस्तीपुर) से आते हैं जहाँ से ज़िला स्तर की क्रिकेट खेलने वाले रोल मॉडल भी उनके पास नहीं थे.
रॉयल्स की कसी गेंदबाज़ी

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ख़ैर, सूर्यवंशी के अलावा ध्रुव जुरैल ने भी 21 गेंदों पर अर्धशतक बनाया लेकिन आख़िरी लम्हों में सनराइजर्स ने कसी हुई गेंदबाज़ी करते हुए राजस्थान को 250 के नीचे रोकने में थोड़ी तसल्ली महसूस की होगी.
और जब दूसरे विकेट के लिए ईशान किशन और ट्रेविस हेड की जोड़ी ने सिर्फ 15 गेंदों पर 51 रन जोड़े तो ऐसा लगा कि क्या इस मैच में रोमांचक अंत भी हो सकता है. लेकिन, इसके बाद सनराइजर्स के विकेट धड़ाधड़ गिरते चले गए और 7वें ओवर के दौरान स्कोर पाँच विकेट के नुकसान पर 81 रन हो गया.
जोफ्रा आर्चर के चार ओवर में 58 रन किसी दूसरे दिन साधरण गेंदबाज़ी के आंकड़े साबित होते लेकिन इस स्पैल में उनके तीन विकेट थे.. अभिषेक शर्मा, ईशान और हेड के... जो हैदराबाद की जान हैं.
नितीश कुमार रेड्डी और सलिल अरोड़ा ने आक्रामक बल्लेबाज़ी करते फिर से मैच में जान डालने को कोशिश की. जब तक वो क्रीज़ पर मौजूद रहे तब तक लक्ष्य के लिए ज़रूरी रन रेट अब भी नियंत्रण में दिख रहा था.
यहीं पर रविंद्र जडेजा की एंट्री होती है और 3 ओवर में सिर्फ़ 21 रन देते हुए उन्होंने रेड्डी-अरोड़ा की जोड़ी को पवेलियन भेज दिया.
47 रन की इस जीत ने राजस्थान रॉयल्स के हौसले गुजरात टाइटंस के ख़िलाफ़ होने वाले क्वालिफायर 2 के लिए जीत का प्रबल दावेदार बना दिया है.
इस जीत के साथ ही राजस्थान रॉयल्स क्वालीफ़ायर-2 में पहुंच गई है और अब फ़ाइनल में पहुंचने के लिए उनके सामने गुजरात टाइटंस की चुनौती होगी. दोनों टीमें शुक्रवार को न्यू चंडीगढ़ में आमने-सामने होंगी.
रॉयल्स की टीम बड़ी मुश्किल और थोड़ी बेहतर किस्मत के चलते चौथी टीम के तौर पर प्ले ऑफ में सबसे देर से आई, लेकिन जिस तरह से उनके टॉप खिलाड़ियों ने कत्ले-आम मचाया है उससे तो ये साफ है कि 2008 के बाद ये टीम फिर से अपने एक औऱ ख़िताब जीतने की दिशा में जाती दिख रही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित































